एजेंसी, नई दिल्ली। भारतीय संसद ने शुक्रवार को आम बजट 2026-27 को अपनी पूरी स्वीकृति दे दी है। इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच स्पष्ट किया कि भारत में लॉकडाउन लगाने का कोई विचार नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ नेताओं को जनता के बीच इस तरह की गलतफहमी और डर फैलाना बंद कर देना चाहिए। राज्यसभा में चर्चा का उत्तर देने के बाद वित्त विधेयक 2026-27 और अनुदान की अनुपूरक मांगों से संबंधित विनियोग विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। लोकसभा इन प्रस्तावों को पहले ही हरी झंडी दे चुकी थी।
वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि सरकार का लक्ष्य 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों को पूरा करना और देश को विकसित बनाना है। चर्चा के दौरान जब सदस्यों ने पूछा कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने के बाद सरकार 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को कैसे प्राप्त करेगी, तो सीतारमण ने समझाया कि सरकारी खजाने में उत्पाद शुल्क का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत होता है। उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व के नए स्रोत जुटाने, विकास कार्यों को प्राथमिकता देने और जनकल्याणकारी योजनाओं को सही लोगों तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह पारदर्शी तरीके से काम कर रही है। उन्हें भरोसा है कि गैर-कर राजस्व के जरिए इस कमी को पूरा कर लिया जाएगा।
सीतारमण ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अब पश्चिम एशिया संकट की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट निर्देश है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव का बोझ देश के आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। इसी नीति के तहत सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया है।
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वित्त मंत्री ने पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और स्थितियां खराब हैं, लेकिन भारत में दाम स्थिर रखे गए हैं। उन्होंने उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो लॉकडाउन की खबरें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि निराधार अफवाहें फैलाकर जनता को डराना ठीक नहीं है, भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने उन आरोपों को भी गलत बताया जिनमें कहा गया था कि सरकार गरीबों पर ज्यादा टैक्स लगा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीएसटी या अन्य करों में अमीर-गरीब के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता।
बजट के आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले 7.7 प्रतिशत अधिक है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है। सरकार ने अगले साल के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3 प्रतिशत रखा है, जो इस वर्ष के 4.4 प्रतिशत से कम है। 1 फरवरी को बजट पेश होने के साथ शुरू हुई यह संवैधानिक प्रक्रिया आज वित्त विधेयक के पारित होने के साथ संपन्न हो गई।


