एजेंसी, नई दिल्ली। मोहसिना किदवई का निधन : कांग्रेस की दिग्गज नेता नहीं रहींकांग्रेस पार्टी की अत्यंत वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई अब हमारे बीच नहीं रहीं। बुधवार तड़के करीब 4 बजे दिल्ली के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे राजनीतिक गलियारे में दुख की लहर दौड़ गई है। वे पिछले काफी समय से राजनीति और सामाजिक कार्यों में सक्रिय थीं और उन्हें गांधी परिवार के बेहद भरोसेमंद साथियों में गिना जाता था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व सांसद मोहसिना किदवई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।
वे कांग्रेस पार्टी की एक अत्यंत वरिष्ठ और वफ़ादार नेता थीं, जिनका पूरा जीवन जनसेवा का उदाहरण रहा है। अपनी सादगी, सौम्यता और गरिमापूर्ण राजनीतिक सफलता से उन्होंने देश की महिलाओं की कई पीढ़ियों… pic.twitter.com/jk1umtTLHc
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 8, 2026
अंतिम संस्कार और विदाई का कार्यक्रम
मोहसिना किदवई के पार्थिव शरीर को दोपहर तीन बजे उनके नोएडा के सेक्टर-40 स्थित निवास स्थान से अंतिम विदाई के लिए ले जाया जाएगा। शाम को करीब पांच बजे दिल्ली के निजामुद्दीन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके निधन पर कई बड़े नेताओं ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। सांसद मनीष तिवारी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वे एक बहुत प्रभावशाली व्यक्तित्व वाली महिला थीं जिन्होंने सांसद और मंत्री के तौर पर देश की बहुत सेवा की।
राजनीतिक सफर और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को हुआ था और उन्होंने अपना पूरा जीवन कांग्रेस पार्टी को समर्पित कर दिया। वे उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से जुड़ी रही थीं। अपने लंबे करियर में उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की कैबिनेट में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कामकाज संभाला। इसके अलावा वे हज कमेटी की अध्यक्ष, कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष जैसे बड़े पदों पर भी रहीं।
पार्टी संगठन और सामाजिक कार्यों में योगदान
संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करने वाली किदवई ने महिला सशक्तिकरण और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। वे कांग्रेस की नीति निर्धारण समिति की भी अहम सदस्य थीं। मनीष तिवारी के अनुसार उनका स्वभाव बहुत ही सरल और मिलनसार था और उनके चेहरे पर हमेशा रहने वाली मुस्कान उनकी पहचान थी। उनके जाने से न केवल कांग्रेस बल्कि भारतीय राजनीति को एक बड़ी क्षति हुई है।
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