एजेंसी, नई दिल्ली। यहां लाल किले के निकट हुए विस्फोट के मामले में आरोपी जासिर बिलाल वानी की एनआईए हिरासत बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने सात दिन के लिये बढ़ा दी। प्रधान सत्र एवं जिला न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने 27 नवंबर को जासिर को सात दिन के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की हिरासत में भेज दिया था, जिसकी अवधि बुधवार को खत्म हो रही थी। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में काजीगुंड का निवासी वानी आत्मघाती बम हमलावर उमर का कथित तौर पर करीबी सहयोगी है। उसे दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए घातक कार विस्फोट से पहले ड्रोन में छेड़छाड़ करके रॉकेट बनाने की कोशिश के लिए तकनीकी मदद मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
लाल किला विस्फोट मामले में हस्तक्षेप से इंकार, अदालत ने समिति के गठन संबंधी याचिका निपटाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने लाल किले के पास विस्फोट मामले में मुकदमे के सभी चरण के लिए अदालत की निगरानी में समिति गठित करने के अनुरोध वाली याचिका पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है और याचिका में उठाया गया मुद्दा केवल आशंका पर आधारित है और यह नहीं माना जा सकता कि मुकदमे में देरी होगी। याचिकाकर्ता डॉ. पंकज पुष्कर ने मामले की दैनिक सुनवाई और जांच एजेंसी को अदालत द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के समक्ष मासिक वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि यह एक अच्छा लेख है, याचिका नहीं। आपको याचिका और शोध पत्र में अंतर समझना होगा। हम यहां आपके विचारों और सुझावों को सुनने के लिए नहीं बैठे हैं। हम यहां याचिका पर विचार करने के लिए बैठे हैं, जिसमें आप अपने किसी भी मौलिक अधिकार या संवैधानिक प्रावधान या किसी अन्य कानूनी रूप से लागू अधिकारों के उल्लंघन का जिक्र कर सकते हैं। पीठ ने कहा कि कुछ दलीलों के बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देने का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि कम से कम अदालत का समय तो बर्बाद न करें। हमें ऐसी स्थिति को समझना चाहिए जहां मामला वर्षों से लंबित है, लेकिन अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कम से कम मुकदमे की सुनवाई विधायी आदेश के अनुसार पूरी होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वकील ने कहा कि उन्हें अदालत से कुछ आश्वासन चाहिए कि मुकदमे में देरी नहीं होगी। उन्होंने विभिन्न आतंकवाद मामलों में देरी का हवाला दिया। इस पर अदालत ने कहा कि मुकदमे का तभी निपटारा होगा जब यह शुरू होगा और अभी वह चरण नहीं आया है। सुनवाई के दौरान, केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिका गलत है और याचिकाकर्ता को यह भी पता नहीं है कि लाल किला विस्फोट मामला अब दिल्ली पुलिस के पास नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को स्थानांतरित कर दिया गया है। 10 नवंबर को लाल किले के पास एक कार में विस्फोट हुआ था जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी। याचिका में कहा गया है कि लाल किले के पास हमला कोई साधारण अपराध नहीं है – यह भारत की आत्मा पर, गणतंत्र की संप्रभुता के जीवंत प्रतीक पर हमला है, जहां राष्ट्र हर स्वतंत्रता दिवस पर अपनी संवैधानिक पहचान की पुष्टि करता है। इस आतंकवादी कृत्य की लक्षित प्रकृति राष्ट्रीय मनोबल को अस्थिर करने, व्यापक भय पैदा करने और गणतंत्र के अधिकार को कमजोर करने के लिए बनाई गई।


