एजेंसी, काठमांडू। नेपाल की राजनीति में भूचाल आ चुका है। जेन-जेड़ आंदोलन के बीच पीएम और राष्ट्रपति इस्तीफा देकर कुर्सी छोड़ चुके हैं। ऐसे में सवाल ये उठा रहा है कि आखिर सत्ता कौन संभालेगा। इस पर एक नए चेहरे का नाम सामने आया है। वो नया चेहरा सुशीला कार्की हैं। बताया जा रहा है कि Gen-Z आंदोलनकारियों ने वर्चुअल बैठक बुलाई। इस ऑनलाइन सभा में 5,000 से ज्यादा युवाओं ने हिस्सा लिया और सबसे ज़्यादा समर्थन पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को मिला है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सुशीला कार्की को नेपाल का अंतरिम पीएम बनाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में कहा गया कि कोई भी युवा जो राजनीतिक दलों से जुड़ा है, उसे नेतृत्व का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। मकसद था इस आंदोलन को पूरी तरह निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक बनाए रखना है। सुशीला कार्की इस समय किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं। एक सिविक एक्टिविस्ट और पूर्व जज होने के कारण वे इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त मानी गईं हैं।
जानिए कौन हैं सुशीला कार्की
श्रीमती सुशीला कार्की जन्म 7 जून 1952, विराटनगर, नेपाल में हुआ है। उन्होंने वर्ष 1974 में बीएचयू से पोलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की थी। वह नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं और इस पद पर आसीन होने वाली एकमात्र महिला हैं। कार्की 11 जुलाई 2016 को मुख्य न्यायाधीश बनीं थीं। कार्की के शैक्षिक ही नहीं, पारिवारिक जीवन में भी काशी काफी गहराई से जुड़़ा है। काशी में ही पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुई थी, जिनसे उन्होंने बाद में विवाह किया। कार्की अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी संतान हैं। वह विराटनगर के कार्की परिवार से ताल्लुक रखती हैं। नेपाल में उनकी छवि भ्रष्टाचार विरोधी कड़े रुख के तौर पर जानी जाती है।
सत्ता से सीधी टक्कर लेने वाली शख्सियत
कार्की के कार्यकाल में बड़े फैसले हुए. लेकिन 2017 में उन पर माओवादी सेंटर और नेपाली कांग्रेस ने महाभियोग प्रस्ताव लाए थे। इस कदम का देशभर में विरोध हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने भी संसद को रोकने का आदेश दिया और आखिरकार प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था। इस प्रकरण ने कार्की को एक ऐसी शख्सियत बना दिया जो दबाव के बावजूद डटी रहीं।


