एजेंसी, लखनऊ। राहुल गांधी नागरिकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाया है। अदालत ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर विस्तृत विवेचना करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया इसकी जांच किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है।
एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर आया आदेश
यह कानूनी आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकी दर्ज होने के पश्चात राज्य सरकार इस मामले की तहकीकात किसी भी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने के लिए स्वतंत्र है। याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं।
निचली अदालत के फैसले को दी गई थी चुनौती
इससे पहले, 28 जनवरी 2026 को विशेष सांसद-विधायक अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह नागरिकता के विषयों पर निर्णय लेने के लिए सक्षम नहीं है। याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। गौरतलब है कि यह मामला पहले रायबरेली की अदालत में था, जिसे दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट के आदेश पर ही लखनऊ स्थानांतरित किया गया था।
मामले की गंभीरता और भविष्य की कार्रवाई
याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता से जुड़े तथ्य हैं, जिनकी कानूनी जांच होनी चाहिए। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई और जांच का रास्ता साफ हो गया है। अदालत के इस रुख ने राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि नागरिकता से जुड़ा यह मामला सीधे तौर पर जनप्रतिनिधि की योग्यता को प्रभावित कर सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस जांच को किस एजेंसी के सुपुर्द करती है।
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