23 terrorists under UAPA

आतंकवाद पर केंद्र सरकार का सबसे बड़ा प्रहार : जैश और लश्कर से जुड़े 23 खूंखार अपराधी यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। 23 terrorists under UAPA : भारत सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम अर्थात यूएपीए के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए 23 बड़े अपराधियों को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय के संदर्भ में 4 जुलाई 2026 को एक विस्तृत गजट नोटिफिकेशन जारी कर देश और दुनिया को इसकी आधिकारिक सूचना दे दी है। इस बड़े फैसले के बाद देश में सक्रिय और सीमा पार बैठे आतंकी संगठनों के नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को एक बहुत बड़ी कानूनी सफलता प्राप्त हुई है।

गृह मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना और आतंकी संगठनों का गठजोड़

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गई इस नई और संवेदनशील अधिसूचना में पाकिस्तान की धरती से संचालित होने वाले खूंखार आतंकी संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई पाकिस्तानी तथा स्थानीय गुर्गों के नाम शामिल किए गए हैं। सरकार द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के अनुसार इन सभी 23 व्यक्तियों पर भारतीय सीमाओं के भीतर नए आतंकियों की भर्ती करने, युवाओं का ब्रेनवॉश करके उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देने, आतंकी गतिविधियों को संचालित करने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता अर्थात टेरर फंडिंग जुटाने, खतरनाक हथियारों तथा गोला-बारूद की अवैध आपूर्ति करने, भारतीय सीमाओं में घुसपैठ कराने और देश के विभिन्न हिस्सों में जानलेवा आतंकी हमलों की साजिश रचने एवं उन्हें अंजाम देने जैसे बेहद गंभीर और संगीन आरोप सिद्ध हुए हैं।

सुनजवां आर्मी कैंप हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं पर शिकंजा

भारत सरकार द्वारा जारी की गई इस ब्लैकलिस्ट में उन चेहरों को विशेष रूप से बेनकाब किया गया है जिन्होंने भारतीय सेना के कैंपों पर हुए हमलों की रूपरेखा तैयार की थी। इस सूची में सबसे प्रमुख नामों में से एक मसूद इलियास कश्मीरी का है, जो खूंखार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से गहराई से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि मसूद इलियास कश्मीरी वर्ष 2022 में जम्मू के सुनजवां आर्मी कैंप पर हुए भीषण और कायराना हमले की मुख्य साजिश रचने में शामिल था। इसके साथ ही एक अन्य खतरनाक आरोपी मोहम्मद मुसद्दिक का नाम भी इस सूची में शामिल है, जिस पर सुनजवां सैन्य कैंप हमले के दौरान आतंकवादियों को सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में अवैध घुसपैठ कराने और पूरे आतंकी ऑपरेशन के दौरान उनके साथ निरंतर तालमेल व समन्वय बनाए रखने का बड़ा आरोप है।

नागरोटा सैन्य शिविर हमले के मास्टरमाइंड भी सूची में शामिल

वर्ष 2016 में भारतीय सेना के नागरोटा आर्मी कैंप पर हुए आत्मघाती हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले के पीछे सक्रिय रहे पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गृह मंत्रालय ने इस बार सूची में मुफ्ती मोहम्मद असगर खान का नाम प्रमुखता से डाला है। सुरक्षा बलों की जांच के अनुसार मुफ्ती मोहम्मद असगर खान नागरोटा सैन्य शिविर हमले से जुड़े घुसपैठ नेटवर्क का मुख्य संचालक और कमांडर रहा है, जो लगातार सीमा पार से आतंकियों को भारतीय सीमा में धकेलने का काम करता था। इस हमले से जुड़ा एक और नाम हाफिज अब्दुल शकूर का भी है, जिसने नागरोटा हमले से ठीक पहले भारत के भीतर मौजूद स्थानीय स्लीपर सेल और देशद्रोही तत्वों के साथ संपर्क स्थापित किया था और आतंकियों की सुरक्षित घुसपैठ सुनिश्चित करने में एक बेहद सक्रिय भूमिका निभाई थी।

जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप और मददगारों पर बड़ी चोट

नागरोटा हमले के सह-आरोपियों और जैश-ए-मोहम्मद के रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले अन्य चेहरों को भी इस सूची के माध्यम से पूरी तरह से कानून के दायरे में ला खड़ा किया गया है। इस कड़ी में अब्दुल्ला जेहादी, जिसे शाह नवाज अथवा अल हिजामा के नाम से भी जाना जाता है, का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अब्दुल्ला जेहादी पर नागरोटा सैन्य कैंप हमले में शामिल रहे फिदायीन हमलावरों को हर प्रकार की लॉजिस्टिक और जमीनी सहायता प्रदान करने का आरोप है। इसके अतिरिक्त वह पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के कई अवैध हथियार एवं आतंकी प्रशिक्षण शिविरों का संचालन करने का भी दोषी पाया गया है, जहां भारतीय युवाओं को गुमराह करके देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की ट्रेनिंग दी जाती थी।

लश्कर के लॉन्चिंग कमांडर और वेपन सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश

इस बड़े एक्शन के तहत केवल जैश ही नहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा के पूरे सप्लाई चेन और कमांड स्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया गया है। गृह मंत्रालय ने फिरदौस अहमद भट को लश्कर-ए-तैयबा का एक बेहद खतरनाक लॉन्चिंग कमांडर घोषित किया है। फिरदौस अहमद भट लंबे समय से कश्मीर घाटी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकियों की अवैध घुसपैठ कराने और उन्हें छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाने तथा अन्य साजो-सामान उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क का नेतृत्व कर रहा था। इसके साथ ही बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई का नाम भी इस प्रतिबंधित सूची में दर्ज किया गया है। बिलाल अहमद मीर कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर और उसके मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट अर्थात टीआरएफ के लिए सीमा पार से हथियारों की अवैध तस्करी और आपूर्ति का पूरा काम संभालता था, जिससे घाटी में अशांति फैलाई जा सके।

कड़े फैसले पर भारत सरकार का आधिकारिक रुख

इस अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त कानूनी कार्रवाई के बाद केंद्र सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार के आधिकारिक प्रवक्ताओं और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार अधिसूचना में शामिल किए गए सभी 23 नागरिकों की भूमिका देश विरोधी गतिविधियों में पूरी तरह प्रमाणित हो चुकी है। इन सभी के खिलाफ विभिन्न आतंकी हमलों में संलिप्तता, युवाओं को आतंक के रास्ते पर धकेलने के लिए भर्ती अभियान चलाने, हथियारों की बड़ी खेप भारत भेजने, हवाला और अन्य माध्यमों से टेरर फंडिंग का जाल बिछाने और देश की सीमाओं में घुसपैठ कराने के पुख्ता सबूत मिले हैं। इन्हीं अकाट्य प्रमाणों के आधार पर देश की अखंडता को बनाए रखने के लिए यूएपीए के प्रावधानों के तहत इन्हें आधिकारिक रूप से व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया है।

क्या है गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम अर्थात यूएपीए कानून

गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम जिसे आमतौर पर यूएपीए कहा जाता है, भारत का सबसे शक्तिशाली और प्रभावी आतंकवाद-रोधी कानून माना जाता है। इस कड़े कानून का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाली किसी भी प्रकार की गैरकानूनी, राष्ट्रविरोधी अथवा आतंकवादी गतिविधियों को पूरी तरह से रोकना और उनका समूल नाश करना है। इस ऐतिहासिक कानून में वर्ष 2019 में किए गए संशोधनों के बाद भारत सरकार को यह विशेष शक्ति प्राप्त हुई है कि वह न केवल किसी संदिग्ध संगठन को बल्कि किसी भी खतरनाक व्यक्ति या अपराधी को व्यक्तिगत रूप से आतंकवादी घोषित कर सकती है। इस कानून के तहत नामजद होने के बाद संबंधित अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने और उनके पूरे नेटवर्क को फ्रीज करने की कानूनी प्रक्रिया बेहद आसान और सख्त हो जाती है।

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