एजेंसी, नई दिल्ली। शराब घोटाले में केजरीवाल और सिसोदिया का सख्त रुख : दिल्ली के कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े कानूनी घटनाक्रम में एक नया मोड़ सामने आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक दुर्गेश पाठक को अपना पक्ष रखने के लिए ‘अंतिम अवसर’ प्रदान किया है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इस अदालती कार्यवाही के प्रति कड़ा प्रतिरोध जताते हुए न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ का बहिष्कार करने और अपना ‘सत्याग्रह’ जारी रखने का आधिकारिक निर्णय लिया है।
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— Sandesh Wahak (@sandeshwahakweb) April 29, 2026
अदालती आदेश और जवाब दाखिल करने की अंतिम मोहलत
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आरोपियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें आगामी शनिवार तक अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि सोमवार से इस मामले की नियमित सुनवाई आरंभ कर दी जाएगी। हालांकि, इस सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं की ओर से न तो कोई अधिवक्ता उपस्थित हुआ और न ही उनकी ओर से कोई लिखित दलील प्रस्तुत की गई। न्यायालय का यह आदेश उस समय आया है जब मामले में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों का पक्ष जानना अनिवार्य है।
आम आदमी पार्टी का बहिष्कार और ‘सत्याग्रह’ का निर्णय
आम आदमी पार्टी ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाते हुए उनकी अदालत की कार्यवाही में भाग लेने से पूर्णतः इनकार कर दिया है। पार्टी के मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व किसी भी कानूनी या राजनैतिक परिणाम को भुगतने के लिए मानसिक रूप से तैयार है। उन्होंने तर्क दिया कि जहाँ न्याय की न्यूनतम संभावना भी न दिखाई दे, वहाँ पक्ष रखना निरर्थक है। ‘आप’ नेताओं का यह ‘सत्याग्रह’ न्यायपालिका के एक विशेष खंड के प्रति उनके अविश्वास को दर्शाता है।
जज के हटने की याचिका और हितों के टकराव का आरोप
इस संपूर्ण विवाद की जड़ अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर वह याचिका है, जिसमें उन्होंने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से स्वयं को इस केस से अलग (Recusal) करने का आग्रह किया था। केजरीवाल ने जज पर हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए आशंका जताई थी कि उन्हें इस पीठ से न्याय प्राप्त नहीं हो पाएगा। हालांकि, न्यायमूर्ति शर्मा ने इस याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। इसी निर्णय के विरोध स्वरूप आम आदमी पार्टी ने अब कानूनी लड़ाई को अदालत के भीतर लड़ने के बजाय बहिष्कार का मार्ग चुना है।
आगामी सुनवाई और संभावित विधिक संकट
सोमवार से शुरू होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक सिद्ध हो सकती है। यदि आरोपी शनिवार तक अपना जवाब दाखिल नहीं करते हैं, तो न्यायालय एकपक्षीय सुनवाई या अन्य कड़े विधिक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होगा। ‘आप’ नेताओं का यह रुख दिल्ली की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने सिद्धांतों के लिए किसी भी प्रकार के दंडात्मक परिणाम का सामना करने को तत्पर हैं, किंतु वे उस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे जिसे वे पक्षपातपूर्ण मान रहे हैं। अब सभी की दृष्टि सोमवार को होने वाली उच्च न्यायालय की कार्यवाही पर टिकी है।
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