एजेंसी, उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को उज्जैन में क्षिप्रा नदी पर बन रहे नए घाटों के निर्माण कार्य का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री अंगारेश्वर और श्री सिद्धवट मंदिरों के बीच क्षिप्रा नदी के तट पर विकसित किए जा रहे नवीन घाटों का सूक्ष्म अवलोकन किया। इन घाटों का निर्माण भविष्य में होने वाले सिंहस्थ महापर्व-2028 को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, ताकि वहां आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा सकें।
आज प्रातः उज्जैन में श्री अंगारेश्वर महादेव के दर्शन के उपरांत शिप्रा नदी के तट पर बन रहे नवीन घाटों और पुल का निरीक्षण किया।
अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर 200 मीटर की दूरी पर सुविधा घर बनाए जाएं। हर 500 मीटर की दूरी पर सीढ़ियों व अन्य पहुंच मार्ग की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो।… pic.twitter.com/gaZ9Hi14eV
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 26, 2026
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनिर्मित घाटों के करीब 200 मीटर के दायरे में श्रद्धालुओं के कपड़े बदलने के लिए सुरक्षित स्थान और उचित जगहों पर टॉयलेट बनवाने के आदेश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्य घाटों पर हर 200 मीटर की दूरी पर सुविधा घर विकसित किए जाएं, जिससे आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, घाटों के आसपास आवाजाही को सरल बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने लगभग 500 मीटर के अंतराल पर सीढ़ियां या अन्य संपर्क मार्ग तैयार करने के निर्देश भी दिए, ताकि लोग आसानी से मुख्य घाटों तक पहुंच सकें।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री सिद्धवट और श्री अंगारेश्वर मंदिर के मध्य बन रहे नए पुल के कार्य की भी समीक्षा की। संबंधित अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस पुल के बन जाने से दोनों महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के बीच का रास्ता सुगम हो जाएगा और श्रद्धालुओं को आवागमन के लिए एक नया विकल्प मिल सकेगा। जानकारी के अनुसार, नदी तट पर स्नान के लिए लगभग 5 मीटर चौड़े घाट का निर्माण किया जा रहा है, जिससे लोगों के आने-जाने के साथ-साथ वहां बैठने के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने इन घाटों पर बैठने के इंतजाम सहित अन्य जरूरी नागरिक सुविधाएं विकसित करने पर विशेष जोर दिया है।


