
मध्य प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट संपन्न होने को जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इससे उन विपक्षी राजनेताओं के मुंह पर ताले लगने लगे हैं, जो इस कार्यक्रम को महज खाना पूर्ति, दिखावटी और खर्चीला बताकर लगातार आलोचना कर रहे थे। विपक्ष लगातार दावे कर रहा था कि इस तरह के आयोजन केवल दिखावे के लिए होते हैं तथा कागजी खाना पूर्ति के बाद अपनी मौत मर जाते हैं। परिणाम सकारात्मक नहीं आने पर यह खर्चा विभिन्न करों के रूप में मध्य प्रदेश की जनता के सिर पर लाद दिया जाता है। लेकिन इसके ठीक विपरीत अवस्था को देखें तो वाकई में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट सफल दिखाई देने लगी है और धरातल पर उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलाने लगे हैं। फिलहाल बात करेंगे सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र की। ज्ञात ही है कि यह इलाका मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का विधानसभा क्षेत्र रहा है। इससे उन कानाफूसी की चर्चाओं पर भी विराम लग गया है, जिन्हें लेकर दावे किए जा रहे थे कि मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के बीच खेमे बंदी चल रही है। लेकिन अभी जब डॉक्टर मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और एक महत्वपूर्ण ओ एम यू बुधनी में संपादित हो रहा है, तो इसे दोनों नेताओं के बीच सामंजस्य के रूप में देखा जा रहा है। यह बताना उचित रहेगा की बुधनी में बड़े पैमाने पर लकड़ी के खिलौने बनाए जाते हैं। इनमें प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। फल स्वरुप इन खिलौनों से खेलने वाले बच्चों को प्लास्टिक जैसे हानिकारक तत्वों से तो छुटकारा मिलता ही है, घातक रसायनों से भी निर्णायक दूरी बनी रहती है। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह खिलौने बुधनी में घर-घर बनाए जाते हैं। एक प्रकार से देखा जाए तो लकड़ी के खिलौने वहां का कुटीर उद्योग है। अब इन खिलौनों को लेकर विदेशी व्यापारियों ने वहां के कारीगरों से एक एग्रीमेंट संपादित किया है। इसके तहत बुधनी के घरों में बनने वाले इको फ्रेंडली लकड़ी के खिलौने बनाने वालों से खरीद कर इकट्ठे किए जाएंगे। फिर उन्हें आकर्षक पैकिंग में तैयार करके विदेश की ओर भेजा जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि इस निर्यात से बुधनी के खिलौना निर्माताओं की आर्थिक स्थिति बेहतरीन होने वाली है । साथ में यह उम्मीद भी दिख रही है कि अनुकूल माहौल के चलते बुधनी में लकड़ी के खिलौने का कारोबार नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकता है। फिलहाल जानकारी मिली है की संयुक्त अरब अमीरात और जर्मनी जैसे देश इन खिलौनों को आयात करने में रुचि दिखा रहे हैं । उनके व्यापारिक प्रतिनिधि भारत आ चुके हैं और उन्होंने बुधनी के खिलौना निर्माताओं से संपर्क किया है। इनके निर्यात को लेकर रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं। इनके अलावा कुछ देश और संस्थाएं ऐसे हैं जो भारत सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की अवधारणा को और अधिक मजबूती प्रदान करते हुए उसे जमीन में स्तर पर सफल बनाने का काम करने जा रहे हैं। इनमें रूस का कुलियानोट्स क्षेत्र, सिंगापुर की इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज, इंडो जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडो पोलिस चैंबर आफ कमर्स एंड इंडस्ट्रीज, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स कोरिया, जर्मनी इंडिया इन्नोवेशन सेंटर और भारत जिबूती चेंबर ऑफ कॉमर्स, ऐसी संस्थाएं हैं जो एक जिला एक उत्पाद के तहत काम करने की इच्छुक हैं और वहां के उत्पादों को बाहरी देशों में निर्यात करने में सहायता करने जा रहे हैं। क्योंकि अभी तक मध्य प्रदेश के एक जिला एक उत्पाद और जीआई टैग हासिल करने वाले उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति चैन में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने 6 विदेशी संस्थाओं के साथ एमओयू किए हैं। इससे मेक इन एमपी को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ब्रांड बनाने में मदद मिलेगी। लिखने का आशय यह है कि अभी तक जितनी भी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट संपन्न हुई हैं, इनमें बड़े-बड़े उद्योग कारखानों को मध्य प्रदेश में स्थापित करने के दावे किए जाते रहे हैं। यह और बात है कि उन्हें जमीनी स्तर पर देखना कम ही नसीब हो पाया है। लेकिन वर्तमान में अच्छी खबर यह है कि जिन्हें वास्तव में आर्थिक और शासकीय संरक्षण की आवश्यकता है, उन छोटे-छोटे कारीगरों, उत्पादकों की तरक्की के द्वार खुल रहे हैं। बड़े-बड़े विदेशी व्यापारियों और स्थानीय उत्पादकों के बीच प्रशासन महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा रहा है। इस तरह के कार्यक्रम आम आदमी को आर्थिक और सामाजिक मजबूती प्रदान करेंगे। इससे बेरोजगारी तो घटेगी ही, साथ में सरकार को उन योजनाओं को लागू करने के लिए बाध्य नहीं होना पड़ेगा जो मुफ्त की रेहड़ियों वाली छवि अख्तियार कर चुकी हैं।


