भोपाल में करणी सेना का मुख्यमंत्री निवास कूच रोका गया: बोले—‘मांगें नहीं मानी गईं तो भोपाल को नेपाल बना देंगे’, पुलिस ने भारी बंदोबस्त के साथ रोका।

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एजेंसी, भोपाल। राजधानी भोपाल में शुक्रवार को करणी सेना का आंदोलन उस वक़्त उग्र रूप ले बैठा, जब संगठन के प्रतिनिधियों और समर्थकों ने अपनी 15 मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की दिशा में बढ़ना शुरू किया। दोपहर 2 बजे तक मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई प्रतिनिधि सम्मेलन स्थल नहीं पहुँचा, जिसके बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता खुशीलाल मैदान से सड़क पर आ गए और रैली बढ़ा दी। इंदौर–अहमदाबाद हाईवे के नजदीक आयोजित क्षत्रिय क्रांति सभा में प्रदेशभर से समुदाय के लोग इकट्ठा हुए थे। करणी सेना नेतृत्व का कहना था कि वे ज्ञापन तभी सौंपेंगे जब मुख्यमंत्री कार्यालय का दूत स्थल पर उपस्थित होगा। तय समय निकल जाने पर संगठन ने मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने का निश्चय किया। रैली शुरू होते ही पुलिस ने रास्ते में अवरोधक लगाकर भारी सुरक्षा बल तैनात किया। समर्थकों को कुछ दूरी पर ही थाम लिया गया, जिसके बाद वे सड़क पर बैठकर नारे लगाने लगे और विरोध दर्ज कराने लगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त बल लगाया गया है और किसी भी अप्रिय हालात को रोकने हेतु सभी मुख्य मार्गों पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। इसी दौरान करणी सेना के प्रदेश प्रमुख इंदल सिंह राणा का बयान विवाद में आ गया। राणा ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री कार्यालय को चेतावनी दी थी कि 2 बजे तक अधिकारी भेजें। जब कोई नहीं आया तो हम मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे। यह तो आंदोलन की शुरुआत है। हमारी मांग है कि हरदा मामले में कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक को तुरंत हटाया जाए। अगर हमारी बात न सुनी गई तो हमें भोपाल को नेपाल जैसा माहौल बनाने में देरी नहीं लगेगी।” करणी सेना ने साफ किया कि वे ज्ञापन पुलिस को नहीं देंगे बल्कि सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी को ही सौंपेंगे। संगठन का कहना है कि प्रशासन उनकी शिकायतों और पुराने विवादों पर ध्यान नहीं दे रहा।

हरदा मामला क्या है
हरदा जिले में करणी सेना और पुलिस के बीच चल रहा विवाद 1.52 कैरेट के हीरे से जुड़े कथित छल मामले से शुरू हुआ। करणी सेना के सदस्य आशीष राजपूत का आरोप है कि बीते वर्ष उनके साथ 18 लाख रुपए की ठगी हुई, लेकिन जांच निष्पक्ष तरीके से आगे नहीं बढ़ी। संगठन का कहना है कि पुलिस और आरोपियों के बीच साठगांठ है। मामला तब और गरमाया जब इस प्रकरण पर हुए विरोध के दौरान पुलिस ने समर्थकों पर बल का प्रयोग किया और जिलाध्यक्ष सहित चार लोगों को पकड़ लिया। इसके बाद जब करणी सेना के प्रदेश प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर हरदा पहुँचे तो पुलिस ने उन्हें भी रोक लिया। इसके पश्चात प्रदेशभर में विरोध तेज हो गया और भोपाल की यह सभा उसी क्रम का हिस्सा है। पुलिस ने हालात पर सख़्त निगरानी रखी है और अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, आंदोलन जारी रहेगा।

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