मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव’ में प्रदर्शित दूरदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व राज्य के तकनीकी भविष्य को एक नई दिशा देने वाला है। यह कॉन्क्लेव मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश को ‘टेक्नोलॉजी-फर्स्ट इकोनॉमी’ बनाने के उनके संकल्प का एक सशक्त घोषणा पत्र है। मुख्यमंत्री ने न केवल बड़े निवेश प्रस्तावों को ज़मीन पर उतारा है, बल्कि एक ऐसे सकारात्मक परिवेश का निर्माण किया है, जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय टेक दिग्गजों को मध्य प्रदेश की ओर आकर्षित कर रहा है। उनकी यह पहल स्पष्ट करती है कि वह राज्य की अर्थव्यवस्था के कायापलट के लिए नवाचार (Innovation) और डिजिटल क्रांति को मुख्य आधार मान रहे हैं।
निवेश और रोज़गार का महायज्ञ
कॉन्क्लेव का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम विशाल निवेश और रोज़गार सृजन के आंकड़े हैं। डॉ. यादव की सरकार ने न केवल 15,896 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश प्रस्तावों को आकर्षित किया है, बल्कि इससे 64,085 से अधिक युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के द्वार खोले हैं। ये आंकड़े राज्य में एक बड़ी तकनीकी लहर के आगमन का संकेत देते हैं। यह साधारण सफलता नहीं है; यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करके उनकी चिंताओं को सुना और नीतिगत बाधाओं को दूर करने का आश्वासन दिया। यह राशि आईटी, एयरोस्पेस, रक्षा, सेमीकंडक्टर, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण जैसे उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में आएगी। युवाओं के लिए स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का ठोस कदम। इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेंगे। नौ कंपनियों को भूमि आवंटन पत्र (LOA) तुरंत जारी करना, नौकरशाही की देरी को खत्म करने की उनकी प्रतिबद्धता दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को केवल निवेश का गंतव्य नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार का केंद्र बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भोपाल में 2000 एकड़ भूमि पर नॉलेज और एआई सिटी की स्थापना की घोषणा इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह परियोजना मध्य प्रदेश को देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एक प्रमुख हब बनाने की उनकी दूरदर्शिता का प्रतीक है। 35.45 एकड़ भूमि पर साइंस सिटी के लिए आवंटन करना वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देगा, जिससे यह हमारे युवाओं और छात्रों के लिए ज्ञान और प्रयोग का अद्भुत केंद्र बनेगा। मध्य प्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी पॉलिसी 2025 का मसौदा प्रस्तुत करना, उज्जैन की खगोलीय विरासत को आधुनिक अंतरिक्ष अनुप्रयोगों से जोड़ते हुए, उसे भारत के उभरते अंतरिक्ष नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है। यह कदम राज्य के पारंपरिक महत्व को भविष्य की तकनीक से जोड़ने का शानदार उदाहरण है। इस कॉन्क्लेव की एक और अभूतपूर्व उपलब्धि राज्य सरकार और भारतीय सेना के बीच साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में संयुक्त अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर करना है। मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE), महू के साथ यह साझेदारी रक्षा और नागरिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को सशक्त बनाएगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि डॉ. यादव की सरकार उच्च-तकनीकी अनुसंधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार का लक्ष्य ‘टेक्नोलॉजी-फर्स्ट इकोनॉमी विजन’ है। यह विजन समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए नवाचार, कौशल और उद्यमिता के एकीकरण पर केंद्रित है। कॉन्क्लेव के दौरान प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, सिंगल-विंडो सिस्टम और उद्योग-अनुकूल नीतियों पर जोर दिया गया, जो यह सुनिश्चित करता है कि मध्य प्रदेश देश की टियर-2 शहरों की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। डॉ. मोहन यादव का यह प्रयास मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में एक मुख्य योगदानकर्ता बनाने की दिशा में एक दृढ़ छलांग है। उन्होंने दिखा दिया है कि वह न केवल वादे करते हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की इच्छाशक्ति और रणनीति भी रखते हैं। यह कॉन्क्लेव मध्य प्रदेश के लिए एक नए, तकनीकी रूप से उन्नत और समृद्ध भविष्य की नींव रखता है। यह सफलता डॉ. मोहन यादव के गतिशील नेतृत्व, स्पष्ट नीतियों और मध्य प्रदेश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रमाण है।


