एजेंसी, चंडीगढ़। हरियाणा बैंक घोटाला : हरियाणा में सरकारी खजाने से जुड़े एक बड़े बैंक घोटाले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य सरकार की सिफारिश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले को अपने हाथ में लेते हुए नई दिल्ली में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है। इसी के साथ सरकार ने दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े इस फर्जीवाड़े ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
Haryana Govt has suspended two IAS Officers in Rs.590 crore fraud in IDFC First Bank. pic.twitter.com/0iXmguAJBu
— Hellobanker (@Hellobanker_in) April 9, 2026
दो आईएएस अधिकारियों पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद मुख्य सचिव ने आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार-I (निदेशक, परिवहन विभाग) और राम कुमार सिंह (विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) के निलंबन के आदेश जारी कर दिए हैं। हालांकि आदेश में निलंबन के कारणों का विस्तार से जिक्र नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इनके नाम बैंक खातों और फंड ट्रांसफर से जुड़ी गड़बड़ियों में सामने आए हैं। इससे पहले सरकार ने 15 आईएएस अधिकारियों के तबादले भी किए थे, जिनमें से कई को उनके पदों से हटाकर कम महत्व वाली जगहों पर तैनात किया गया है।
सीबीआई खंगालेगी शेल कंपनियों का नेटवर्क
सीबीआई अब पंचकूला और चंडीगढ़ में अपनी टीमें तैनात कर बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल सबूतों की पड़ताल करेगी। जांच में यह बात सामने आई है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के जरिए सरकारी धन को संदिग्ध शेल कंपनियों में भेजा गया। एंटी करप्शन ब्यूरो की रिपोर्ट बताती है कि कई चेक पर फर्जी हस्ताक्षर पाए गए और सरकारी राशि को निजी फर्मों के खातों में डायवर्ट किया गया। आशंका जताई जा रही है कि यदि गहराई से जांच हुई तो यह घोटाला 28 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
कोटक महिंद्रा बैंक पर बड़ी कार्रवाई
हरियाणा सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक को अपने आधिकारिक पैनल से बाहर कर दिया है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इस बैंक में मौजूद सभी सरकारी खाते तुरंत बंद किए जाएं और वहां जमा राशि को दूसरे बैंकों में ट्रांसफर किया जाए। पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के मामले में बैंक ने अब तक केवल 127 करोड़ रुपये ही लौटाए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब इस बैंक के माध्यम से कोई भी सरकारी लेनदेन नहीं किया जाएगा।
भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में भी यह साफ कर दिया था कि सरकारी धन की एक-एक पाई की वसूली की जाएगी और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। जांच के दौरान अब तक करोड़ों रुपये की रिकवरी की जा चुकी है, लेकिन अब जांच एजेंसियों का मुख्य ध्यान उस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने पर है जिसने 18 सरकारी विभागों के पैसों का दुरुपयोग किया है। आने वाले दिनों में सीबीआई की छापेमारी और नई गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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