सीएम मोहन यादव द्वारा स्थापित आदर्श से सिंहस्थ की सफलता सुनिश्चित
सीएम मोहन यादव द्वारा : सिंहस्थ-2028 की भव्य और सुव्यवस्थित तैयारियों के केंद्र में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी उज्जैन आज विकास और समर्पण के एक अनुपम अध्याय की साक्षी बन रही है। किसी भी राष्ट्र या समाज के समग्र उत्थान में जब नेतृत्व स्वयं अपने आचरण से त्याग और कर्तव्य परायणता की मिसाल पेश करता है, तो जनसामान्य का विश्वास शासन प्रणाली के प्रति न केवल गहरा होता है बल्कि लोक-भागीदारी का एक महायज्ञ आरंभ हो जाता है। उज्जैन के गौरवशाली इतिहास में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपने पैतृक मकान पर खुद गैंती चलाकर विकास कार्य का शुभारंभ करना एक ऐसी ही ऐतिहासिक और युगांतरकारी घटना के रूप में रेखांकित किया जा रहा है। जिस माटी में इंसान जन्म लेता है, जिन आंगनों में बचपन की किलकारियां गूंजती हैं और जहां जीवन के शुरुआती दौर की खट्टी-मीठी यादें बसी होती हैं, उस पैतृक धरोहर से हर व्यक्ति का भावनात्मक लगाव अत्यंत गहरा होता है। ऐसे स्मृतियों से भरे आशियाने के किसी हिस्से को ध्वस्त होते देखना किसी भी हृदय के लिए अत्यंत भावुक और विचलित करने वाला क्षण होता है। परंतु जब सार्वजनिक हित, नागरिक सुविधा और वृहद धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन का प्रश्न सामने आता है, तब व्यक्तिगत मोह से ऊपर उठकर राष्ट्रधर्म का पालन करना ही एक सच्चे और संवेदनशील जननायक की पहचान बनता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व-2028 की तैयारियों के क्रम में खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक लगभग 730 मीटर लंबे मार्ग के चौड़ीकरण कार्य का शुभारंभ करते हुए अपने पैतृक आवास के हिस्से को स्वयं गैंती चलाकर हटाने की शुरुआत… pic.twitter.com/iAfBmsoMnj
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) September 27, 2026
डॉ. मोहन यादव ने जिस सहजता और भावुकता के साथ अपने जन्मस्थान को सिंहस्थ के व्यापक विकास कार्यों के लिए समर्पित किया, उसने यह संदेश स्पष्ट रूप से प्रेषित किया है कि सुशासन और नियम-कायदे किसी पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत विशेषाधिकार के मोहताज नहीं होते। प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सड़क चौड़ीकरण के नियमों के दायरे में जिस प्रकार एक आम नागरिक की संपत्ति आती है, ठीक उसी निष्पक्षता और समानता के साथ मुख्यमंत्री का पैतृक घर भी उस परियोजना की सीमा में शामिल हुआ। यह घटना इस बात की प्रत्यक्ष प्रमाण है कि मध्यप्रदेश में कानून का शासन और पारदर्शी व्यवस्था केवल कागजी बातें नहीं हैं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक धरातल पर पूरी निष्ठा के साथ लागू किया जा रहा है। उज्जैन की खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक के लगभग 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की दिशा में उठाया गया यह कदम आने वाले समय में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा 9.80 करोड़ रुपये की स्वीकृति देना सरकार की दूरदर्शिता और ढांचागत सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उज्जैन की वर्तमान जनसंख्या भले ही करीब आठ लाख के आसपास हो, लेकिन सिंहस्थ महापर्व का स्वरूप इतना विशाल और अलौकिक होता है कि देश-विदेश से लगभग चालीस करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन इस पावन नगरी में संभावित है। इतने विशाल जनसैलाब की सुरक्षा, सुलभ आवागमन और बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करना कोई साधारण चुनौती नहीं है। इस जन-दबाव को संतुलित करने और भविष्य की जरूरतों के अनुकूल अवसंरचनात्मक बदलाव लाने के लिए चौड़े मार्गों और आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण बेहद अनिवार्य है। इस व्यापक विजन को साकार करने में उज्जैन के आम नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही वंदनीय और अनुकरणीय रही है।
मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेते हुए और नगर के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान देने के उद्देश्य से उज्जैन वासियों ने स्वेच्छा से अपने मकानों को पीछे हटाकर चौड़ीकरण के मार्ग को प्रशस्त किया है। इससे भी अधिक गौरव की बात यह है कि इस महायज्ञ में समाज के हर वर्ग ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों ने बिना किसी मतभेद या भेदभाव के अपने-अपने देवस्थानों तक को पीछे हटाकर सामाजिक सौहार्द, समरसता और नागरिक कर्तव्य की एक ऐसी अद्भुत नजीर पेश की है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। यह समरसता इस बात का प्रतीक है कि जब बात सार्वजनिक कल्याण और नगर के गौरव की आती है, तो भारत की विविधता में एकता की मूल भावना स्वतः ही प्रस्फुटित हो उठती है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब सरकार और जनता के बीच परस्पर विश्वास का संबंध मजबूत होता है, तब विकास कार्य किसी बाधा के बिना तीव्र गति से आगे बढ़ते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा अपने छात्र राजनीति के दिनों, विशेषकर साइंस कॉलेज से चुनाव जीतने, जॉइंट सेक्रेटरी और प्रेसिडेंट बनने के दौर से लेकर आज तक के सफर को याद करते हुए अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करने का जो विचार व्यक्त किया गया, वह देश की भावी पीढ़ी और राजनीतिज्ञों के लिए एक अनुकरणीय पाठ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन मूल्यों और सुशासन के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए व्यक्तिगत हितों से परे रहकर नियम, कानून और जनहित को सर्वोपरि रखने की यह कार्यशैली लोकतांत्रिक मूल्यों को नई ऊंचाई प्रदान करती है। सिंहस्थ-2028 केवल एक धार्मिक समागम मात्र नहीं है, बल्कि यह भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक प्रबंधन क्षमता का अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन है। इस भव्य आयोजन को दिव्य और सुरक्षित बनाने के लिए जिस प्रकार उज्जैन की सड़कों, यातायात प्रणालियों और शहरी अधोसंरचना का कायाकल्प किया जा रहा है, वह भविष्य के एक सुव्यवस्थित और आधुनिक उज्जैन की नींव रख रहा है। नेतृत्व द्वारा स्वयं त्याग की शुरुआत करने से प्रशासनिक तंत्र को भी निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से कार्य करने का बल मिलता है, वहीं आम जनता में भी त्याग और सहकारिता की भावना सुदृढ़ होती है। मुख्यमंत्री के इस कदम ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब नेता स्वयं आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत करता है, तो नीतियां केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले लेती हैं। आज उज्जैन जिस आदर्श और विश्वास के मार्ग पर अग्रसर है, वह न केवल सिंहस्थ की सफलता की गारंटी है बल्कि संपूर्ण देश के लिए शहरी विकास, सामाजिक समरसता और नैतिक नेतृत्व का एक उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। सार्वजनिक हित के आगे व्यक्तिगत संपत्ति और मोह का सहर्ष त्याग करने की यह गाथा आने वाले समय में उज्जैन के विकास इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।
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