एजेंसी, मुंबई। होर्मुज जलडमरूमध्य पर जारी भारी तनाव के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। बुधवार दोपहर 1 बजे कच्चे तेल से लदा एक विशाल जहाज सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया और शाम को इसे जवाहर द्वीप पर लंगर डाल दिया गया। इस जहाज में 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल मौजूद है, जिसे पूर्वी मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा। तेल उतारने के इस पूरे काम में करीब 36 घंटों का समय लगने की संभावना है।
लाइबेरिया के झंडे वाला यह जहाज बना मिसाल लाइबेरियाई ध्वज वाला यह टैंकर ‘शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स’ ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचने वाला पहला कमर्शियल जहाज बन गया है। इस रास्ते पर बढ़ते हमलों और पाबंदियों के बीच इसका सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। सऊदी अरब से यात्रा और बीच रास्ते में गायब होना सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से 1 मार्च को तेल भरकर यह जहाज 3 मार्च को रवाना हुआ था। समुद्री आंकड़ों के मुताबिक, 8 मार्च को जब यह टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संवेदनशील हिस्से में था, तब यह अचानक ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया। इसके बाद 9 मार्च को यह दोबारा सिस्टम पर दिखाई दिया।
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सुरक्षा के लिए बंद किया था अपना ट्रांसपोंडर खतरनाक समुद्री मार्ग से गुजरते समय सुरक्षा की दृष्टि से टैंकर ने अपनी स्वचालित पहचान प्रणाली यानी ट्रांसपोंडर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। यह एक रेडियो प्रणाली होती है जो जहाज की स्थिति और पहचान की जानकारी देती है। हमले की आशंका को देखते हुए अक्सर युद्ध क्षेत्रों में जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए ऐसा करते हैं। भारतीय कप्तान के नेतृत्व में 29 सदस्यों का दल इस टैंकर की कमान एक भारतीय कप्तान के हाथों में थी और चालक दल में कुल 29 सदस्य सवार थे, जिनमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलिपिनो नागरिक शामिल हैं। यह जहाज शेनलॉन्ग शिपिंग लिमिटेड का है और इसका संचालन एथेंस की एक कंपनी द्वारा किया जाता है।
ईरान का भारत को विशेष सहयोग ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बेहद कड़ी पाबंदियां लगा रखी हैं और वहां लगातार जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है, जिससे तेल की आपूर्ति सुचारू हो सकी है। समुद्र में फंसे हैं भारत के कई जहाज शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में फारस की खाड़ी के क्षेत्र में भारत के 28 जहाज सक्रिय हैं। इनमें से 24 जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में फंसे हुए हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक तैनात हैं। वहीं, चार जहाज पूर्वी हिस्से में हैं, जहां 101 भारतीय कर्मी मौजूद हैं। क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत? ईरान और ओमान के बीच स्थित यह महज 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीवन रेखा माना जाता है। वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा और समुद्री तेल व्यापार का एक चौथाई हिस्सा इसी पतले जलमार्ग से होकर गुजरता है। प्रतिदिन यहां से 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल का परिवहन होता है।


