एजेंसी, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को नागरिकों से वाराणसी में आयोजित होने वाले काशी-तमिल संगमम में भाग लेने और तमिल भाषा सीखने के अवसर का लाभ उठाने का आग्रह किया। मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात’ संबोधन में कहा कि काशी-तमिल संगमम का चौथा संस्करण दो दिसंबर को वाराणसी के नमो घाट पर शुरू होगा। मोदी ने कहा, ‘‘इस बार के काशी-तमिल संगमम का विषय बहुत ही रोचक है :तमिल सीखें – तमिल करकलम।’’ उन्होंने इस आयोजन को विश्व की सबसे प्राचीन भाषा और विश्व के सबसे प्राचीन शहरों में से एक का संगम बताया। मोदी ने कहा कि काशी-तमिल संगमम उन सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है जिन्हें तमिल भाषा से लगाव है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘काशी के लोगों से जब भी बात होती है तो वो हमेशा बताते हैं कि काशी-तमिल संगमम का हिस्सा बनना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। यहां उन्हें कुछ नया सीखने और नए-नए लोगों से मिलने का अवसर मिलता है।’’ उन्होंने कहा कि इस बार भी काशीवासी पूरे जोश और उत्साह के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई-बहनों का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा आप सभी से आग्रह है कि आप काशी-तमिल संगमम का हिस्सा जरूर बनें। इसके साथ ही ऐसे और भी मंचों के बारे में सोचें, जिनसे ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना मजबूत हो।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि पुडुचेरी और मालाबार तट के लोग नौसैनिक पोत आईएनएस माहे के नाम से ही खुश हो गए। उन्होंने कहा कि दरअसल, इसका ‘माहे’ नाम उस स्थान माहे के नाम पर रखा गया है, जिसकी एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत रही है। उन्होंने कहा, ‘‘केरल और तमिलनाडु के कई लोगों ने इस बात पर गौर किया कि इस युद्धपोत का प्रतीक-चिह्न उरुमी और कलारिपयट्टू की पारंपरिक लचीली तलवार की तरह दिखाई पड़ता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ये हम सबके लिए गर्व की बात है कि हमारी नौसेना बहुत ही तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही है।’’ प्रधानमंत्री ने जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए दक्षिण अफ्रीका की अपनी हालिया यात्रा को भी याद किया और कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना विश्व नेताओं को उनके द्वारा दिए गए उपहारों में परिलक्षित हुई। उन्होंने कहा, ‘‘जी-20 के दौरान, मैंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को नटराज की कांस्य प्रतिमा भेंट की। ये तमिलनाडु के तंजावुर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी चोल कालीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कनाडा के प्रधानमंत्री को चांदी के अश्व की प्रतिकृति दी गई। यह राजस्थान के उदयपुर की बेहतरीन शिल्पकला को दर्शाती है। जापान के प्रधानमंत्री को चांदी की बुद्ध की प्रतिकृति भेंट की गई। इसमें तेलंगाना और करीमनगर की प्रसिद्ध चांदी की कलाकृतियों की बारीकी का पता चलता है। इटली की प्रधानमंत्री को फूलों की आकृतियों वाला चांदी का आईना उपहार में दिया। ये भी करीमनगर की ही पारंपरिक धातु शिल्पकला को प्रदर्शित करता है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को मैंने पीतल उरली भेंट की, ये केरल के मन्नार का एक उत्कृष्ट शिल्प है। मेरा उद्देश्य था कि दुनिया भारतीय शिल्प, कला और परंपरा के बारे में जानें। हमारे कारीगरों की प्रतिभा को वैश्विक मंच मिले।’’ दुनिया के सबसे लोकप्रिय रेडियो शो में शुमार ‘मन की बात’ अब हिंदी-अंग्रेजी से कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मराठी जैसी 22 भारतीय भाषाओं के अलावा 29 आदिवासी बोलियों में भी सुनाई देती है। विदेशी भाषाओं में फ्रेंच, चीनी, अरबी, फारसी, स्वाहिली, पश्तो, दारी, बलूची, बर्मी, तिब्बती और इंडोनेशियाई शामिल हैं – यानी हिंदुस्तान की बात अब पूरी दुनिया सुन रही है!
पिछले एपिसोड में क्या खास था?
26 अक्टूबर को आए 127वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने छठ महापर्व की बधाई दी थी, संस्कृत को जिंदा रखने वाले युवाओं की तारीफ की थी और भारतीय कॉफी को वैश्विक पहचान मिलने पर खुशी जताई थी। ‘जीएसटी बचत उत्सव’ का जश्न मनाया था और स्वच्छता के नए हीरो गिनाए थे –
– छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर का अनोखा ‘गार्बेज कैफे’ जहां प्लास्टिक कचरा देकर मुफ्त खाना मिलता है
– बेंगलुरु में इंजीनियर कपिल शर्मा की टीम ने मरी हुई झीलों को दोबारा जिंदा कर दिखाया
‘लगन हो तो मंगल भी दूर नहीं…,’ मन की बात में प्रधानमंत्री का युवाओं को सलाम, कहा- जीएन-जेड हैं विकसित भारत का इंजन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को युवाओं की लगन को विकसित भारत की बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि यदि मन में लगन हो, सामूहिक शक्ति पर टीम की तरह काम करने पर विश्वास हो, गिरकर फिर से उठ खड़े होने का साहस हो, तो कठिन-से-कठिन काम में भी सफलता जरूर मिलती है। पीएम मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें विभिन्न टीमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित ड्रोन प्रतियोगिता में मंगल जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ानें का प्रयास कर रही थीं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिना सैटेलाइट और जीपीएस सिस्टम के नाविक समंदर की लहरों का सामना करते हुए तय स्थान पर पहुंच जाते थे। अब समंदर से आगे बढ़कर दुनिया के देश अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाई को नाप रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में जब नयी पीढ़ी के युवाओं की टीमें ड्रोन उड़ा रही थीं तो ड्रोन उड़ते थे, कुछ पल संतुलन में रहते थे, फिर अचानक जमीन पर गिर पड़ते थे। ड्रोन को अपने कैमरे और अपने ही अंदर के सॉफ्टवेयर के सहारे उड़ना था। उसे जमीन के पैटर्न पहचानने थे, ऊंचाई मापनी थी, बाधाएं समझनी थी, और खुद ही सुरक्षित उतरने का रास्ता ढूंढ़ना था। इस प्रतियोगिता में पुणे के युवाओं की एक टीम ने कुछ हद तक सफलता पायी। उनका ड्रोन भी कई बार गिरा, क्रैश हुआ, पर उन्होंने हार नहीं मानी। कई बार के प्रयास के बाद इस टीम का ड्रोन मंगल ग्रह की परिस्थिति में कुछ देर उड़ने में कामयाब रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान-2 के संपर्क से बाहर होने के बाद की क्षणिक निराशा से जिस प्रकार बाहर आकर देश के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी लिखी, कुछ वैसी ही चमक इस वीडियो में उन्हें युवाओं की आंखों में दिखायी दी। श्री मोदी ने कहा, “हर बार जब मैं हमारे युवाओं की लगन और वैज्ञानिकों के समर्पण को देखता हूं, तो मन उत्साह से भर जाता है। युवाओं की यही लगन, विकसित भारत की बहुत बड़ी शक्ति है।”


