एजेंसी, वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। ट्रंप ने चीन, जापान, फ्रांस और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजने की अपील की थी। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि सहयोगी देश मदद के लिए आगे नहीं आए, तो भविष्य में नाटो के लिए स्थिति काफी खराब हो सकती है। हालांकि, अमेरिका के प्रमुख रणनीतिक साझेदार जापान और ऑस्ट्रेलिया ने फिलहाल अपने नौसैनिक जहाज भेजने से साफ मना कर दिया है।
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने इस क्षेत्र में अपने जहाज तैनात करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि जापान अपने कानूनी दायरे में रहकर विकल्पों पर विचार कर रहा है और अमेरिका की ओर से अभी तक कोई औपचारिक अनुरोध भी नहीं मिला है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने भी दूरी बनाते हुए कहा है कि उसकी योजना केवल संयुक्त अरब अमीरात में एक सैन्य विमान तैनात करने की है और वह इस समुद्री अभियान में अपने नौसैनिक जहाज नहीं भेजेगा। दूसरी तरफ, ब्रिटेन ने कहा है कि वह अभी विकल्पों पर गौर कर रहा है, जबकि चीन ने संघर्ष को तुरंत खत्म करने पर जोर दिया है।
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ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग को आंशिक रूप से बंद कर रखा है, जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। इस तनाव के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल और ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी चर्चा कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान बातचीत के लिए उत्सुक तो है, लेकिन वह ठोस कदम उठाने को तैयार नहीं दिख रहा। फरवरी के अंत से जारी इस युद्ध ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में समुद्री यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां अब तक करीब 20 जहाजों पर हमले हो चुके हैं।


