एजेंसी, तेहरान। पश्चिमी देशों और अमेरिका के साथ जारी टकराव के बीच ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर अब तक का सबसे भीषण हमला बोलकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस हमले के बाद खाड़ी देशों में युद्ध की लपटें और तेज होने की आशंका बढ़ गई है। ईरान ने पहले ही आगाह किया था कि यदि अमेरिका उसकी घेराबंदी के लिए पड़ोसी मुल्कों की जमीन का इस्तेमाल करेगा, तो वह उन्हें भी निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ती तल्खी के बीच ईरान की यह कार्रवाई क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही है।
मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात से दहला आसमान
यूएई के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ईरान की ओर से अब तक कुल 238 बैलिस्टिक मिसाइलें, 1,422 आत्मघाती ड्रोन और 8 क्रूज मिसाइलें दागी गई हैं। हालांकि, यूएई की रक्षा प्रणाली ने मुस्तैदी दिखाते हुए इनमें से 1,342 खतरों को हवा में ही नाकाम कर दिया, लेकिन करीब 80 ड्रोन देश की सीमा के भीतर गिरने में सफल रहे। रविवार को भी 17 बैलिस्टिक मिसाइलों और 117 ड्रोनों के जरिए हमला किया गया, जिनमें से अधिकांश को इंटरसेप्ट कर लिया गया।
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विदेशी नागरिकों की मौत और सैकड़ों घायल
इस भयावह गोलाबारी में चार लोगों की जान चली गई है, जो पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के रहने वाले थे। हमले में घायल होने वाले 112 लोगों में भारत समेत मिस्र, सूडान, श्रीलंका और फिलीपींस जैसे कई देशों के नागरिक शामिल हैं। यूएई सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी सेना पूरी तरह से तैयार है और देश की अखंडता व सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
ईरान का दावा: अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को बनाया निशाना
दूसरी ओर, ईरान की सेना (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उनके निशाने पर इजरायल के तेल अवीव और बेर्शेबा जैसे शहरों में स्थित सैन्य ठिकाने थे। ईरान का कहना है कि उन्होंने जॉर्डन में स्थित अमेरिका के सबसे सक्रिय एयरबेस ‘मुवाफ्फक अल-सल्ती’ पर भी कई प्रहार किए हैं। ईरान के मुताबिक, इसी बेस से अमेरिकी लड़ाकू विमान अक्सर उनके खिलाफ अभियानों को अंजाम देते हैं। इस जवाबी हमले के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।


