नेपाल में हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बीच सत्ता में परिवर्तन., अब आर्मी के कंट्रोल में
एजेंसी, काठमांडू। नेपाल में युवा प्रदर्शनकारियों के उग्र आंदोलन ने सत्ता बदल दी है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है. ओली ने काठमांडू भी छोड़ दिया है. नेपाल की सेना ने पूरे देश का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है. सभी सांसदों से इस्तीफा देने को कहा गया है. आर्मी ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है. हालांकि, हिंसक प्रदर्शन अब भी जारी हैं. प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन से लेकर सुप्रीम कोर्ट, बैंकों और जेलों तक को निशाना बनाया है.
प्रधानमंत्री केपी ओली देश छोड़कर फरार!, प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री और पूर्व पीएम को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
नेपाल में बड़े पैमाने पर हो रहे उग्र प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया,। इसकी पुष्टि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से की गई है। नेपाली मीडिया ने दावा किया है केपी शर्मा ओली के आवास के ऊपर हेलीकॉप्टर को उड़ते देखा गया है, जिससे कयास लगाया जा रहा है कि वह नेपाल छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं, लेकिन अभी इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ सोमवार को कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे।
प्रधानमंत्री के बाद अब नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल का इस्तीफा
नेपाल में पुलिस फायरिंग में आज भी दो युवाओं की मौत की खबर। नेपाल में सभी प्रमुख सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध को हटाया गया। नेपाल में प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह को नेपाल का पीएम बनाने की मांग की। नेपाल में राष्ट्रपति भवन में घुसे प्रदर्शनकारी। नेपाल के राष्ट्रपति भवन में आगजनी। नेपाल के पीएम और मंत्रियों के घर आगजनी। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने स्वीकारा केपी शर्मा ओली का इस्तीफा। प्रधानमंत्री के बाद अब नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल का इस्तीफा।
केपी ओली के इस्तीफे के बाद युवाओं का विजय जुलूस
केपी ओली के इस्तीफे के बाद काठमांडू की सड़कों पर हजारों युवा एकत्र हुए और विजय जुलूस निकाला।
प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन को आग के हवाले किया
काठमांडू में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो उठा और प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में आग लगा दी। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच नेपाली प्रधानमंत्री ने आज दोपहर इस्तीफा दे दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री के घर में आगजनी
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झालनाथ खनाल के घर में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। उनकी पत्नी रबिलक्षमी पेंटर गंभीर रूप से घायल हो गईं। प्रदर्शनकारी कई स्थानों पर उग्र हो गए और उन्होंने आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव किया। पुलिस की कार्रवाई में कल 20 लोगों की मौत हो गई थी और 350 लोग घायल हो गए थे। इससे पहले गृहमंत्री रमेश लेखक ने सोमवार को गोलीबारी की घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसके अलावा तीन और मंत्रियों ने आज पद से इस्तीफा दे दिया था। PM ओली ने आज सुबह घोषणा की थी कि शाम को सर्वदलीय बैठक बुलाई जायेगी। प्रदर्शनकारी PM ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर आज सड़कों पर उतर आये थे। इसके बाद श्री ओली ने इस्तीफा दे दिया। प्रदर्शन का सिलसिला आज भी जारी है और बड़ी संख्या में लोग संसद भवन में घुस गए और आगजनी की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के निजी आवासों को भी निशाना बनाया और आगजनी की।
पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री की पत्नी की जिंदा जलकर मौत, उपद्रवियों ने फूंका था घर
