सम्राट चौधरी

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव, सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल का विस्तार, नीतीश कुमार के बेटे निशांत समेत 31 नेताओं ने संभाली जिम्मेदारी

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एजेंसी, पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव : बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार बृहस्पतिवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में किया गया। इस दौरान जनता दल यूनाइटेड के प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सहित कुल 31 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नई सरकार के गठन के बाद यह पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस विस्तार के जरिए बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। खास बात यह रही कि समारोह को बेहद भव्य बनाया गया और इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा और राजग के कई बड़े नेता मौजूद रहे।

गांधी मैदान बना राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र

पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक बार फिर बड़े राजनीतिक आयोजन का गवाह बना। मंत्रिमंडल विस्तार समारोह में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे। समारोह स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहुंचने से पहले ही पूरे इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई थी। प्रधानमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान लोगों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। सड़क किनारे खड़े समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की और पूरे माहौल में उत्साह देखने को मिला।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा इस कार्यक्रम को केवल सरकारी आयोजन नहीं बल्कि बिहार में अपने नेतृत्व वाली सरकार के शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देख रही है।

पहली बार भाजपा नेतृत्व में सरकार का विस्तार

बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय बाद राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनी है। पिछले महीने नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सत्ता का नेतृत्व भाजपा के हाथों में आया था।

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला अवसर है जब मंत्रिपरिषद का बड़े स्तर पर विस्तार किया गया। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह नई राजनीतिक शुरुआत का संकेत है।

भाजपा कार्यकर्ताओं में इसको लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया। कई नेताओं ने इसे बिहार की राजनीति में “नए युग की शुरुआत” बताया।

निशांत कुमार के राजनीति में आने से बढ़ी चर्चा

मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने की रही। लंबे समय से राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार का सरकार में शामिल होना बिहार की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में इसे जदयू और भाजपा के बीच नए समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में निशांत कुमार को बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका दी जा सकती है।

समारोह में जब निशांत कुमार ने मंत्री पद की शपथ ली तो वहां मौजूद समर्थकों ने जोरदार तालियां बजाईं।

सामाजिक और जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान

मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक संतुलन बनाए रखने की स्पष्ट कोशिश दिखाई दी। विभिन्न जातीय और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने व्यापक संदेश देने का प्रयास किया है।

नए मंत्रियों में सबसे अधिक नौ मंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग से शामिल किए गए हैं। इसके अलावा सात मंत्री अन्य पिछड़ा वर्ग से बनाए गए हैं। दलित समाज से सात नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय से भी एक नेता को मंत्री बनाया गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह संतुलन तैयार किया गया है ताकि सभी वर्गों को साधा जा सके।

सहयोगी दलों को भी मिला प्रतिनिधित्व

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में पर्याप्त स्थान दिया गया है। लोक जनशक्ति पार्टी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेताओं को मंत्री बनाकर गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

चिराग पासवान की पार्टी से एक राजपूत और एक दलित नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। वहीं उपेंद्र कुशवाहा के दल से एक पिछड़ा वर्ग के नेता को मौका मिला है।

जीतन राम मांझी की पार्टी से भी एक दलित नेता को मंत्री बनाया गया है। इससे साफ संकेत मिला है कि भाजपा गठबंधन अपने सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रहा है।

तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवार से मंत्री बने नेता

नई मंत्रिपरिषद की एक और खास बात यह रही कि इसमें ऐसे तीन नेता शामिल किए गए हैं जिनके पिता बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

संतोष कुमार सुमन के पिता जीतन राम मांझी राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। वहीं नीतीश मिश्रा के पिता जगन्नाथ मिश्रा भी बिहार की राजनीति के बड़े नेता और तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

अब इस सूची में निशांत कुमार का नाम भी जुड़ गया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला बिहार की राजनीति में पारिवारिक प्रभाव और राजनीतिक विरासत की निरंतरता को भी दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी ने बढ़ाया महत्व

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने समारोह में शामिल होने के साथ-साथ नए मंत्रियों को शुभकामनाएं भी दीं।

सूत्रों के अनुसार भाजपा इस आयोजन को बिहार में अपनी राजनीतिक मजबूती दिखाने के अवसर के रूप में देख रही थी। पश्चिम बंगाल और असम में हालिया चुनावी सफलता के बाद पार्टी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है।

कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन से जुड़े कई बड़े नेता भी मौजूद रहे।

बिहार में नए राजनीतिक दौर की शुरुआत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल सरकार का विस्तार नहीं बल्कि बिहार की राजनीति में नए दौर की शुरुआत का संकेत है।

सम्राट चौधरी को अब राज्य के नए नेतृत्व चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं भाजपा बिहार में अपने संगठन और जनाधार को और मजबूत करने की तैयारी में जुटी हुई है।

नई सरकार के सामने रोजगार, शिक्षा, कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचा और पलायन जैसे कई बड़े मुद्दे हैं। ऐसे में अब जनता की नजर इस बात पर टिकी होगी कि नई टीम इन चुनौतियों से कैसे निपटती है।

कार्यकर्ताओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

समारोह के दौरान भाजपा और राजग कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। गांधी मैदान के आसपास पार्टी के झंडों और बैनरों से पूरा इलाका सजा हुआ था।

हालांकि लगातार हो रही बारिश और मौसम की खराब स्थिति को लेकर प्रशासन चिंतित था, लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

भाजपा नेताओं का कहना है कि बिहार में यह सरकार विकास, स्थिरता और नए नेतृत्व का प्रतीक बनेगी। वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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