एजेंसी, नई दिल्ली| 22 सितंबर 2025 से केंद्र सरकार ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर जीएसटी 2.0 लागू कर दिया है, जिसके तहत टैक्स स्लैब में बदलाव कर आम लोगों को राहत देने और आवश्यक वस्तुओं को सस्ता करने का प्रयास किया गया है। इस सुधार से रोजमर्रा की जरूरतों जैसे किराना, दवाइयां, घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहनों की कीमतों में कमी आएगी, जबकि विलासिता और हानिकारक उत्पाद अब महंगे होंगे।
घी, बटर और आइसक्रीम समेत 700 प्रोडक्ट्स हुए सस्ते
मक्खन, घी, दूध और आइसक्रीम सहित अमूल के 700 से अधिक उत्पाद सोमवार से सस्ते हो जाएंगे। गौरतलब है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नयी दरें सोमवार से प्रभावी हो जाएंगी। सोमवार से 62 रुपये में मिलने वाला अमूल मक्खन 58 रुपये में मिलेगा। वहीं, 83 रुपये में मिलने वाला यूएचटी अमूल गोल्ड दूध अब 80 रुपये में मिलेगा। इसी तरह से 149 रुपये में मिलने वाला अमूल का 200 ग्राम घी अब 140 रुपये में मिलेगा। अमूल का 120 एमएल का बटरस्कॉच आइसक्रीम 35 रुपये की जगह 30 रुपये में मिलेगा। कंपनी ने शनिवार को यहां जारी बयान में दामों में परिवर्तन की घोषणा करते हुए मक्खन, घी, यूएचटी दूध, आइसक्रीम, चीज़, पनीर, चॉकलेट, उच्च प्रोटीन युक्त उत्पाद, बेकरी रेंज, फ्रोज़न डेयरी और पोटैटो स्नैक्स, कंडेंस्ड मिल्क, पीनट स्प्रेड, माल्ट आधारित ड्रिंक सहित विभिन्न उत्पादों की सूची जारी की थी।
कंपनी ने कहा था कि अमूल, 36 लाख किसानों द्वारा संचालित एक सहकारी संस्था होने के नाते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने देश में पोषण को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के निरंतर कार्य मे एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस मूल्य में कटौती से आइसक्रीम, चीज़ और मक्खन जैसे कई डेयरी उत्पादों की खपत बढ़ेगी, जिससे व्यापक विकास का अवसर उत्पन्न होगा, क्योंकि भारत में अभी भी प्रति व्यक्ति खपत विकसित राष्ट्रों के मुकाबले बहुत कम है। जीएसटी में कटौती अमूल के लिए उपभोक्ताओं की आमदनी से लेकर उत्पादक तक का हिस्सा बढ़ाने में मदद करेगी, जिससे यह पहल उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी। इस पहल के माध्यम से अमूल उपभोक्ताओं की सेवा करने और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने की अपनी परंपरा को मजबूत बनाता है, ताकि गुणवत्ता, किफायत और विश्वास हमेशा अमूल की प्राथमिकता बने रहें।
सरकार का लक्ष्य
नए टैक्स ढांचे का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं को किफायती बनाना और महंगाई से प्रभावित परिवारों को राहत देना है। साथ ही, लक्जरी वस्तुओं और हानिकारक उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने और उनके उपभोग को नियंत्रित करने की योजना है।
जीरोजीएसटी वाली वस्तुएं और सेवाएं
कई जरूरी सामान और सेवाओं पर जीएसटी पूरी तरह हटा दिया गया है:
– खाद्य पदार्थ: दूध, पनीर, सभी प्रकार की ब्रेड, रेडीमेड रोटी और पराठा।
– शिक्षा से संबंधित: पेंसिल, नोटबुक, ग्लोब, चार्ट, प्रैक्टिस बुक, लैब नोटबुक।
– स्वास्थ्य क्षेत्र: 33 जीवन रक्षक दवाएं (3 कैंसर दवाएं सहित), व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी।
5प्र. जीएसटी स्लैब में शामिल सामान
– खाद्य सामग्री: वनस्पति तेल, घी, मक्खन, चीनी, मिठाइयां, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, जूस, नारियल पानी।
– पर्सनल केयर: शैम्पू, टूथपेस्ट, साबुन, हेयर ऑयल, शेविंग क्रीम।
– घरेलू सामान: किचनवेयर, बच्चों की बोतल, छाते, मोमबत्तियां, सिलाई मशीन, नैपकिन/डायपर, हैंडबैग, फर्नीचर।
– कृषि उपकरण: ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर, ड्रिप सिंचाई उपकरण, पंप।
– स्वास्थ्य उत्पाद: थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर, मेडिकल ऑक्सीजन, चश्मा, रबर ग्लव्स।
– कपड़ा और परिधान: ₹2,500 तक के रेडीमेड कपड़े, जूट/कपास के बैग, सिंथेटिक धागा।
– अन्य: हस्तनिर्मित कागज, पेंटिंग्स, नक्काशी कला, निर्माण सामग्री (ईंट, टाइलें)।
18प्र. जीएसटी स्लैब में शामिल सामान
– इलेक्ट्रॉनिक्स: एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन, एलईडी/एलसीडी टीवी, मॉनिटर, प्रोजेक्टर।
– वाहन: छोटी कारें, तिपहिया वाहन, एम्बुलेंस, 350सीसी तक की बाइक, कमर्शियल वाहन।
– ईंधन उपकरण: ट्रैक्टर के लिए हाइड्रोलिक पंप, फ्यूल पंप।
– सेवाएं: होटल (₹7,500/दिन से कम), सिनेमा (₹100 से कम टिकट), ब्यूटी सर्विस।
क्या हुआ सस्ता?
