एजेंसी, नई दिल्ली। 1 अप्रैल से लागू होंगे 16 बड़े बदलाव : भारत में 1 अप्रैल 2026 से नए वित्तीय वर्ष (2026-27) का आगाज होने जा रहा है। केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए ये बदलाव आपकी बचत, निवेश और खर्च करने के तरीकों को पूरी तरह बदल देंगे। विशेष रूप से नया आयकर अधिनियम और डिजिटल सुरक्षा के कड़े नियम अब हर नागरिक के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएंगे। इस रिपोर्ट में हम उन 16 महत्वपूर्ण बिंदुओं का विश्लेषण कर रहे हैं जो आपकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डालेंगे।
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नया आयकर अधिनियम और पैन-आधार लिंकिंग 1 अप्रैल से 1961 का पुराना आयकर कानून इतिहास बन जाएगा और इसकी जगह ‘आयकर अधिनियम 2025’ प्रभावी होगा। अब ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘फाइनेंशियल ईयर’ के दोहरे सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। 1 अप्रैल से होने वाली कमाई को सीधे ‘टैक्स ईयर 2026-27’ के तहत रिपोर्ट किया जाएगा। इसके साथ ही, जो पैन कार्ड आधार से लिंक नहीं हैं, उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया है। अब पुराने आयकर फॉर्म की जगह नए फॉर्म लेंगे; जैसे फॉर्म 16 अब फॉर्म 130 और फॉर्म 16ए अब फॉर्म 131 के नाम से जाना जाएगा। पैन निष्क्रिय होने पर आप बैंक खाता नहीं खोल पाएंगे और 50,000 रुपये से अधिक का लेनदेन भी नहीं कर सकेंगे।
डिजिटल भुगतान में सुरक्षा की अतिरिक्त परत रिजर्व बैंक ने ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए ‘मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ अनिवार्य कर दिया है। अब यूपीआई या नेट बैंकिंग से बड़े भुगतान करने के लिए केवल ओटीपी पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट या पिन का उपयोग करना भी जरूरी होगा।
टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन का अंत नेशनल हाईवे पर सफर अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रहा है। 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर नकद भुगतान की खिड़की बंद की जा सकती है। जो चालक फास्टैग के बजाय यूपीआई से भुगतान करेंगे, उन्हें 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। बिना फास्टैग वाली गाड़ियों से दोगुना जुर्माना वसूलने के नियम को भी और सख्त किया गया है।
₹12.75 लाख तक की आय टैक्स फ्री नई कर व्यवस्था के तहत अब ₹12 लाख तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। यदि इसमें ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ दिया जाए, तो प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक की आय पूरी तरह टैक्स फ्री हो जाएगी।
एलपीजी और एटीएम शुल्क में बदलाव हर महीने की पहली तारीख की तरह एलपीजी के कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतों की नई समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, कई निजी बैंकों ने एटीएम से कैश निकालने की मुफ्त सीमा घटा दी है। तय सीमा से अधिक बार पैसे निकालने पर अब प्रति ट्रांजैक्शन 23 रुपये से ज्यादा का शुल्क देना पड़ सकता है।
मेट्रो शहरों की लिस्ट में नए नाम मकान किराया भत्ता में 50% छूट के लिए अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी ‘मेट्रो सिटी’ का दर्जा मिल गया है। इससे पहले यह सुविधा सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई तक ही सीमित थी।
बच्चों के शिक्षा भत्ते में बड़ी वृद्धि पुरानी टैक्स व्यवस्था में बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाले ₹100 प्रति माह के भत्ते को बढ़ाकर अब ₹3,000 कर दिया गया है। वहीं, हॉस्टल के लिए मिलने वाले भत्ते को ₹300 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह कर दिया गया है।
मील कार्ड्स की सीमा बढ़ी कर्मचारियों को मिलने वाले फूड कूपन या मील कार्ड्स पर टैक्स फ्री लिमिट ₹50 प्रति भोजन से बढ़ाकर अब ₹200 प्रति भोजन कर दी गई है।
कॉर्पोरेट गिफ्ट वाउचर पर छूट कर्मचारियों को साल भर में मिलने वाले गिफ्ट कार्ड या वाउचर की टैक्स फ्री सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर अब ₹15,000 कर दी गई है।
पैन कार्ड के लिए नए फॉर्म अब केवल आधार के जरिए पैन कार्ड बनवाने की सुविधा बंद हो गई है। इसके लिए अब श्रेणी के अनुसार विशेष फॉर्म (जैसे व्यक्तियों के लिए फॉर्म 93) भरना जरूरी होगा। साथ ही ₹10 लाख से अधिक नकद जमा करने पर पैन देना अनिवार्य है।
बायोमेट्रिक सुरक्षा अनिवार्य आरबीआई के नए नियमों के तहत अब बड़े ट्रांजैक्शन के लिए केवल ओटीपी से काम नहीं चलेगा। इसके लिए बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा की दूसरी परत को पार करना होगा।
कैशलेस टोल का कड़ा नियम 1 अप्रैल से नेशनल हाईवे पर टोल का नकद भुगतान पूरी तरह बंद किया जा सकता है। फास्टैग अनिवार्य है और यूपीआई भुगतान पर 25% अतिरिक्त चार्ज लग सकता है।
फास्टैग एनुअल पास की कीमतों में बढ़ोत्तरी एनएचएआई ने फास्टैग एनुअल पास की कीमत ₹3,000 से बढ़ाकर ₹3,075 कर दी है। यह पास 1 साल या 200 ट्रिप के लिए मान्य होगा।
पीएफ का ऑटो-ट्रांसफर नौकरी बदलने पर अब पीएफ बैलेंस ट्रांसफर करने के लिए अलग से फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी। नई कंपनी जॉइन करते ही आपका पीएफ खाता अपने आप पुराने खाते से लिंक हो जाएगा।
पीएफ निकासी के सरल नियम ईपीएफओ ने निकासी नियमों को तीन श्रेणियों में बांट दिया है। अब बीमारी, शिक्षा और शादी जैसे कार्यों के लिए ‘ऑटो-सेटलमेंट’ के जरिए ₹5 लाख तक की राशि केवल 3 दिन के भीतर निकाली जा सकेगी।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर नया टैक्स यदि आपने गोल्ड बॉन्ड बाजार (सेकेंडरी मार्केट) से खरीदे हैं, तो मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफे पर अब 12.5% कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। यह छूट अब केवल उन लोगों को मिलेगी जो सीधे आरबीआई से बॉन्ड खरीदेंगे।


