एजेंसी, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के हालातों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से देश के सामने अपनी बात रखी। लोकसभा में दिए गए अपने 25 मिनट के संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में तनाव खत्म होना चाहिए और किसी भी समस्या का समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्दोष नागरिकों और बिजली संयंत्रों जैसे ऊर्जा ठिकानों पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग को रोकना भारत को मंजूर नहीं होगा।
Speaking in the Lok Sabha. https://t.co/BIrR385m4O
— Narendra Modi (@narendramodi) March 23, 2026
प्रधानमंत्री ने देश को आश्वस्त किया कि सरकार की पूरी कोशिश है कि भारत में तेल और गैस का संकट न पैदा हो। इसके लिए रणनीतिक बदलाव करते हुए अब भारत केवल 27 देशों के बजाय 41 देशों से ईंधन का आयात कर रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं और उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं, जिनमें अकेले ईरान से लौटे एक हजार लोग शामिल हैं, जिनमें 700 से अधिक चिकित्सा क्षेत्र की पढ़ाई करने वाले छात्र हैं।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छह मुख्य बिंदुओं पर विस्तार से बात की :
– तेल और गैस भंडारण: पिछले दस वर्षों में भारत ने कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। वर्तमान में हमारे पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने का कार्य प्रगति पर है। तेल कंपनियां भी अपना अलग स्टॉक रख रही हैं।
– अन्न और राशन की उपलब्धता: पीएम ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त अनाज का भंडार है और आपात स्थिति से निपटने के पूरे इंतजाम हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने के बावजूद भारत के किसानों को यूरिया की बोरी 300 रुपये से भी कम में उपलब्ध कराई गई, जबकि वैश्विक बाजार में इसकी कीमत बहुत अधिक थी।
– भारतीयों की सुरक्षा: संकट के इस समय में भारतीयों को सुरक्षित निकालना सरकार की बड़ी उपलब्धि रही है। बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित वापस लाए जा चुके हैं और बाकी लोगों के लिए भी प्रयास जारी हैं।
– बिजली की निर्बाध आपूर्ति: देश में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है जिससे बिजली की मांग बढ़ेगी। इसके लिए सभी पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। हर सिस्टम की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
– ऊर्जा क्षेत्र की रणनीति: पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। भारत पर युद्ध का असर कम हो, इसके लिए एक विशेष समूह बनाया गया है जो आयात-निर्यात की दिक्कतों पर रोजाना काम करता है।
– कूटनीतिक भूमिका: भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। कमर्शियल जहाजों पर हमले और रुकावट को भारत ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
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प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना काल की तरह इस संकट में भी सरकार किसानों का बोझ अपने ऊपर लेगी और उन पर आंच नहीं आने देगी। उन्होंने बताया कि देश में छह नए यूरिया प्लांट शुरू होने से सालाना 76 लाख टन उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इसके अलावा, डाई अमोनिया फास्फेट (डीएपी) और पोटैशियम (एनपीकेएस) का घरेलू उत्पादन भी 50 लाख टन तक बढ़ाया गया है।
पीएम ने ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता अब 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। सौर ऊर्जा क्षमता पिछले 11 वर्षों में 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है। उन्होंने अंत में आह्वान किया कि देश के हर वर्ग को इस गंभीर समय में चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करना होगा।


