किसानों की आय दुगनी करने डबल इंजन सरकार का एमपी में एक और कदम

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केंद्र और मध्य प्रदेश की भाजपा शासित सरकारों का संकल्प है कि जल्दी से जल्दी अथवा निर्धारित समय अवधि में किसानों की आय दुगनी होना चाहिए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस बारे में केवल चिंतन ही नहीं कर रहे बल्कि विकास परक योजना बनाकर उन्हें साकार करने की ओर निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इसी निरंतरता का परिणाम है कि एक ओर किसानों को अब मांग अनुरूप बिजली उपलब्ध हो रही है। सिंचाई के साधन लगातार बढ़ रहे हैं और नए-नए बांधों का निर्माण कार्य हाथों में लिया जा रहा है। एक क्रियान्वयन अंतर्गत मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने अपने राज्य में 23 नए बांध बनाने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश के 13 जिलों में खेती किसानी करने वाले कृषकों को फायदा होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस परियोजना के तहत दो चरणों में इन बांधों का निर्माण होगा। फल स्वरुप एक सुनियोजित योजना के तहत किसानों को हित में यह योजना साकार की जा सकेगी। यह बात सही है कि आजकल किसानों को डीएपी खाद अर्थात रासायनिक उर्वरक के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। विरोधी दल होने के नाते मध्य प्रदेश में कांग्रेस इसे मुद्दा बनाने का भरपूर प्रयास करने में जुटी है। किंतु वह सफल नहीं हो पा रही, शायद इसका कारण यही है कि किसान मध्य प्रदेश शासन और केंद्र सरकार कहीं कृषक हितेषी योजनाओं को समझ रहे हैं तथा यथा संभव सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। वैसे भी केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि यूक्रेन एवं रूस के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसके चलते रासायनिक उर्वरक की उपलब्धता में वैश्विक स्तर पर कठिनाई आ रही है। लेकिन भारत सरकार इन प्रतिकूल हालातो के बीच भी रासायनिक उर्वरकों को यथासंभव आवश्यकता अनुसार उपलब्ध कराने जमीन आसमान एक करने में जुटी हुई है। शायद इसी किसान हितैषी व्यवहार का परिणाम रहा कि जब दिल्ली में लंबे समय तक किसान आंदोलन चलता रहा, राजधानी को जाम बनाए रखना के आसमानी प्रयास हुए। लेकिन मध्य प्रदेश के किसान उक्त आंदोलन से दूर ही बने रहे। क्योंकि यहां किसानों की हित की योजनाएं पूर्व से आकर लेती रही हैं। यहां तक कि इस प्रदेश को कृषि कर्मण्य अवार्ड एक से अधिक बार मिलता रहा है। इसी निरंतरता को आगे बनाए रखते हुए मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार ने अब किसानों के लिए 23 नए बांध बनाने का काम हाथ में लिया है। उल्लेखनीय तथ्य है कि इसमें आने वाली लागत का 90 प्रतिशत धन केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध किया जाना है तथा 10 प्रतिशत लागत मध्य प्रदेश सरकार मिलाकर इस परियोजना को मूर्त रूप देने का काम करने जा रही है। ज्ञात हो कि पिछले कई सालों से मध्य प्रदेश में नए बांध बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। क्योंकि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां किसानों को अपनी मेहनत और ऊर्जा खपाने के बाद भी फसल की पर्याप्त पैदावार नहीं मिल पाती, तो उसका एक कारण पानी की अनुपलब्धता भी है। लेकिन अब जब यह परियोजना हाथ में आ रही है तो मध्य प्रदेश सरकार पार्वती, काली सिंध और चंबल नदियों पर आधारित उक्त परियोजना पर काम शुरू कर चुकी है। जाहिर है इसके पूरा होने पर ग्वालियर चंबल संभाग के अनेक जिले लाभान्वित होंगे तो वहीं मालवा और धार इलाकों में भी हरित क्रांति तेजी के साथ आगे बढ़ेगी। बता दें कि इस कार्य में राजस्थान सरकार का भी बराबर से साथ मिल रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव उक्त परियोजना की बराबर मॉनिटरिंग कर रहे हैं तथा निकट भविष्य में वे एक समीक्षा बैठक भी लेने जा रहे हैं। जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसे पूरा करने हेतु गाइडलाइन बताई जानी है। इस पूरी परियोजना को पूरा होने में लगभग 75000 करोड रुपए की आवश्यकता पड़ने वाली है। जिसमें से मध्य प्रदेश की सरकार को 35000 करोड़ के काम अपने यहां करवाने हैं। बाकी के काम राजस्थान सीमा क्षेत्र में होने वाले हैं। वैसे भी देखा जाए तो मध्य प्रदेश कृषि आधारित राज्य होते हुए एक औद्योगिक शक्ति के रूप में भी अपनी पहचान रखता है। उम्मीद की जा रही है जब यह बांध बनकर तैयार हो जाएंगे तब इनके माध्यम से केवल किसानों को ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े उद्योगों को भी आवश्यकता अनुसार पानी उपलब्ध होने जा रहा है। आश्वस्त हुआ जा सकता है कि इन विकास परियोजनाओं के चलते एक ओर मध्य प्रदेश खाद्य उपलब्धताओं के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा तो वही अन्य उत्पादनों के मामले में भी इसके द्वारा एक नई लकीर खींचने की तैयारी की जा चुकी है। अब बारी संबंधित विभागों और उनके अधिकारियों की है। यदि वे समय अवधि में इस परियोजना को पूरा करते हैं तो किसानों को तो फायदा होगा ही, किसानों का हित करने और उनके हित के बारे में सोचने वाली भाजपा सरकार के पक्ष में सकारात्मक माहौल और अधिक स्थापित होने की संभावनाएं हैं।

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