पुरानी योजनाओं की निरंतरता पर कोई शंका नहीं, नवाचारों पर मोहन की पहल

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प्रसंगवश……….. राज कुमार बाली

विधानसभा चुनावों के दौरान और उसके बाद विपक्षियों द्वारा मध्य प्रदेश की तत्कालीन शिवराज सरकार द्वारा लागू योजना को लेकर अनेक सवाल उठाए जा रहे थे। दावा यहां तक किया जा रहा था कि चुनाव के बाद इन योजनाओं को बंद कर दिया जाएगा। विपक्षियों का आरोप था कि मध्य प्रदेश सरकार ने अनेक योजनाओं को एन चुनाव के वक्त लोगों को भ्रमित करने के लिए प्रारंभ किया था। इस बयान को आधार बनाकर प्रबुद्ध वर्ग भी यह आशंका जताने लगा था कि संभव है चुनाव के बाद चुनकर आने वाली नई सरकार जनहित की अनेक योजनाओं को बंद कर दे। लेकिन अब जब विधानसभा और लोकसभा चुनाव हो चुके हैं तथा मध्य प्रदेश में डॉक्टर मोहन यादव की सरकार अस्तित्व में आ चुकी है, तब देखने में यह आ रहा है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने न केवल पुरानी योजनाओं की निरंतरता को बनाए रखा है, बल्कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव नवाचारों को लेकर भी बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं। गौर करने पर हम पाएंगे कि सबसे अधिक विवाद लाडली बहना योजना को लेकर किया जा रहा था। विपक्ष का दावा था कि इस योजनाओं को चुनाव के ठीक पहले मतदाताओं को भ्रमित करने की दृष्टि से लागू किया गया था। दावा किया जा रहा था कि जैसे ही चुनाव संपन्न होंगे और भाजपा सत्ता में आएगी, तो सबसे पहला काम लाडली बहना योजना को बंद करने का करेगी। लेकिन मध्य प्रदेश की वर्तमान सरकार ने न केवल उक्त योजना को बनाए रखा है बल्कि अब रक्षाबंधन के अवसर पर लाडली बहनों को ढाई सौ रुपए अतिरिक्त देने की घोषणा करके यह स्पष्ट कर दिया है कि उक्त योजना को बंद नहीं किया जा रहा है। बल्कि इसमें और अधिक जन हितैषी सुधारो की गुंजाइश दिखेगी तो उन्हें बगैर किसी शंका के लागू किया जाएगा। इसी के साथ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है की पुरानी कोई भी जनहित की ऐसी योजना बंद नहीं की जाएगी और ना ही की जा रही है। इसी के साथ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उज्ज्वला योजना के तहत मध्यप्रदेश की बहनों को 450 रुपए में रसोई गैस के सिलेंडर आगे भी मिलते रहेंगे। याद दिला दे कि इस योजना को लेकर भी विपक्ष अनर्गल बयान बाजी कर रहा था और इसके अस्तित्व पर हर संभव शंका खड़ी की जा रही थी। बता दें कि मुख्यमंत्री कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस से रूबरू थे और लोगों के मन में व्याप्त शंकाओं का निराकरण कर रहे थे। उन्होंने यह खुलासा भी किया कि वर्तमान सरकार जनहित की अनेक संभावनाओं को भी तलाश रही है। यदि आवश्यक लगा तो नई योजनाओं को भी बगैर किसी शंका के लागू किया जाएगा। जहां तक नवाचारों की बात करें तो अब प्रदेश सरकार ने आयुर्वेदिक और अन्य वैकल्पिक चिकित्साओं को लेकर भी जागरूकता का परिचय देना शुरू कर दिया है। सर्व विदित है कि भारत में बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो एलोपैथी चिकित्सा पद्धति में इलाज करने से कतराता है। उसकी धारणा है कि इस पद्धति के द्वारा इलाज किए जाने से शरीर में नए रोगों की उत्पत्ति भी हो जाती है। जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में साइड इफेक्ट कहा जाता है। लिहाजा बीमार को आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, यूनानी आदि चिकित्सा पद्धतियां उपलब्ध नहीं हो पाती। उनके न मिलने पर बीमार लोगों को एलोपैथी पद्धति में इलाज करने के लिए मजबूर रहना पड़ता है। इस परेशानी से बचने के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयुष विभाग की स्थापना के मद्देनजर 20 से अधिक जिलों में आयुष चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने की ओर कदम उठाए जा चुके हैं। इससे यह फायदा होगा कि जो लोग एलोपैथी चिकित्सा पद्धति में स्वयं को संतुष्ट नहीं पा रहे हैं या फिर उनकी बीमारी का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है, वह लोग विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से खुद को