चारधाम

हिमालयी धामों में उमड़ा आस्था का सैलाब : कड़ाके की ठंड और हिमपात के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने रचा नया कीर्तिमान

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एजेंसी, देहरादून। हिमालयी धामों में उमड़ा आस्था का सैलाब : उत्तराखंड की पावन देवभूमि पर इस वर्ष चारधाम यात्रा का एक ऐसा ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है, जिसे भविष्य में श्रद्धा के महाकुंभ के रूप में स्मरण किया जाएगा। यात्रा के प्रारंभिक ग्यारह दिनों की अल्प अवधि में ही चार लाख से अधिक तीर्थयात्री देवालयों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। हिमालय की चोटियों पर व्याप्त हाड़ कंपा देने वाली शीत लहर और पल-पल बदलते मौसम के मिजाज के बाद भी बाबा के दर्शनों की अभिलाषा लिए भक्तों का प्रवाह निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। विशेष रूप से केदारनाथ धाम में अब तक दो लाख सात हजार से भी अधिक श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं, जो पर्यटन और तीर्थाटन के दृष्टिकोण से एक अभूतपूर्व आंकड़ा है।

केदारनाथ में हवाई सेवाओं का विस्तार और प्रकृति की परीक्षा

रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित केदारनाथ धाम में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है। वर्तमान में हेलीपैड की क्षमता का विस्तार करते हुए वहां एक साथ दो-दो हेलीकॉप्टरों के उतरने की व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा से मुक्ति मिल सके और हवाई यातायात सुचारू बना रहे। हालांकि, हिमालयी मौसम अपनी अनिश्चितता से श्रद्धालुओं के धैर्य की कठिन परीक्षा ले रहा है। विगत रात्रि हुई भारी वर्षा के कारण लगभग दस हजार से अधिक भक्त पूरी तरह जलमग्न हो गए, किंतु शीतल पवन के थपेड़ों के बीच भी उनकी धार्मिक निष्ठा डगमगाई नहीं।

बद्रीनाथ धाम में व्यवस्थागत सुधार और आधुनिक विकास कार्य

भगवान विष्णु के परम धाम बद्रीनाथ में कपाट खुलने के पश्चात से श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। अब तक यहाँ एक लाख अट्ठावन हजार श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर चुके हैं। राज्य सरकार ने धाम की व्यवस्थाओं को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री द्वारा हेलीपैड के सुदृढ़ीकरण हेतु एक करोड़ चौहत्तर लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे भविष्य में न केवल हवाई यात्रा सुगम होगी बल्कि आपदा की स्थिति में राहत कार्यों को भी गति मिलेगी। मंदिर की मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर के आंतरिक परिसर में चलचित्र अथवा लघु वीडियो बनाना पूर्णतः वर्जित होगा और बिना पंजीकरण एवं पहचान पत्र के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उत्तरकाशी के धामों में शीत लहर का प्रकोप और प्रबंधन

गंगोत्री और यमुनोत्री धामों की स्थिति देखें तो वहां भी लगभग अट्ठावन हजार श्रद्धालु अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। गंगोत्री में प्राकृतिक परिस्थितियां अत्यंत जटिल हो गई हैं, जहां तापमान शून्य से सात अंश नीचे तक लुढ़क चुका है। निरंतर हो रही बर्फबारी और वर्षा ने यात्रा मार्ग को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। भीड़ के दबाव को व्यवस्थित करने हेतु उत्तरकाशी प्रशासन ने प्रवेश द्वारों पर नियंत्रण की विशेष पद्धति लागू की है। इसके साथ ही भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के जवान धामों की स्वच्छता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु दिन-रात शून्य से नीचे के तापमान में भी मुस्तैद हैं।

यमुनोत्री मार्ग पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के कड़े नियम

यमुनोत्री धाम की यात्रा को पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने के लिए प्रशासन ने अत्यंत कड़े रुख अपनाए हैं। पैदल मार्ग पर प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के लिए भारी अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। साथ ही, यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़ों और खच्चरों के लिए रोटेशन प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है ताकि पशुओं पर भी अतिरिक्त बोझ न पड़े। प्रशासन ने आगामी यात्रियों से यह विशेष आग्रह किया है कि हिमालय की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण और मौसम की पूर्व जानकारी लेकर ही अपनी यात्रा का मार्ग प्रशस्त करें ताकि देवभूमि की यह यात्रा सुखद और सुरक्षित संपन्न हो सके।

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