एजेंसी, बद्रीनाथ। Badrinath Dham Kapat : उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब पूरी तरह शुरू हो चुकी है। केदारनाथ के बाद आज सुबह चमोली जिले में स्थित भगवान बद्रीनाथ के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। करीब 149 दिनों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बद्रीविशाल ने भक्तों को दर्शन दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में सुबह सवा 6 बजे पूरे धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के द्वार खोले गए। इस खास मौके पर हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरी घाटी गूंज उठी।
फूलों की सजावट और विशेष संदेश
इस साल बद्रीनाथ मंदिर की भव्यता देखते ही बन रही है। पूरे मंदिर परिसर को 25 क्विंटल ताजे फूलों से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया है। मंदिर की सजावट में पहली बार फूलों के माध्यम से ‘ओम लक्ष्मीपति नमो’, ‘जय श्री बद्री नारायण’ और ‘बैकुंठाय नमो’ जैसे भक्तिपूर्ण संदेश लिखे गए हैं, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
भू-वैकुण्ठ-कृतं वासं देवदेवं जगत्पतिम्।
चतुर्वर्ग-प्रदातारं श्रीबदरीशं नमाम्यहम् ॥भगवान श्रीहरि विष्णु की पवित्र भूमि श्री बदरीनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के शुभ अवसर पर उपस्थित रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हिमालय की गोद में स्थित यह दिव्य धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा,… pic.twitter.com/YZ2iSrebDQ
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) April 23, 2026
क्यों बंद रहते हैं धाम के द्वार?
चारों धाम हिमालय की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित हैं, जहाँ सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड पड़ती है। इस कठिन मौसम के कारण हर साल अक्टूबर या नवंबर के महीने में मंदिर के कपाट आम जनता के लिए बंद कर दिए जाते हैं। अगले साल अप्रैल या मई में मौसम अनुकूल होने पर इन्हें दोबारा खोला जाता है। लगभग 6 महीने तक चलने वाली यह यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चारधाम यात्रा 2026 की पूर्ण शुरुआत
बद्रीनाथ के कपाट खुलने के साथ ही अब चारों धामों की यात्रा सुचारू रूप से शुरू हो गई है। इस यात्रा का सिलसिला 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने से शुरू हुआ था। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के द्वार खोले गए और आज बद्रीनाथ में दर्शन शुरू होने के साथ ही आस्था का यह महापर्व अपने पूरे उफान पर है। देशभर से लाखों श्रद्धालु अब अगले छह महीनों तक इन पवित्र धामों में मत्था टेकने पहुँचेंगे।
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