एजेंसी, नई दिल्ली/वाशिंगटन। भारत के पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष के दौरान पहली बार टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस चर्चा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप का उन्हें फोन आया था। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र के बिगड़ते हालात और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर विचारों का उपयोगी आदान-प्रदान हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि भारत इस तनाव को कम करने और क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति स्थापित करने का पुरजोर समर्थन करता है। उन्होंने विशेष रूप से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस समुद्री मार्ग का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है। दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि वे शांति और स्थिरता लाने के प्रयासों को लेकर लगातार एक-दूसरे के संपर्क में बने रहेंगे।
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अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस उच्च स्तरीय वार्ता की पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने कहा कि बातचीत में होर्मुज के रास्ते को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखने के महत्व पर जोर दिया गया है। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि उन्होंने ईरान को दी गई समयसीमा (अल्टीमेटम) को पांच दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, ईरान के ऊर्जा केंद्रों और पावर प्लांट्स पर होने वाले संभावित हमलों को फिलहाल टाल दिया गया है ताकि शांति के किसी रास्ते पर विचार किया जा सके।
Received a call from President Trump and had a useful exchange of views on the situation in West Asia. India supports de-escalation and restoration of peace at the earliest. Ensuring that the Strait of Hormuz remains open, secure and accessible is essential for the whole world.…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 24, 2026
वर्तमान युद्ध की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और देश की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर इस मार्ग से जुड़ी हुई है।


