एजेंसी, भोपाल। भोपाल नगर निगम की महापौर मालती राय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए शहर का बजट पेश कर दिया है। इस बार शहर के विकास कार्यों पर कुल 3938.45 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। बजट की सबसे बड़ी राहत यह रही कि शहर सरकार ने जनता पर किसी भी तरह का नया टैक्स नहीं लगाया है, हालांकि वार्डों में परिसीमन शुल्क बढ़ाने की तैयारी जरूर की गई है।
अधूरे वादों के बीच नई घोषणाएं बजट में विकास के बड़े दावे तो किए गए हैं, लेकिन पिछले दो सालों के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स अब भी कागजों पर ही हैं। 7 हेरिटेज गेट बनाने और गीता भवन के निर्माण जैसे वादे अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। बीते एक साल में केवल दो हेरिटेज गेट के लिए ही भूमिपूजन हो सका है। पिछले साल के बजट में महापौर द्वारा घोषित ‘स्मार्ट पास’ योजना भी अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।
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जनप्रतिनिधियों के फंड में कटौती इस बार के बजट में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। नगर निगम ने महापौर, निगम अध्यक्ष, एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्षों के लिए आवंटित होने वाले विशेष फंड को समाप्त कर दिया है। पिछले बजट में महापौर के लिए 10 करोड़ और अध्यक्ष के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान था, जिसे इस बार हटा दिया गया है। सदन में तीखी नोक-झोंक और हंगामा बजट सत्र की शुरुआत काफी हंगामेदार रही।
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने गोमांस और स्लॉटर हाउस का मुद्दा उठाया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। बीजेपी पार्षदों ने भी इस मुद्दे पर कड़ा विरोध जताते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। हंगामे के बीच नई पार्किंग व्यवस्था और कंडम वाहनों को हटाने जैसे प्रस्ताव तो पास हो गए, लेकिन पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) को हटाने का प्रस्ताव अटक गया। पिछले बजट की तुलना पिछले साल नगर निगम ने 3611 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था, जिसमें प्रॉपर्टी टैक्स में 10% और जलकर में 15% की भारी बढ़ोतरी की गई थी। इस बार मंत्रियों और विधायकों के हस्तक्षेप के बाद टैक्स न बढ़ाने का फैसला लिया गया है, जो चुनावी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