– रसोई खर्च: खाद्य तेल, आटा, घी, चीनी, बिस्कुट, पास्ता।
– शिक्षा सामग्री: नोटबुक, पेंसिल, शैक्षिक उपकरण।
– घरेलू उपयोग: साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, किचनवेयर।
– स्वास्थ्य: दवाइयां, बीमा पॉलिसी।
– अन्य: टीवी, एसी, छोटी कार, बाइक, ट्रैक्टर, कृषि उपकरण।
क्या हुआ महंगा?
लक्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स 28प्र. से बढ़ाकर 40प्र. किया गया है:
– वाहन: 350सीसी से बड़ी मोटरसाइकिलें, एसयूवी, लक्जरी कारें, रेसिंग कारें।
– मनोरंजन और सट्टा: कैसीनो, रेस क्लब, जुआ, सट्टेबाजी।
– हानिकारक उत्पाद: सिगरेट, तंबाकू, कार्बोनेटेड/कैफीनयुक्त पेय।
इस जीएसटी सुधार से आम लोगों को राहत मिलेगी, जबकि विलासिता और अस्वास्थ्यकर उत्पादों पर अंकुश लगेगा।
मिट्टी की ईंटों के दाम नहीं होंगे कम, आम आदमी के सस्ते घर का सपना अधूरा?
जीएसटी-2 की घोषणा के बाद ईंट भट्टा उद्योग में कर दरों को लेकर चल रही अनिश्चितता अब खत्म हो गई है। रविवार को राज्य कर विभाग ने एक शासनादेश जारी कर स्पष्ट किया कि मिट्टी की ईंटों पर 12 प्रतिशत जीएसटी पहले की तरह लागू रहेगा। ईंट भट्टा उद्योग को पांच प्रतिशत टैक्स स्लैब में राहत की उम्मीद थी, लेकिन इस निर्णय ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। साथ ही, ईंट भट्टों के लिए छह प्रतिशत की कंपोजीशन स्कीम भी यथावत रहेगी। राज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, फ्लाई ऐश ईंट, सामान्य निर्माण ईंट, सिलिकामय मिट्टी की ईंट और छत की टाइलों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा। वहीं, रेत से बनी ईंटों पर पांच प्रतिशत टैक्स दर निर्धारित की गई है। ईंट भट्टा उद्योग मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है और यह लाखों मजदूरों को मौसमी रोजगार प्रदान करता है। उद्योग संगठनों का मानना है कि टैक्स दरों में कमी से न केवल ईंटों की लागत कम होती, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को भी प्रोत्साहन मिलता। हालांकि, 12 प्रतिशत टैक्स बरकरार रहने से ईंटों की कीमतों में कोई कमी नहीं आएगी, जिससे ग्रामीण उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बना रहेगा।
श्रम आधारित उद्योग को राहत की उम्मीद थी
ऑल इंडिया टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जीएसटी-2 की घोषणा के बाद से ही ईंट उद्योग में यह असमंजस था कि इसे किस टैक्स स्लैब में रखा जाएगा। पहले से ही इस पर 12 प्रतिशत जीएसटी लागू था। उद्योग को उम्मीद थी कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े इस श्रम-आधारित उद्योग को कुछ राहत मिलेगी। लेकिन, यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। साथ ही, 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब को भी खत्म नहीं किया गया है।


