एजेंसी, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम के आखिरी दिन गुरुवार को प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। सत्र के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- भाजपा और संघ में कोई विवाद नहीं है। भागवत ने कहा, हमारे भाजपा सरकार ही नहीं सभी सरकारों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन, मनभेद नहीं हैं। सरकार में फैसले लेने के सवाल पर भागवत ने कहा कि यह कहना गलत है कि सरकार में सब कुछ संघ तय करता है। हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन फैसले वे ही लेते हैं। हम तय करते तो इतना समय नहीं लगता।
न रिटायर होऊंगा, न किसी को रिटायर होने के लिए कहूंगा…
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 75 साल में रिटायरमेंट को लेकर बड़ी बात कही। उनसे सवाल किया गया कि क्या 75 साल में राजनीति छोड़ देनी चाहिए? इसके जवाब में मोहन भागवत ने कहा कि 75 साल में रिटायर होने की जरूरत नहीं है, न मैं रिटायर होऊंगा, न किसी को रिटायर होने के लिए कहूंगा। उन्होंने कहा कि हम जब तक चाहें, काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने ये बात मोरोपंत जी के बयान का हवाला देते हुए उनके विचार रखे थे। मैंने ये नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए। हम जिंदगी में किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं और संघ हमसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, हम संघ के लिए उस समय तक काम करने के लिए भी तैयार हैं।
‘हम फैसला नहीं करते, अगर करते तो क्या इतना समय लगता?’ नए बीजेपी प्रमुख के चयन पर बोले भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के आखिरी संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की कोई भूमिका नहीं है. मोहन भागवत ने कहा कि ‘मैं शाखा चलाने में माहिर हूं जबकि बीजेपी सरकार चलाने में माहिर है.’ उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे को सिर्फ सुझाव दे सकते हैं, फैसला करना पार्टी का काम है. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने साफ कर दिया है कि उनका संगठन बीजेपी के लिए सब कुछ तय नहीं करता है. भागवत ने इस धारना को खारिज कर दिया कि आरएसएस संगठन भारतीय जनता पार्टी के लिए ‘सब कुछ’ तय करता है. उन्होंने कहा कि सुझाव पार्टी को दिए जाते हैं, लेकिन फैसले पार्टी ही लेती है. भागवत ने यह भी कहा कि बीजेपी के नए प्रमुख के चयन में आरएसएस की कोई भूमिका नहीं है.
बीजेपी और आरएसएस में मतभेद नहीं- मोहन भागवत
दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के आखिरी दिन सवालों का जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी नीत सरकार के बीच कोई मतभेद नहीं है, चाहे वह केंद्र में हो या पार्टी की ओर से शासित राज्यों में. बता दें जेपी नड्डा फिलहाल बीजेपी के अध्यक्ष हैं साथ ही वह केंद्रीय मंत्री भी हैं. बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर भागवत ने साफ कर दिया “हम फैसला नहीं करते. अगर हम फैसला कर रहे होते, तो क्या इसमें इतना समय लगता? हम फैसला नहीं करते. हमें फैसला करने की ज़रूरत नहीं है. अपना समय लीजिए. हमें इस बारे में कुछ कहने की जरूरत नहीं है.”
हम सुझाव दे सकते हैं, फैसला उन्हें लेना है- भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस के लिए भाजपा के बारे में फैसला लेना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास अपने मामलों को संभालने के लिए अपनी विशेषज्ञता है, जैसे आरएसएस के पास अपनी शाखाएं चलाने के लिए है. उन्होंने यह भी कहा, “मैं पिछले 50 सालों से शाखाएं संचालित कर रहा हूं. अगर कोई मुझे शाखा संचालित करने की सलाह देता है, तो मैं उसका विशेषज्ञ हूं. वे कई वर्षों से सरकार चला रहे हैं. इसलिए वे सरकार मामलों के विशेषज्ञ हैं. हम एक-दूसरे की विशेषज्ञता जानते हैं.” भागवत ने साफ कर दिया कि सुझाव दिए जा सकते हैं लेकिन फैसला उन्हें ही लेना होगा क्योंकि यह उनका क्षेत्र है.


