रक्षा व्यवस्थाओं और विकास के बीच बेहतर संतुलन मध्य प्रदेश में

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जैसा कि हम सब जानते हैं, इस समय हमारा देश युद्ध की विभीषिका से रूबरू है। पड़ोसी मुल्क से आए आतंकवादियों ने हमारे 26 लोगों की जान ली तो बदले में भारतीय सेना ने कार्रवाई करते हुए नापाक देश के ढेर सारे एयरोस्पेस उड़ा दिए तथा आतंकवादियों के अनेक अड्डों को तहस-नहस करके रख दिया। इसके अलावा उन आतंकवादियों को भी मार गिराया जो भारत समेत विश्व की अनेक आतंकवादी घटनाओं के भागीदार थे या फिर रणनीतिकार। इन परिस्थितियों के चलते पूरा देश रक्षा व्यवस्थाओं पर चोकस नजर बनाए हुए है‌। जाहिर है भारत का हृदय कहे जाने वाले मध्य प्रदेश की स्थितियां भी इससे अलग नहीं हैं । हमारे यहां भी भारत की वायु सेवा का बेहद सुरक्षित और महत्वपूर्ण एयर स्पेस ग्वालियर जिले के टेकनपुर में स्थित है। वहीं जबलपुर कि आयुध फैक्ट्री में देश की रक्षा के लिए भारी पैमाने पर सैन्य सामग्री का निर्माण होता है। ऐसे अनेक प्रकल्पों के चलते मध्य प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था भी हाई अलर्ट पर है। इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की चुस्त दुरुस्त व्यवस्थाओं का आईना ही कहेंगे कि एक ओर सरकार की नजर रक्षा प्रणालियों पर बनी हुई है, तो दूसरी ओर प्रदेश के विकास की परियोजनाओं को भी रुकने नहीं दिया गया है। बल्कि नए-नए प्रोजेक्ट हाथ में लिए जा रहे हैं और उन्हें जमीनों पर उतारा जा रहा है। इसी तारतम्य में बीते रोज मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के बीच एक एमओयू साइन हुआ। जिसके तहत तापी बेसिन रिचार्ज परियोजना पर हस्ताक्षर करके इसके अनुबंध को अंतिम रूप दे दिया गया। अब इस परियोजना को विकास के पंख लगने जा रहे हैं। जब यह पूरी होगी तो मध्य प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र के अनेक जिलों को इस योजना का लाभ मिलेगा। यदि मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां मालवा से लगे हुए निमाड़ क्षेत्र को भारी फायदा होने वाला है । इस योजना के अस्तित्व में आने से एक तो पेयजल उपलब्धता और अधिक सहज हो जाएगी। वहीं सिंचाई के क्षेत्र में किसान आत्मनिर्भर हो सकेंगे। मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने इस परियोजना में अपनी व्यक्तिगत रुचि बनाए रखी है। क्योंकि वे स्वयं कई बार कह चुके हैं कि ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना से मध्य प्रदेश के 1लाख 23000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था उन्नत हो सकेगी। इस परिणाम के तहत बड़े पैमाने पर भूजल भंडारण का विस्तार किया जाएगा। फल स्वरुप बुरहानपुर एवं खंडवा जिलों के नेपानगर, खकनार, खालवा आदि क्षेत्र भारी पैमाने पर लाभान्वित होने जा रहे हैं। यह तो मालूम ही है कि पूर्व में केन बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती काली सिंध चंबल लिंक परियोजना पर पहले ही काम शुरू हो चुका है। इसमें मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार को केंद्र सरकार से भरपूर आर्थिक सहायता मिल रही है। वहीं प्रदेश की भाजपा सरकार ने भी इस योजना की पूर्णता के लिए खजाना खोल रखा है। अब तापी बेसिन रिचार्ज परियोजना के अमल में आने से बहुत बड़ा क्षेत्र फलने फूलने वाला है। क्योंकि यह मध्य प्रदेश की तीसरी सबसे अहम अंतर राज्यीय नदी परियोजना है। इससे सबसे ज्यादा खंडवा और बुरहानपुर जिले को फायदा होने वाला है। मध्य प्रदेश सरकार की इस परियोजना में दिलचस्पी लेने के लिए इसलिए भी तारीफ करनी चाहिए, क्योंकि जहां-जहां पानी की किल्लत है, आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को कई कोष दूर जाकर पानी भरना पड़ता है, या फिर कई स्थानों पर खारा पानी होने से वह पीने योग्य नहीं है। उन जगहों पर पीने का स्वच्छ और मीठा पानी उपलब्ध हो सकेगा। परियोजना के दूरगामी परिणाम सर्वाधिक लाभदायक रहने वाले हैं । क्योंकि इस योजना के चलते जमीन के भीतर पानी जमा होने से जमीन की प्यास मिटेगी और पारंपरिक तालाब कुए, बावड़ी जो कि सूखते के जा रहे हैं, वह दोबारा से रिचार्ज हो सकेंगे। फल स्वरुप वर्तमान पानी की किल्लत तो खत्म होगी ही, भविष्य के लिए भी भू जल संरक्षण और संवर्धन आने वाली पीढियां को लाभ प्रदान कर पाएगा। एक और खास बात यह कि मध्य प्रदेश शासन ने धार्मिक क्षेत्र के विकास को हाथ में बनाए रखा है। इस योजना के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारी महाराष्ट्र की सरकार के साथ ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, त्रयंबकेश्वर, भीमाशंकर, और घृष्णेश्वर तीर्थ स्थलों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन सर्किट बनाए जाने और इसके अलावा कॉरिडोर विकसित करने पर भी सहमति बन चुकी है। यानि निकट भविष्य में इस क्षेत्र में भी विकास के नए आयाम स्थापित होंगे तो इससे तीर्थ यात्रियों को तो लाभ होगा ही, आवागमन करने वाले छोटे बड़े और भारी वाहनों को भी काफी सहूलियतें उपलब्ध हो जाएंगी। उपरोक्त योजनाओं के अनुबंध और रक्षा व्यवस्थाओं की चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के बीच मध्य प्रदेश शासन की संतुलित कार्य प्रणाली सराहना योग्य है।

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