नेपाल में उपद्रवियों ने पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनल के घर में आग लगा दी। इस घटना में पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी की जलकर मौत हो गई। नेपाल में विरोध प्रदर्शन की आग लगातार बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद भी उपद्रवियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने झलनाथ खनल के घर में आग लगा दी थी। इस घटना में खनल की पत्नी, राजलक्ष्मी की जिंदा जलकर मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक यह घटना काठमांडू के दल्लू इलाके में हुई। इसी इलाके में पूर्व प्रधानमंत्री का घर है। उपद्रवियों द्वारा लगाई गई आग में बुरी तरह से झुलसी राजलक्ष्मी को कीर्तिपुर बर्न अस्पताल ले जाया गया। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक यहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति कार्यालय फूंका
महाराजगंज में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति कार्यालय भवन शीतल निवास में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। Gen-Z के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन, प्रदर्शनकारियों ने नेताओं, पार्टी कार्यालयों और प्रमुख प्रशासनिक केंद्रों को निशाना बनाया।
राष्ट्रपति समेत कई मंत्रियों के घरों में आगजनी
नेपाल में जारी तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाओं के बीच मंगलवार को प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के बोहोराटार स्थित आवास में जबरन घुस गये और वहां जमकर तोड़फोड़ की। स्थानीय मीडिया ने कहा है कि देश के अन्य बड़े नेताओं के घरों पर भी प्रदर्शनकारियों द्वारा हमले किये गये हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के खुमालतार स्थित आवास पर भी पथराव किया है। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने उपप्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री बिष्णु पौडेल के भैसपति स्थित आवास पर भी पथराव किया। ललितपुर में प्रदर्शनकारियों ने संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के घर में आग लगा दी। सोमवार को पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक के घर पर भी हमला किया गया। प्रदर्शनकारी पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के बुधनीलकांठा स्थित आवास तक पहुँचे लेकिन हमला करने से पहले ही उन्हें रोक दिया गया। नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर बिस्वो पौडेल के भैसपति स्थित आवास पर भी पथराव किया गया।
प्रधानमंत्री ओली ने सर्वदलीय आपात बैठक बुलाई
नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने आज शाम 6 बजे सभी राजनीतिक दलों की एक आपात बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा, “मैं मौजूदा परिस्थितियों का जायजा लेने और प्रभावी समाधान तलाशने के लिए सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर रहा हूं। इसी क्रम में आज शाम 6 बजे सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई है। मैं सभी नागरिकों से इस चुनौतीपूर्ण समय में शांति और संयम बनाए रखने की अपील करता हूं।”
पीएम ओली ने उप-प्रधानमंत्री को सौंपी देश कि जिम्मेदारी
नेपाल में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री ओली ने देश की जिम्मेदारी उप-प्रधानमंत्री को सौंप दी है। युवा वर्ग, खासकर जनरेशन-जेड, ओली सरकार को हटाने की मांग पर अडिग है। उनकी मांग है कि नेपाल में एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाए। ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि पीएम ओली देश छोड़कर दुबई जा सकते हैं।
नेपाल के कृषि मंत्री ने दिया इस्तीफा
नेपाल के कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्री रामनाथ अधिकारी ने मंगलवार (9 सितंबर) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, नेपाली कांग्रेस के विधायक अधिकारी ने अपने इस्तीफे में लिखा कि सरकार ने सोमवार को जनरेशन-जेड के प्रदर्शनों के दौरान दमनकारी रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों को स्वीकार करने के बजाय, सरकार ने हिंसा, हत्या और बल प्रयोग का सहारा लिया। अधिकारी ने कहा कि ऐसी हिंसक नीतियों के बीच वह सत्ता में नहीं रह सकते, जबकि सरकार को उस युवा पीढ़ी के साथ सहयोग करना चाहिए, जो देश के विकास का आधार है।
