राजनीतिक आशाओं के एकमात्र केंद्र बिंदु अजय सिंह राहुल भैया

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विंध्य क्षेत्र के एकमात्र कद्दावर नेता अजय सिंह उर्फ राहुल भैया का नाम अभी तक विवादों से दूर बना हुआ है। क्योंकि कांग्रेस के अधिकांश नेता जहां पहले बोलने और फिर बाद में सोचने के लिए प्रख्यात होते जा रहे हैं। वहीं अजय सिंह बेहद धीर गंभीर किस्म के राजनीतिज्ञ कहे जाते हैं। उन्होंने केवल विंध्य क्षेत्र ही नहीं, मध्य प्रदेश स्तर की राजनीति को लेकर अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। लेकिन अपने तो दूर विरोधी दल के नेता भी उनकी कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान नहीं लगा पाए। इसके प्रमाण उस कालखंड में देखने को मिलते हैं जब अजय सिंह मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हुआ करते थे। तब उनकी रणनीति इतनी कसावट पूर्ण रहती थी कि सत्ता पक्ष के लोग भी विधानसभा सत्र में उनका सामना करने से हिचकिचाने लगते थे। यही वजह रही कि जब तक उनके पास नेता प्रतिपक्ष का दायित्व रहा, तब तक सत्ता पक्ष विधानसभा के विभिन्न सत्रों को छोटे से छोटा करता रहा‌। कई बार तो अनिश्चितकाल के लिए विधानसभा की कार्रवाई निलंबित करके छुटकारा पाने की रास्ते तलाशे गए। 2023 के आम चुनाव में सातवीं बार विजय प्राप्त करने वाले अजय सिंह मध्य प्रदेश विधानसभा में चुरहट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसा कि पूर्व में लिखा जा चुका है, वह मध्य प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके है। कौन नहीं जानता कि अजय सिंह जी, जिन्हें लोग प्यार से राहुल भैया कहते हैं, वह मध्य प्रदेश के एक से अधिक बार मुख्यमंत्री रहे प्रसिद्ध कांग्रेस नेता श्री अर्जुन सिंह के पुत्र हैं। लेकिन जब अजय सिंह ने राजनीति में मोर्चा संभाला तो स्थानीय लोगों ने उन्हें उनकी योग्यता के बलबूते पर अपना नेता चुना और क्षेत्रीय विकास को लेकर आश्वस्त बने रहे। यही कारण है कि अजय सिंह लंबे अरसे से इस क्षेत्र के सर्वमान्य नेता बने हुए हैं। वाकई में यह बहुत बड़ी बात है कि जिस क्षेत्र की कमान बीते समय में यहां के जाने-माने कद्दावर नेता स्वर्गीय अर्जुन सिंह, श्रीनिवास तिवारी जैसे लोग संभालते रहे, अब वहां की जनता का जिम्मा अकेले अजय सिंह ने ओढ़ रखा है। यही कारण रहा थी संयोगवश अजय सिंह जब वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव महज 6000 वोटों से हार गए थे। तब बड़े पैमाने पर यह प्रचारित किया गया कि अब राहुल भैया की राजनीति समाप्त हो गई। लेकिन वह एकमात्र ऐसे नेता है जो उस हार के बावजूद चुपचाप नहीं बैठे‌। लगातार जनता के बीच बने रहे और उनकी आवश्यकता अनुसार समस्याओं का समाधान करते रहे। इतिहास गवाह है कि जब उनके पास जन प्रतिनिधित्व का कोई दायित्व नहीं था, तब भी राहुल भैया जनता और शासन के बीच विकास कार्यों की सुनिश्चितता के लिए अधिकतम सक्रिय बने हुए थे। यही कारण रहा कि जब 5 साल बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में संपन्न हुए तब उन्होंने मतदान परिणाम के रूप में एकतरफा 27777 मतों से जीत दर्ज की । यदि कांग्रेस और अन्य दलों में सक्रिय राजनीतिक पंडितों की बात की जाए तो वो भी यह दावा करते हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में भले ही बुजुर्ग नेताओं के रूप में दिग्विजय सिंह विवादास्पद बने रहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर भी आए दिन आपसी मनमुटाव की खबरें मीडिया में आती रहती हैं। यदि वर्तमान पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी की बात करें तो राजनीति के नाते उनमें भी अधिकतम संभावनाओं के साथ नहीं निहारा जा सकता। दूसरी ओर अकेले अजय सिंह हैं जिनके बयान बेहद संतुलित लेकिन पैनापन लिए होते हैं। उनके बयानों की धार विरोधी दलों को तो परेशानी पैदा करती ही है। उन स्वयंभू बड़े नेताओं के लिए भी तकलीफ दायक बनती है जो हमेशा कांग्रेस पर अपना अकेले का आधिपत्य स्थापित बनाए रखना चाहते हैं। जहां तक शिक्षा और संस्कारों की बात है तो अजय सिंह ने राजनीति की परिपक्वता अपने पिता स्वर्गीय श्री अर्जुन सिंह से सीखी है। अपने पिता जैसे ठीक वही आचरण राहुल भैया में देखने को मिलता है। वह अपने पिताजी की ही भांति बोलते कम लेकिन जनहितैषी विकास योजनाओं को क्रियान्वित अधिक करते हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा कैंपियन स्कूल, इसके पश्चात श्रीराम कॉलेज दिल्ली से पूरी की। यही कारण है कि उनकी गिनती केवल उच्च शिक्षित ही नहीं, वरन एक संस्कारवान नेता के रूप में की जाती है। खेल प्रेमियों के बीच भी राहुल भैया उतने ही लोकप्रिय हैं, जितने जनसाधारण के बीच। उल्लेखनीय है कि इस श्री सिंह स्कूल के दिनों में क्रिकेट टीम के कैप्टन भी रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें जब भी समय मिलता है खेल प्रेमियों की समस्याओं को सुलझाने के लिए भी सदैव तत्पर बने रहते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो कांग्रेस में अब अजय सिंह राहुल भैया एकमात्र आशा के केंद्र बिंदु रह गए हैं । क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल उपरांत जनता इतनी आक्रोर्षित हुई कि अब तक कांग्रेस ठीक से सत्ता में काबिज नहीं हो पा रही है। वर्ष 2018 में जैसे तैसे सरकार में आने का अवसर मिला भी तो मुख्यमंत्री कमलनाथ हालातों को नहीं समझ पाए। फल स्वरुप मुश्किल से हाथ आई सरकार आसानी से हाथ से जाती रही। अब पूरे मध्य प्रदेश की निगाहें अपने लाडले नेता अजय सिंह की ओर केंद्रित हैं। लोगों को भरोसा है कि अब वही नेतृत्व कर्ता के रूप में आगे बढ़ें तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस की जनहितैषी सरकार स्थापित होने की सूरत बन सकती है। अजय सिंह राहुल भैया को उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं

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