एजेंसी, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच निर्वाचन आयोग के एक फैसले ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद राज्य की मतदाता सूची से लगभग काटे 91 लाख नाम । इसका सीधा मतलब यह है कि ये लोग आगामी चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल तक राज्य में 7.66 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से अब करीब 11.85 प्रतिशत नाम कम हो गए हैं।
इन जिलों में हुई सबसे बड़ी कार्रवाई
वोटर लिस्ट में नाम काटने की प्रक्रिया सबसे ज्यादा मुस्लिम बहुल और सीमावर्ती जिलों में देखने को मिली है। मुर्शिदाबाद जिले में न्यायिक जांच के बाद 4.55 लाख से ज्यादा नाम सूची से बाहर कर दिए गए। वहीं, बांग्लादेश की सीमा से सटे उत्तर 24 परगना जिले में भी 3.25 लाख से अधिक मतदाताओं को अयोग्य करार दिया गया है। मालदा में 2.39 लाख, नदिया में 2.98 लाख और दक्षिण 24 परगना में 2.23 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में, जहां मतुआ समुदाय की बड़ी आबादी है, वहां नाम हटाए जाने का प्रतिशत काफी ऊंचा रहा है।
कोलकाता और मुख्यमंत्री के क्षेत्र पर भी असर
राजधानी कोलकाता में भी बड़ी संख्या में मतदाता अयोग्य पाए गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर वाले कोलकाता दक्षिण इलाके में 28,000 से ज्यादा नाम काटे गए हैं। वहीं, कोलकाता उत्तर में जांच के दायरे में आए करीब 64 प्रतिशत मतदाताओं को वोटिंग के लिए अयोग्य पाया गया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद अब पश्चिम बंगाल का कुल मतदाता आधार घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गया है।
न्यायाधिकरण का विकल्प पर संशय बरकरार
जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके पास अब केवल विशेष न्यायाधिकरण में अपील करने का रास्ता बचा है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अगर ये न्यायाधिकरण किसी को योग्य घोषित कर भी देते हैं, तो क्या वे इस चुनाव में वोट डाल पाएंगे या नहीं। चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ चरणबद्ध तरीके से की गई है और सभी आंकड़े सार्वजनिक कर दिए गए हैं।
चुनाव की तारीखें और अंतिम सूची
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहले चरण की 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जिसके लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जा चुका है। दूसरे चरण की 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। आयोग ने साफ कर दिया है कि पहले चरण के लिए अब सूची में कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा। अब सबकी निगाहें 13 अप्रैल को होने वाली उच्चतम न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में कोई नया निर्देश आ सकता है।
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