स्वस्थ और तंदुरुस्त रख पाएंगे। इसके लिए 200 से अधिक पदों पर भर्ती किए जाने की भी चर्चाएं हैं। यानि वैकल्पिक चिकित्सा व्यवस्थाएं उपलब्ध होने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी खुल रहे हैं। प्रधानमंत्री सड़क योजनाओं को और अधिक तेजी से आकार देने तथा अधूरे पड़े कार्यों को पूरा करने को लेकर भी सरकार कटिबद्ध नजर आती है। कहां-कहां यह सड़क और बनानी हैं ,कौन सी सड़कें अधूरी पड़ी हैं इस बाबत सर्वेक्षण जोर पड़ गया है। मतलब साफ है ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को और अधिक प्रधानमंत्री सड़क योजना का फायदा मिलने जा रहा है। आशय यह कि शहर से गांव की ओर परिवहन और अधिक आसान होगा लोग आसानी से यहां वहां जा पाएंगे। एक योजना जो सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करती है। वह यह है कि दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में जहां चिकित्सा सुविधा व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। वहां गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग होगी और उन्हें एक सप्ताह पहले ही जिला मुख्यालय स्थित सर्व सुविधा युक्त जच्चा खानों में भर्ती कर दिया जाएगा। इससे पूरे 7 दिन तक गर्भवती महिला चिकित्सीय स्टाफ की निगरानी में रहेगी तथा केस समझने की दृष्टि से चिकित्सकों को काफी अनुकूलता हासिल होगी। इससे सुरक्षित प्रसव होने की उम्मीदें और अधिक बढ़ेगी। भविष्य में उम्मीद की जा सकती है कि जच्चा और बच्चा, दोनों ही इस योजना से सुरक्षा की दृष्टि से लाभान्वित होंगे, इसमें कोई संशय नहीं है। अच्छी बात यह है कि 7 दिन पहले चिकित्सालयों तक गर्भवतियों को पहुंचाने का जिम्मा उन आंगन बाड़ियों को दिया जाने वाला है जो पहले से ही गर्भवती महिलाओं के संपर्क में बने रहते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इससे प्रसव के दौरान होने वाले जोखिम कम होंगे तथा जच्चा बच्चा की मृत्यु दर को सुधारा जा सकेगा। अभी चिकित्सा क्षेत्र की ही बात करें तो जूनियर डॉक्टर को बड़ी राहत दिए जाने का फैसला मध्य प्रदेश सरकार कर चुकी है। इससे एक ओर जहां जूनियर डॉक्टरों को राहत मिलेगी, वहीं चिकित्सा सेवा में यह वर्ग अपने को और अधिक समर्पण के साथ लगा पाएगा। खबर मिल रही है कि मध्य प्रदेश शासन जूनियर डॉक्टर के स्टाइपेंड में 3000 रुपया प्रति माह का इजाफा करने जा रहा है। बता दें कि इस बाबत भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंशा अनुसार विभागीय आदेश जारी किए जा चुके हैं। उच्च स्तरीय साहित्य और पठन-पाठन में आने वाले साहित्य को हिंदी में उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की इस आशय की मंशा भी बेहद सकारात्मक है। उदाहरण के लिए यदि विज्ञान क्षेत्र की जो किताबें अधिकांश अंग्रेजी लिपि में उपलब्ध हैं, यदि उनका अनुवाद हिंदी में करके पुनः प्रकाशित की जाती हैं तो इससे उन लोगों को भी फायदा पहुंचेगा जो अपने कोर्स को अपनी मातृभाषा में पढ़ना चाहते हैं। साथ में विषय को समझने की आसानी और अधिक बढ़ेगी तो युवा वर्ग संबंधित शिक्षा को और अधिक आत्मीयता से ग्रहण कर पाएगा। इसका प्रभाव देश के भविष्य पर सकारात्मक देखने को मिलेगा। लिखने का आशय यह है कि एक ओर वर्तमान सरकार पुरानी योजनाओं को और अधिक सुदृढ़ बना रही है। यदि उन में कोई सुधार की गुंजाइश दिखाई देती हैं तो वांछित सुधार किये जा रहे हैं, यह संतोषजनक बात है। आम जनता को भी यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि पुरानी योजनाएं बंद नहीं की जा रही हैं, तो यह जनता जनार्दन के लिए तो बेफिक्री की बात है ही, साथ में इसका राजनीतिक लाभ आज नहीं तो कल सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को मिलना तय है। इसी के साथ जो नवाचार किये जा रहे हैं, वह अपने आप में अनोखे हैं। इससे भी हितग्राहियों को अधिकतम लाभ पहुंचेगा और उनके जीवन स्तर में चौतरफा सुधार आएंगे। यह कार्य भी पिछली योजनाओं की तरह मध्य प्रदेश की साख को भारतीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ता के साथ स्थापित करने जा रहा है, इसमें संशय नहीं है।

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