शी चिनफिंग/डोनाल्ड ट्रंप

चीन और अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव : राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को दी दोटूक चेतावनी, ताइवान को बताया आपसी टकराव की मुख्य वजह

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एजेंसी, बीजिंग। Xi Jinping Warning : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका का रुख दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष या बड़े टकराव का कारण बन सकता है। चीन की सरकारी मीडिया द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत बेहद तनावपूर्ण माहौल में हुई। शी चिनफिंग ने स्पष्ट किया कि ताइवान का मुद्दा चीन की संप्रभुता से जुड़ा है और इस पर किसी भी तरह की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बंद कमरे में दो घंटे तक चली रणनीतिक वार्ता

चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ द्वारा जारी विवरण के अनुसार, बीजिंग में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह बैठक बंद कमरे में आयोजित की गई। करीब दो घंटे तक चली इस द्विपक्षीय बातचीत में शी चिनफिंग ने ट्रंप से कहा कि अगर अमेरिका ताइवान के मामले को संवेदनशीलता के साथ संभालता है, तो चीन और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह स्थिर बने रहेंगे। राष्ट्रपति शी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की भविष्य की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वाशिंगटन ताइवान को लेकर अपनी नीतियों में कितना बदलाव लाता है।

टकराव और संघर्ष की स्थिति पैदा होने की आशंका

बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति का लहजा काफी सख्त रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ताइवान के मामले में अमेरिका ने अपने मौजूदा रुख में बदलाव नहीं किया और स्थिति हाथ से निकली, तो दोनों देशों के बीच सीधा ‘टकराव और संघर्ष’ हो सकता है। शी ने साफ तौर पर कहा कि ऐसी स्थिति में चीन-अमेरिका संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे, जिसका असर केवल इन दो देशों पर ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था पर होगा। ट्रंप के साथ इस गहन मंत्रणा के बाद चीनी पक्ष ने यह संदेश दे दिया है कि ताइवान के मुद्दे पर वे किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं हैं।

वैश्विक कूटनीति पर बढ़ता दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही चीन और अमेरिका के बीच व्यापार और सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा है। ताइवान मुद्दे पर शी चिनफिंग का यह कड़ा बयान अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। दो घंटे की इस मैराथन बैठक के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखे। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका चीन की इस चेतावनी के बाद अपनी ताइवान नीति में कोई फेरबदल करेगा या फिर प्रशांत क्षेत्र में टकराव की स्थिति और अधिक गंभीर रूप लेगी।

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