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ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तेहरान का कड़ा ऐतराज

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ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तेहरान का कड़ा ऐतराज

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच सुलह की कोशिशें फिलहाल बेपटरी होती नजर आ रही हैं। इसी बीच ईरानी संसद की सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेजई का मानना है कि पाकिस्तान एक मित्र राष्ट्र जरूर है, लेकिन वह इस विवाद में एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान का झुकाव स्पष्ट रूप से अमेरिका और डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ है, जिसके कारण वह निष्पक्ष होकर बातचीत को आगे नहीं बढ़ा पाएगा। यह बयान तब आया है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में पाकिस्तान के दो महत्वपूर्ण दौरे किए हैं।

ट्रम्प की ईरान को अंतिम चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए उसे सीजफायर के लिए महज तीन दिन की मोहलत दी है। एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान युद्ध समाप्त करने पर सहमत नहीं होता, तो उसकी मुख्य तेल पाइपलाइनों में विस्फोट हो सकता है। ट्रम्प के अनुसार, प्रतिबंधों के कारण तेल का निर्यात रुकने से पाइपलाइनों के भीतर दबाव बढ़ेगा, जिससे तकनीकी रूप से बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि एक बार पाइपलाइन नेटवर्क ध्वस्त हो गया, तो ईरान के लिए उसे दोबारा खड़ा करना लगभग असंभव होगा, जिससे उसकी आर्थिक कमर टूट जाएगी।

हिजबुल्लाह की आत्मघाती हमलों की धमकी

दूसरी ओर, लेबनान से संचालित संगठन हिजबुल्लाह ने इजराइल के विरुद्ध अपनी रणनीति बदलने का एलान किया है। हिजबुल्लाह के एक सैन्य कमांडर ने चेतावनी दी है कि वे 1980 के दशक की तर्ज पर आत्मघाती दस्तों को सक्रिय कर रहे हैं। इन सुसाइड स्क्वॉड का मुख्य लक्ष्य लेबनानी क्षेत्रों में तैनात इजराइली सैन्य टुकड़ियां और उनके अधिकारी होंगे। संगठन का दावा है कि उन्होंने इस योजना के तहत बड़ी संख्या में हमलावरों को तैनात किया है ताकि इजराइली सेना को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

ईरान पर दोबारा बमबारी की तैयारी

व्हाइट हाउस में आज ईरान संकट को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ ईरान पर फिर से हवाई हमले शुरू करने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, ट्रम्प फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं और उन्होंने बातचीत का अगला दौर इसलिए टाल दिया क्योंकि ईरान की ओर से कोई संतोषजनक प्रस्ताव नहीं मिला था। अमेरिका अब भी इस उलझन में है कि ईरान के भीतर सत्ता का अंतिम निर्णय कौन ले रहा है, जिससे समझौते की उम्मीदें धुंधली बनी हुई हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का डर

वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। बैंक ने अनुमान लगाया है कि सप्लाई में कमी के चलते ब्रेंट क्रूड का भाव 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कीमतों में 40 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। यदि हालात जुलाई तक सामान्य नहीं हुए, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद काफी महंगे हो जाएंगे।

समुद्री क्षेत्र में तनाव: भारतीय क्रू पर फायरिंग

समुद्री सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक खबर सामने आई है। ओमान के पास ईरानी कोस्ट गार्ड ने टोगो के झंडे वाले एक केमिकल टैंकर ‘MT सिरोन’ पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि इस जहाज पर 12 भारतीय नागरिक सवार थे। राहत की बात यह है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। भारत सरकार का जहाजरानी मंत्रालय और विदेश मंत्रालय लगातार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में हैं ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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