एजेंसी, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट संकट और युद्ध की स्थितियों पर विचार-विमर्श करने के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक आमंत्रित की है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह बैठक बुधवार शाम पांच बजे आयोजित की जाएगी। कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दल लगातार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत की अर्थव्यवस्था व सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण और चर्चा की मांग कर रहे थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में इस विषय पर बोलते हुए स्पष्ट किया था कि पश्चिम एशिया के इस टकराव से उत्पन्न हुआ अप्रत्याशित संकट लंबे समय तक प्रभावी रह सकता है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए हर स्तर पर तैयार है। प्रधानमंत्री ने इस वैश्विक संकट की तुलना कोरोना काल की चुनौतियों से करते हुए कहा कि देशवासियों को इस कठिन समय का सामना उसी एकजुटता और संकल्प के साथ करना होगा जैसे महामारी के दौरान किया गया था।
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प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में पैदा हो रही बाधाओं और कमर्शियल जहाजों पर किए जा रहे हमलों को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस जटिल समस्या का स्थायी समाधान केवल कूटनीतिक रास्तों और आपसी बातचीत के जरिए ही संभव है। भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव को कम करने और इस सैन्य संघर्ष को समाप्त करवाने की दिशा में अपने हरसंभव प्रयास जारी रखे हुए है।


