एजेंसी, खार्ग द्वीप। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर जोरदार सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक शुक्रवार रात चलाए गए इस बड़े अभियान में ईरान के 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया।
अमेरिकी मध्य कमान (यूएस सेंट्रल कमांड) ने शनिवार को जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को चोट पहुँचाना था। सेना ने स्पष्ट किया कि हमले में केवल सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया गया है और द्वीप के तेल उद्योग से जुड़े ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया गया है। सेना ने इस ऑपरेशन का एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें गिरती हुई मिसाइलें और धुएं के विशाल गुबार साफ देखे जा सकते हैं।
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रणनीतिक रूप से खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद खास है क्योंकि देश का अधिकांश कच्चा तेल यहीं से बाहर भेजा जाता है। आंकड़ों के अनुसार ईरान रोजाना लगभग 17 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है, जिसमें से करीब 15.5 लाख बैरल इसी द्वीप के रास्ते चीन जैसे देशों को भेजा जाता है। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि इस हमले में समुद्री बारूदी सुरंगों के गोदाम और मिसाइल रखने वाले बंकरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली अभियानों में से एक है। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरान ने समुद्री मार्ग (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं किया, तो अगली बार खार्ग द्वीप के तेल संयंत्रों को भी निशाना बनाया जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान के मीडिया का कहना है कि उनके तेल संयंत्र सुरक्षित हैं। हालांकि, ईरान की सेना ने जवाबी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके ऊर्जा केंद्रों पर हमला हुआ, तो वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगियों की तेल कंपनियों को निशाना बनाएंगे।
इस संघर्ष की वजह से दुनिया के सबसे प्रमुख समुद्री व्यापारिक रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। चूंकि दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है, इसलिए इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार और एलपीजी की कीमतों पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के 15,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं।