गृह मंत्री रमेश लेखक ने दिया इस्तीफा
काठमांडू में प्रदर्शनकारी संघीय संसद परिसर में घुस गये। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर और गेट फांदकर संघीय संसद परिसर में धावा बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने पहले शांतिपूर्ण रहने की बात कही थी, पर मौके पर हालात बिगड़ गये। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया, लेकिन बाद में उनको गोली चला कर प्रदर्शनकारियों को वहां से भगाना पड़ा। देश में बढ़े तनाव के बीच गृह मंत्री रमेश लेखक ने घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये कांग्रेस की बैठक में ही अपना इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया और मीटिंग छोड़ कर चले गये। घायलों में जेनरेशन ज़ेड के प्रदर्शनकारी, सुरक्षाकर्मी और पत्रकार शामिल हैं।
रजिस्ट्रेशन करने पर बंद की सोशल मीडिया साइट्स
नेपाल सरकार ने सभी सोशल मीडिया साइट्स को नेपाल सरकार के अधीन पंजीकरण कराने के लिए सात दिन का वक्त दिया था। बताया जा रहा है कि इस अंतराल में जो कंपनियां पंजीकरण कराने से रह गईं। उनके खिलाफ ही प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि ये फैसला अदालत के एक निर्देश पर लिया गया है। जिसमें सरकार से कहा गया था कि वह ऑन्लाइन प्लेटफॉर्म्स का पंजीकरण कराना सुनिश्चित करे। लेकिन इस प्रतिबंध के बहाने युवाओं का गुस्सा भड़क गया और वे सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
काठमांडू में लगा अनिश्चितकालीन कर्फ्यू… सोशल मीडिया बैन से मचा बवाल, Gen-Z ने किया हिंसक विरोध प्रदर्शन
काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू में अधिकारियों ने पहले के जारी आदेश को हटाए जाने के कुछ ही घंटों बाद, मंगलवार को फिर से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया। काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय ने सुबह साढ़े आठ बजे से अगली सूचना तक पूरे शहर में कर्फ्यू लागू करने का आदेश जारी किया। सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सोमवार को सुरक्षा बलों और युवाओं के समूहों के बीच झड़पें हुई थीं जिनमें 19 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए यह कदम उठाया गया। पूर्व में जारी कर्फ्यू मंगलवार सुबह पांच बजे समाप्त हो गया। काठमांडू के मुख्य जिलाधिकारी छविलाल रिजाल द्वारा जारी नोटिस में कहा गया, ‘‘कर्फ्यू के दौरान लोगों की आवाजाही, किसी भी प्रकार की सभा, विरोध-प्रदर्शन, बैठक और धरने की अनुमति नहीं होगी।’’ नोटिस में कहा गया, ‘‘हालांकि, एंबुलेंस, दमकल की गाड़ियों, स्वास्थ्यकर्मियों को ले जाने वाले वाहनों, पर्यटकों, मीडियाकर्मियों और हवाई यात्रियों को सुरक्षा कर्मियों के साथ समन्वय स्थापित कर आने-जाने की अनुमति दी जाएगी।’’
भक्तपुर जिले के प्रशासन ने भी पेप्सीकोला, राधेराधे चौक, सल्लाघरी, दुवाकोट और चांगुनारायण मंदिर सहित कई इलाकों में मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया। प्रशासन ने काठमांडू से सटे ललितपुर के कुछ हिस्सों में भी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। कर्फ्यू के आदेशों के बावजूद, मंगलवार सुबह कई इलाकों में छात्रों के नेतृत्व में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। काठमांडू के कलंकी और बानेश्वर, तथा ललितपुर जिले के चापागाऊं–थेचो इलाकों से भी प्रदर्शनों की खबरें मिली हैं। प्रदर्शनकारियों में अधिकांश छात्र शामिल थे, जिन्होंने सभा पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ‘‘छात्रों को मत मारो’’ जैसे नारे लगाए। वहां मौजूदा लोगों के अनुसार, कलंकी में प्रदर्शनकारियों ने सुबह टायर जलाकर सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। कर्फ्यू लागू होने से लोग घबरा गए और जरूरी सामान खरीदने के लिए किराने की दुकानों और दवा की दुकानों की ओर दौड़ पड़े। सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप हो गया है और शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए हैं। सरकार ने लोगों के गुस्से को कम करने के लिए सोमवार देर रात सोशल मीडिया मंचों से प्रतिबंध हटा लिया।
नेपाल में हिंसक प्रदर्शन के चलते हजारों भारतीय टूरिस्ट फंसे, होटलों पर पुलिस का पहरा
नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल में इस वक्त हालात काबू से बाहर है। यहां सोमवार को जेन-जी युवाओं ने पूरे देश में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। जो आज मंगलवार को भी जारी है। वहीं इस हिंसक प्रदर्शन के चलते नेपाल में करीब 3500 से 4000 तक भारतीय टूरिस्ट के फंसे होने की खबर सामने आई है। बता दें कि ये विरोध सोशल मीडिया पर बैन लगाने वाले फैसले के चलते हो रहा है। इस वक्त वहां के हालात बेकाबू है। देश के तीन प्रमुख मंत्रियों कृषि, स्वास्थ्य और गृह मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है।
नेपाल करीब 4000 भारतीय टूरिस्ट के फंसे होने की आशंका
नेपाल में जारी हिंसा के बीच करीब 3500 से 4000 तक वहां भारतीय टूरिस्ट के फंसे होने की की खबर सामने आ रही है। ये लोग लुंबिनी, सूपड़ा देवराली, प्रभुनाथ, मुक्तिनाथ, पशुपतिनाथ दर्शन के अलावा पोखरा और काठमांडू घूमने गए थे। नेपाल के हालात खराब होने के बाद किसी भी टूरिस्ट को बाहर निकलने से मना कर दिया गया है।
एयर इंडिया ने काठमांडू की सभी उड़ानें की रद्द, विदेश मंत्रालय की नई एडवाइजरी
नेपाल में बिगड़े हालात के मद्देनजर एयर इंडिया ने काठमांडू के लिए मंगलवार की सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली से काठमांडू के लिए आज चार उड़ानें थीं और सभी को आज रद्द कर दिया गया है। वापसी की भी सभी उड़ानें रद्द रहेंगी। प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि काठमांडू में मौजूदा स्थिति को देखते हुए दिल्ली-काठमांडू-दिल्ली मार्ग की उड़ानें एआई- 2231/2232, एआई 2219/2220, एआई- 217/218 और एआई- 211/212 को आज रद्द कर दिया गया है। बयान में कहा गया है, ”हम स्थिति पर नजदीक से नजर रखे हुये हैं और आगे अपडेट साझा करते रहेंगे। एयर इंडिया में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।” उल्लेखनीय है कि नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन सोमवार को उस समय हिंसक हो गया जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कठोर कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को संसद और कई नेताओं के घरों को आग लगा दी। प्रधानमंत्री के.पी.एस.ओली ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे स्थिति सामान्य होने तक नेपाल की यात्रा से बचें। जो लोग वर्तमान में नेपाल में हैं, उन्हें घर के अंदर रहने, सार्वजनिक स्थानों पर जाने से परहेज करने और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। सहायता के लिए भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर +977–9808602881 और +977–9810326134 जारी किए हैं।
नेपाल के घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा भारत: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘हम नेपाल के घटनाक्रम पर कल से ही करीब से नजर रख रहे हैं और इतने सारे नौजवानों की जान जाने से हमें गहरा दुख हुआ है।’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘हम दिवंगतों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।’’ विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘एक करीबी मित्र और पड़ोसी होने के नाते, हम उम्मीद करते हैं कि सभी पक्ष संयम बरतेंगे और शांतिपूर्ण तरीकों व बातचीत के जरिए किसी भी मुद्दे का समाधान करेंगे।’’ बयान में कहा गया, ‘‘यह भी संज्ञान में आया है कि अधिकारियों ने काठमांडू और नेपाल के कई अन्य शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है। नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें और नेपाली अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों और नियमों का पालन करें।’’
भारत-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ी : हिंसक झड़प को देखते हुए सेना की तैनाती और बढ़ाया गया सर्विलांस
