एच-1 बी वीजा

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका : ट्रंप की पार्टी ने एच-1 बी वीजा पर 3 साल की रोक के लिए संसद में पेश किया कड़ा बिल

अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका देश/प्रदेश

एजेंसी, वॉशिंगटन। H1B Visa 2026 : अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीयों के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने संसद में एक नया बिल पेश किया है, जिसमें एच-1 बी वीजा पर अगले 3 साल तक पूरी तरह से पाबंदी लगाने का प्रस्ताव है। इस बिल का उद्देश्य ‘अमेरिकन ड्रीम’ को वहां के स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित करना और विदेशी कामगारों की संख्या में कटौती करना है। एरिजोना के सांसद एली क्रेन समेत 7 दिग्गज नेताओं ने इस ‘एच-1 बी दुरुपयोग रोकथाम बिल-2026’ को सदन पटल पर रखा है। माना जा रहा है कि साल के अंत तक इस पर वोटिंग हो सकती है।

भारतीयों पर सबसे ज्यादा मार और कोटा में भारी कटौती

अमेरिका हर साल करीब 85 हजार एच-1 बी वीजा जारी करता है, जिनमें से लगभग 75 प्रतिशत यानी 63 हजार वीजा अकेले भारतीय पेशेवरों को मिलते हैं। अगर यह बिल कानून बनता है, तो 3 साल की रोक के बाद जब यह वीजा दोबारा शुरू होगा, तब इसका कोटा 85 हजार से घटाकर महज 25 हजार प्रति वर्ष कर दिया जाएगा। इससे आईटी सेक्टर में काम करने वाले हजारों भारतीय युवाओं का भविष्य अधर में लटक सकता है। ‘मागा’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों का मानना है कि विदेशी पेशेवर कम वेतन पर काम करके स्थानीय अमेरिकियों की नौकरियां छीन रहे हैं।

कड़े नियम: 1.86 करोड़ का न्यूनतम वेतन और लॉटरी सिस्टम का अंत

इस नए बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं जो इस वीजा को पाना लगभग नामुमकिन बना देंगे:

  • न्यूनतम वेतन: अब केवल उन्हीं पेशेवरों को वीजा मिलेगा जिन्हें अमेरिकी कंपनियां सालाना कम से कम 1 करोड़ 86 लाख रुपए का वेतन देंगी। फिलहाल ऐसी कोई सीमा तय नहीं है।

  • लॉटरी सिस्टम खत्म: वर्तमान में लागू लॉटरी प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाएगा, जिससे कंपनियों के लिए अपनी पसंद के विदेशी कर्मचारी को बुलाना कठिन होगा।

  • परिवार पर पाबंदी: नए नियमों के तहत एच-1 बी वीजा धारक अपनी पत्नी और बच्चों को साथ अमेरिका नहीं ले जा पाएंगे।

  • प्रशिक्षण पर रोक: मास्टर्स करने वाले छात्रों को मिलने वाली ‘ओपीटी’ (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) की सुविधा भी खत्म कर दी जाएगी, जिससे पढ़ाई के बाद वहां अनुभव लेना संभव नहीं होगा।

फीस में भारी बढ़ोतरी और ग्रीन कार्ड का इंतजार

ट्रंप प्रशासन पहले ही एच-1 बी वीजा की फीस में बेतहाशा वृद्धि कर चुका है। अब इस वीजा के लिए करीब 94 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा, अमेरिका में स्थायी रूप से बसने के लिए जरूरी ‘ग्रीन कार्ड’ का इंतजार अब बढ़कर 15 साल तक पहुंच गया है। दूतावासों में इंटरव्यू की तारीखें भी महीनों आगे खिसक रही हैं, जिससे कई लोग अपनी नौकरियां गंवा चुके हैं।

दुनिया के अन्य देशों की ओर मुड़ेगा भारतीय टैलेंट

भारत हर साल बड़ी संख्या में कंप्यूटर इंजीनियर और कोडर तैयार करता है, जो टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के जरिए अमेरिका जाते हैं। जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका के दरवाजे इसी तरह बंद होते रहे, तो भारतीय प्रतिभाएं अब यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट जैसे देशों का रुख करेंगी। अमेरिका की टेक इंडस्ट्री के लिए भी यह एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि वहां की बड़ी कंपनियां काफी हद तक भारतीय टैलेंट पर निर्भर हैं।

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