भोपाल में इंजीनियर्स क्षमता

भोपाल में इंजीनियर्स क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ, पीएमएस 2.0 लॉन्च, ग्रीन बिल्डिंग पर जोर

प्रादेशिक भोपाल

एजेंसी, भोपाल। भोपाल में इंजीनियर्स क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ : भोपाल में गुरुवार को लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा इंजीनियर्स के लिए एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। रवीन्द्र भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए इंजीनियर्स की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य केवल ईंट और पत्थर जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक रचनात्मक और दूरदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें गुणवत्ता, दीर्घकालिक योजना और नवाचार की अहम भूमिका होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अब हर निर्माण परियोजना में अवधारणात्मक सोच और गुणवत्ता आधारित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इंजीनियर्स को अपने कार्य के दौरान कई तकनीकी और प्रबंधकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन कार्यक्रम समय-समय पर जरूरी हैं। कार्यशाला के दौरान प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 (पीएमएस 2.0) का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

यह डिजिटल प्रबंधन प्रणाली सड़क और भवन विकास से जुड़ी परियोजनाओं की निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और पारदर्शिता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके साथ ही प्रशिक्षण कैलेंडर और परियोजना प्रबंधन से संबंधित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम और मध्यप्रदेश भवन विकास निगम ने देश की कई प्रतिष्ठित तकनीकी और शैक्षणिक संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य इंजीनियर्स को आधुनिक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, हरित भवन अवधारणा और परियोजना प्रबंधन के नवीन तरीकों से अवगत कराना है। कार्यशाला में ग्रीन बिल्डिंग के विकास पर भी सहमति बनी, जिसे भविष्य की निर्माण योजनाओं में शामिल करने की बात कही गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने क्षमता निर्माण, नवाचार और आधुनिक अधोसंरचना विकास जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार की कार्यशालाएं इंजीनियर्स को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक होंगी।

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