होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट पार कर भारत की ओर बढ़े एलपीजी से लदे दो बड़े जहाज, जल्द पहुंचेगी रसोई गैस की खेप

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एजेंसी, दिल्ली। भारतीय तिरंगे वाले दो और एलपीजी टैंकर फारस की खाड़ी से अपनी यात्रा शुरू कर चुके हैं। ये जहाज युद्ध के कारण खतरनाक बने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारतीय तटों की ओर बढ़ रहे हैं। जहाजों की निगरानी करने वाले आंकड़ों से यह पुख्ता जानकारी मिली है। सोमवार दोपहर को एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत ईरान के लारक और क्वेशम द्वीपों के पास देखे गए।

ये दोनों जहाज एक-दूसरे के बेहद करीब रहकर आगे बढ़ रहे हैं। ये उन 22 भारतीय जहाजों का हिस्सा हैं जो पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के कारण फारस की खाड़ी में फंस गए थे। युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता लगभग बंद होने के कगार पर था, जिससे जहाजों की आवाजाही ठप हो गई थी। होर्मुज का यह संकरा समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है, जो खाड़ी देशों के तेल और गैस को पूरी दुनिया तक पहुँचाने का मुख्य मार्ग है।

इससे पहले भी एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी नामक दो जहाज करीब 92,712 टन एलपीजी लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। यह मात्रा भारत में पूरे एक दिन की रसोई गैस की खपत के बराबर है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के समय इस क्षेत्र में भारत के कुल 28 जहाज मौजूद थे। ताजा जानकारी के मुताबिक, ईरान की ओर से जांच और पुष्टि के बाद चुनिंदा जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति दी जा रही है।

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भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर काफी निर्भर है। देश अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी और 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। हालांकि कच्चे तेल के लिए रूस और अमेरिका जैसे अन्य विकल्प तलाशे गए हैं, लेकिन एलपीजी और गैस की आपूर्ति में बाधा आने से कमर्शियल और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इन दो जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है।

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