नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के निलंबित राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से माफी मांगने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि सदन में कथित तौर पर व्यवधान फैलाने के आरोपों को लेकर आप राज्यसभा सभापति से मांफी मांग लें। कोर्ट ने ये भी कहा कि सभापति माफी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे और आगे का रास्ता तलाशने का प्रयास करेंगे। बता दें कि चड्ढा को हंगामे के चलते राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया था।
क्या बोला कोर्ट?
मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “आपने बिना शर्त माफी की बात कही थी और बेहतर होगा कि आप सभापति से अपॉइंटमेंट लेकर मिलें। आप उनके घर, दफ्तर या राज्यसभा में माफी मांग लें, क्योंकि ये सदन, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ की गरिमा का मामला है। आप पहली बार के सांसद हैं और राज्यसभा के युवा सदस्य हैं। सभापति आपकी माफी पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे।”
कोर्ट ने चड्ढा को बिना शर्त माफी मांगने को कहा है।
निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता
इस मामले में 30 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने चड्ढा के निलंबन पर हैरानी जताई थी। CJI ने कहा था, “क्या यह कार्यवाही में व्यवधान से भी बदतर है? क्या यह सचमुच इतनी बड़ी गलती है? जो व्यक्ति सदन में व्यवधान डालता है, उसे शेष सत्र के लिए बाहर कर दिया जाता है। हमें विपक्षी दल की आवाज को संसद से बाहर न करने के बारे में बहुत सावधान रहना चाहिए।”
क्या है मामला?
चड्ढा पर दिल्ली विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने के प्रस्ताव पर 5 सांसदों की सहमति के बिना उनके फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप है। भाजपा के सांसद सुधांशु त्रिवेदी, नरहरि अमीन और एस फांगनोन कोन्याक, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के एम थंबीदुरई और बीजू जनता दल (BJD) के सस्मित पात्रा ने चड्ढा पर सहमति के बिना नाम शामिल करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद चड्ढा को निलंबित कर दिया गया था।
राघव की तरफ से कोर्ट में क्या दलील दी गई?
पिछली सुनवाई में चड्ढा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा था कि चड्ढा पहले ही माफी मांग चुके हैं और सभापति को भी लिखित माफी देने को तैयार हैं। उन्होंने तर्क दिया था कि 60 दिन तक चड्ढा अगर सदन में नहीं गए तो सीट खाली घोषित हो सकती है। कोर्ट ने चड्ढा की माफी पर अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या AAP सांसद के सदन से माफी मांग लेने से निलंबन रद्द हो सकता है?