लखनऊ। नेपाल के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। सशस्त्र सीमा बल ने सीमा पर अतिरिक्त टुकड़ियों और सर्विलांस की तैनाती की है। भारत-नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा एसएसबी के जिम्मे है और हालात को देखते हुए निगरानी और भी सख्त कर दी गई है। इस बीच इंटीलिजेंस भी वहां की स्थितियों की टोह ले रहा है। दरअसल, खुफिया एजेंसियों को इनपुट है कि नेपाल में ताजा उग्र आंदोलन के आयोजक सोशल मीडिया का उपयोग रूट और सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा करने के लिए कर रहे हैं ऐसे में भारत में भी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की निगरानी तेज कर दी गई है, किसी भी तरह की अफवाह पर तत्काल अंकुश लगाने के निर्देश हैं। नेपाल के हालातों के मद्देनजर भारत ने सावधानी बरतते हुए अपनी सीमा सुरक्षा और चौकसी को और मज़बूत कर दिया है।
नेपाली गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा, पुलिस से झड़प में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत, 300 से अधिक लोग घायल
काठमांडू। नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में राजधानी काठमांडू और कुछ अन्य इलाकों में सोमवार को युवाओं ने हिंसक प्रदर्शन किया, जिसके दौरान कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने देश में मौजूदा हालात को लेकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालात बिगड़ने के बाद नेपाली सेना को राजधानी काठमांडू में तैनात किया गया। सेना के जवानों ने नए बानेश्वोर में संसद परिसर के आसपास के रास्तों पर नियंत्रण कर लिया है। इससे पहले, काठमांडू में ‘जेन ज़ी’ के बैनर तले स्कूली छात्रों समेत हजारों युवा संसद भवन के सामने इकट्ठा हुए और प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवाओं का प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया जब कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता विनोद घिमिरे ने कहा कि काठमांडू के विभिन्न हिस्सों में रैली के दौरान हिंसक झड़पों में 17 लोगों की मौत हो गई जबकि पूर्वी नेपाल के सुनसरी जिले में पुलिस की गोलीबारी में दो प्रदर्शनकारियों की भी मौत हो गई।
ये प्रदर्शन पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटाहरी और दामक जैसे क्षेत्रों में भी हुए। नेपाली कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि गठबंधन सरकार में नेपाली कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले गृह मंत्री लेखक ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया है। लेखक ने शाम को प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को उनके आवास, बालुवाटर में आयोजित कैबिनेट बैठक में अपना इस्तीफा सौंप दिया। अस्पताल के अधिकारियों के हवाले से ‘काठमांडू पोस्ट’ अखबार ने बताया कि नेशनल ट्रॉमा सेंटर में आठ लोगों की मौत हुई। एवरेस्ट अस्पताल में तीन, सिविल अस्पताल में तीन, काठमांडू मेडिकल कॉलेज में दो और त्रिभुवन टीचिंग अस्पताल में एक व्यक्ति की मौत हुई। द हिमालयन टाइम्स अखबार के अनुसार, सिविल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर सहित कई अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह की कमी है और वे उन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर करना शुरू कर दिया है। हिंसा के बाद, स्थानीय प्रशासन ने राजधानी के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया। काठमांडू के अलावा, ललितपुर जिले, पोखरा, बुटवल और सुनसरी जिले के इटाहरी में भी कर्फ्यू लगा दिया गया।
मुख्य जिला अधिकारी छबि लाल रिजाल ने एक नोटिस में कहा, ‘‘प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों के आवागमन, प्रदर्शन, बैठक, सभा या धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी।’’ स्थानीय प्रशासन ने बाद में ये प्रतिबंधात्मक आदेश राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में भी लागू कर दिए। नेपाल सरकार ने अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर चार सितंबर को फेसबुक, व्हाट्सऐप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध उन्हें विनियमित करने के लिए लगाया गया है, लेकिन आम जनता में धारणा यह है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला होगा और सेंसरशिप की नौबत आ सकती है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश में अपंजीकृत सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगाने के अपने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए रविवार को कहा कि “राष्ट्र को कमजोर किए जाने के प्रयास कभी बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।”


