एजेंसी, नई दिल्ली। आज 26 नवंबर, वह गौरवशाली तारीख जब 1949 में संविधान सभा ने भारत के संविधान को औपचारिक रूप से अपनाया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को एक भावपूर्ण पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने संविधान की महत्ता, मौलिक कर्तव्यों की प्रासंगिकता और नए मतदाताओं के लिए इस दिन को उत्सव बनाने की अपील की है।
“एक साधारण चायवाले को प्रधानमंत्री बनाने वाला यही संविधान है”
पत्र में श्री मोदी ने बहुत ही व्यक्तिगत अंदाज में लिखा है कि भारत का संविधान उनके जैसे सामान्य पृष्ठभूमि के व्यक्ति को देश का सर्वोच्च पद तक पहुँचाने की ताकत रखता है। उन्होंने संस्मरण साझा किए – 2014 में पहली बार संसद भवन की सीढ़ियों पर सिर झुकाकर लोकतंत्र के मंदिर को प्रणाम करना और 2019 में सेंट्रल हॉल में संविधान की प्रतिलिपि को माथे से लगाना। उनके शब्दों में, “यह संविधान ही है जिसने मुझे लगातार 24 वर्षों तक जनसेवा का अवसर दिया।”
कर्तव्य पहले, अधिकार अपने आप मिलेंगे
प्रधानमंत्री ने मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51ए) को जीवन का आधार बताया। महात्मा गांधी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब हम निष्ठा और कृतज्ञता के साथ अपने कर्तव्य निभाते हैं, तो अधिकार स्वतः प्राप्त हो जाते हैं।
उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया:
– हर काम को पूरे मन और ईमानदारी से करें
– राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ रहें
– अपना हर कार्य संविधान की भावना को मजबूत करने वाला हो
नए मतदाताओं के लिए खास संदेश – “आज तुम सिर्फ़ छात्र नहीं, देश के नीति-निर्माता हो”
पीएम मोदी ने खास तौर पर पहली बार वोट देने जा रहे युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि हर स्कूल-कॉलेज में 26 नवंबर को 18 वर्ष पूरे कर रहे युवाओं का सम्मान समारोह आयोजित किया जाए। यह दिन उन्हें यह एहसास दिलाए कि अब वे सिर्फ़ छात्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सक्रिय हिस्सेदार हैं। उनके अनुसार, जब युवाओं में यह गर्व और जिम्मेदारी का भाव जगेगा, तो वे जीवनभर लोकतंत्र के प्रति समर्पित रहेंगे – और यही समर्पण भारत को विश्व की सबसे मजबूत लोकतांत्रिक शक्ति बनाएगा।

संवैधानिक कर्तव्य मजबूत लोकतंत्र की नींव…, संविधान दिवस पर बोले प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नागरिकों से अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया और कहा कि ये मजबूत लोकतंत्र की नींव हैं। संविधान दिवस पर नागरिकों को संबोधित पत्र में प्रधानमंत्री ने मताधिकार का प्रयोग करके लोकतंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया और सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज 18 वर्ष की आयु पूरी करके पहली बार मतदाता बनने वालों का सम्मान करते हुए संविधान दिवस मनाएं। मोदी ने महात्मा गांधी के इस विचार को याद किया कि अधिकार कर्तव्यों के निर्वहन से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कर्तव्यों का निर्वहन सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आधार है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नीतियां और आज लिए गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों के जीवन को आकार देंगे। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए वे अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखें। मोदी ने ‘एक्स’ पर एक अलग पोस्ट में लिखा, ‘‘हमारा संविधान मानवीय गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व देता है। यह हमें अधिकारों से सशक्त बनाता है, साथ ही हमें नागरिक के रूप में हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है, जिन्हें हमें हमेशा पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। ये कर्तव्य एक मजबूत लोकतंत्र की नींव हैं।’’ उन्होंने संविधान निर्माताओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा, ‘‘उनकी दूरदर्शिता हमें विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहती है।’’
मजबूत राष्ट्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है संविधान: शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर बी.आर. आंबेडकर, राजेन्द्र प्रसाद समेत संविधान सभा के सभी सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को मजबूत राष्ट्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए समान अवसर और अधिकार प्रदान करता है। शाह ने ‘एक्स’ पर कहा, “इस संविधान दिवस पर, मैं बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी के साथ-साथ संविधान सभा के सभी महान सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।” शाह ने लिखा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, गरिमापूर्ण जीवन, राष्ट्रीय कर्तव्य और अधिकार प्रदान करता है जिससे मजबूत राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।” शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान दिवस की शुरुआत की और नागरिकों को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अधिक जागरूक करने का काम किया है। ‘संविधान दिवस’ 26 नवंबर, 1949 को भारतीय संविधान को आधिकारिक रूप से अपनाए जाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भारत सरकार ने 2015 में हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की घोषणा की थी।
25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाना देश की सबसे बड़ी उपलब्धी- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि संविधान औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और राष्ट्रवादी सोच अपनाने के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज है। उन्होंने ‘संविधान सदन’ (पुराना संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में आयोजित संविधान दिवस समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि भारत दुनिया के लिए विकास का एक नया मॉडल पेश कर रहा है।
