एजेंसी, नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा तैयार किए गए गणित के स्नातक पाठ्यक्रम के प्रारूप पर 900 से अधिक गणितज्ञों और शोधकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस मसौदे को वापस लेने की मांग की है, क्योंकि उनका मानना है कि यह कई गंभीर कमियों से ग्रस्त है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस पाठ्यक्रम को लागू किया गया, तो यह कई पीढ़ियों के छात्रों के शैक्षिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है। पिछले महीने यूजीसी ने गणित सहित नौ विषयों के लिए स्नातक पाठ्यक्रमों का मसौदा सार्वजनिक किया था और इस पर लोगों से राय मांगी थी। यूजीसी अध्यक्ष को सौंपे गए एक ज्ञापन में विशेषज्ञों ने दावा किया है कि मसौदे में बीजगणित, वास्तविक विश्लेषण और व्यावहारिक गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि बीजगणित के पाठ्यक्रम में भारी कटौती की गई है, जबकि स्नातक स्तर पर इस विषय के कम से कम तीन अनिवार्य कोर्स होने चाहिए। इसके अलावा, प्रोग्रामिंग, संख्यात्मक विधियां और सांख्यिकी जैसे व्यावहारिक और आधुनिक विषयों को या तो पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है या फिर उन्हें बिना किसी व्यावहारिक प्रशिक्षण के सतही ढंग से पढ़ाने का प्रस्ताव है।
विशेषज्ञों ने बताया कि सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विषय को मात्र एक पाठ्यक्रम में समेट दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सांख्यिकी, मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक और अनुप्रयोग-आधारित शिक्षा को शामिल करना आज के समय की मांग है, लेकिन मसौदे में इस अवसर को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। मसौदा पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत लर्निंग आउटकम-बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क (एलओसीएफ) के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें भारतीय गणितीय परंपराओं पर विशेष जोर दिया गया है। मसौदे के अनुसार, छात्रों को भारतीय बीजगणित का इतिहास, परावर्त्य योजनयेत सूत्र (वैदिक गणित की एक पारंपरिक तकनीक, जिसका अर्थ है “स्थानांतरित करो और लागू करो”) के माध्यम से बहुपदों का विभाजन और कला गणपना (भारतीय पारंपरिक समय गणना) जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पाठ्यक्रम में पंचांग (भारतीय कैलेंडर) और इसके द्वारा महूर्त (शुभ समय) निर्धारण की प्रक्रिया, प्राचीन वेधशालाओं, उज्जैन के प्रधान मध्यान्ह रेखांश और वैदिक समय इकाइयों (जैसे घटी और विघटी) की आधुनिक समय प्रणालियों जैसे ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) और भारतीय मानक समय (आईएसटी) से तुलना जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस तरह के मसौदे को लागू करने से गणित की शिक्षा का स्तर प्रभावित हो सकता है और छात्रों को आधुनिक और व्यावहारिक ज्ञान से वंचित होना पड़ सकता है।


