पवन खेड़ा

असम सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट : पवन खेड़ा की जमानत को चुनौती, मुख्यमंत्री की पत्नी पर बयान के बाद बढ़ा विवाद

असम देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, गुवाहाटी। पवन खेड़ा सुप्रीम कोर्ट : असम सरकार ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली राहत के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा खेड़ा को दी गई अग्रिम जमानत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद है। यह पूरा मामला असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर लगाए गए आरोपों और उसके बाद दर्ज हुई पुलिस शिकायतों से जुड़ा है।

हाई कोर्ट ने दी थी गिरफ्तारी से सुरक्षा

बीती 10 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक हफ्ते की मोहलत देते हुए गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की थी। अदालत ने उन्हें निर्देश दिया था कि वे इस दौरान असम की संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन करें। जमानत के साथ कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई थीं, जिनमें जांच में सहयोग करना, बिना अनुमति देश न छोड़ना और इस मामले पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी न करना शामिल था।

क्या है विवाद की मुख्य वजह

विवाद की शुरुआत 5 अप्रैल को हुई जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि रिनिकी सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति है, जिसकी जानकारी चुनावी दस्तावेजों में नहीं दी गई। इन आरोपों के बाद गुवाहाटी में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और गलत बयानबाजी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पर साधा निशाना

इस कानूनी लड़ाई के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी पवन खेड़ा के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की आलोचना करते हुए उन्हें सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री करार दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि असम सरकार विरोधियों की आवाज दबाने के लिए सत्ता और पुलिस का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी इस मामले में पवन खेड़ा के साथ मजबूती से खड़ी है।

आरोपों को मुख्यमंत्री ने बताया बेबुनियाद

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने खेड़ा के सभी दावों को पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत बताया है। रिनिकी सरमा की शिकायत के बाद ही असम पुलिस की एक टीम दिल्ली में पवन खेड़ा के घर भी पहुंची थी। असम सरकार का तर्क है कि हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत मामले की गंभीरता को देखते हुए सही नहीं है, इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

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