उनका कहना था, ‘‘हमारे संविधान निर्माता चाहते थे कि हमारे व्यक्तिगत, लोकतांत्रिक अधिकार हमेशा सुरक्षित रहें। संविधान औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़ने और राष्ट्रवादी सोच को अपनाने के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाना देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। महिलाएं, युवा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, किसान, मध्यम वर्ग, नया मध्यम वर्ग हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।’’ उनका कहना था कि संविधान दिवस मनाने की परंपरा आरंभ करने की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वो कम है। राष्ट्रपति ने नौ भाषाओं -मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, उड़िया और असमिया में संविधान के डिजिटल संस्करण का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में राष्ट्रपति के नेतृत्व में संविधान की प्रस्तावना का पाठ भी किया गया।
भारत एक है और सदैव एक रहेगा : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे लोगों की उचित आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए संवाद, बहस और चर्चा को अपनाएं। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के योगदान के बिना कोई भी देश ऐसे ही महान नहीं बन सकता। हमें कर्तव्यबोध के साथ अपनी-अपनी भूमिकाएं निभानी होंगी।’’ उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इस दिन हमारे शानदार संविधान के प्रति सबसे बड़ा सम्मान यह है कि हम इसके मूल्यों के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प लें।’’ जन प्रतिनिधियों से आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘चाहे संसद हो या राज्य विधानसभाएं या स्थानीय निकाय, यह हमारा प्रमुख कर्तव्य है कि हम लोगों की उचित आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए संवाद, बहस और चर्चा को अपनाएं।’’ उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमारे संविधान निर्माताओं की इसी भावना के अनुरूप हमें अब इस अमृत काल में विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य में हम सभी को जीवन के कई क्षेत्रों में सुधारों की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा कि चुनावी सुधार, न्यायिक सुधार और वित्तीय सुधार बहुत महत्वपूर्ण हैं। राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि जीएसटी के रूप में ‘एक राष्ट्र-एक कर’ प्रणाली ने व्यापार करने में आसानी के अलावा लोगों की समृद्धि में भी वृद्धि की है। उन्होंने कहा, ‘‘इसने रातोंरात देश की जटिल बहु-कर प्रणालियों और सभी कमियों को हटाने का मार्ग प्रशस्त किया। इससे यह साबित हुआ कि सरकार को आम आदमी पर पूरा भरोसा है।’’ उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि संविधान सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के आर्थिक सशक्तीकरण के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
योगी ने प्रदेशवासियों को दी संविधान दिवस की शुभकामनाएं
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि न्याय, समता और बंधुता भारत के संविधान की मूल भावना हैं। इसे बनाये रखना सबकी ज़िम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ” संविधान दिवस की प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। न्याय, समता और बंधुता भारत के संविधान की मूल भावना हैं।” उन्होंने कहा है कि भारत रत्न बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की अद्भुत दृष्टि, प्रखर विचार और अथक परिश्रम से निर्मित हमारा संविधान विश्व के सबसे सशक्त लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा है कि संविधान, राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति का आधार होने के साथ ही हर नागरिक को समान अधिकार, सम्मान और अवसर भी प्रदान करता है। ग़ौरतलब है कि भारत में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस (या राष्ट्रीय कानून दिवस) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन 1949 में संविधान सभा द्वारा देश के संविधान को औपचारिक रूप से अपनाए जाने की याद दिलाता है, जिसे बनाने में दो वर्ष, 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। संविधान हमारे देश का सर्वोच्च कानून है जो भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है और सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता तथा समानता की गारंटी देता है। श्री योगी ने कहा कि संविधान दिवस का मुख्य उद्देश्य नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाना है, साथ ही संविधान के मुख्य वास्तुकार डॉ. बी.आर. अंबेडकर के महान योगदान को याद करना है।
संविधान का पालन हुआ तो देश 2047 तक बन जाएगा विकसित राष्ट्र: बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि यदि संविधान का अक्षरश: पालन किया जाए तो भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार हो सकेगा। संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि लंबे विचार-विमर्श के बाद संविधान निर्माताओं ने 1949 में इसी दिन मुख्य दस्तावेज को अंगीकार किया था, जिससे भारत के लिए एक जीवंत लोकतंत्र बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। बिरला ने इस बात उल्लेख किया कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज है जो प्रत्येक नागरिक की आवश्यकता का ख्याल रखता है और इसमें निहित सिद्धांतों का पालन करना सबका कर्तव्य है। संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर, 1949 को संविधान को अंगीकार किए जाने के उपलक्ष्य में 2015 से हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है।


