श्री दुर्गा स्तुति का पाठ

नवरात्रि में हर दिन करें श्री दुर्गा स्तुति का पाठ

धर्म-आस्था

नवरात्रि में हर दिन करें श्री दुर्गा स्तुति का पाठ

एजेंसी, नई दिल्ली। सनातन धर्म की मान्यताओं के मुताबिक दुर्गा स्तुति का पाठ करना माता रानी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे प्रभावशाली तरीका है। नवरात्रि महापर्व के दौरान दुर्गा स्तुति पाठ का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह कहा जाता है कि इन दौरान मां दुर्गा का धरती पर आगमन होता है। कहा जाता है कि नवरात्रि में दुर्गा स्तुति का पाठ करने से साधक को तार्किक, गणनात्मक और सूझबूझपूर्ण गुणों की प्राप्ति होती है। जगत जननी मां अंबे की अलौकिक शक्तियों का बखान करने वाली सबसे लोकप्रिय रचना है दुर्गा स्तुति, जो देवी की महिमा का गुणगान करती है। मार्कंडेय पुराण से ली गई इस रचना के नियमित पाठ से मन को शांति मिलती है। यहां पढ़िए संपूर्ण दुर्गा स्तुति।

कब करें दुर्गा स्तुति का पाठ

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन सुबह और शाम दुर्गा स्तुति पढ़ना शुभ होता है। हालांकि, शुक्रवार और मंगलवार के दिन भी इसका पाठ विशेष फलदायी होता है। ऐसा भी कहा जाता है कि संकट के समय या जब मन अशांत हो, तब भी दुर्गा स्तुति का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है।

इस मंत्र से करें दुर्गा स्तुति की शुरुआत

सर्व मंगल मांगल्य शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

श्री दुर्गा स्तुति

जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां ।
उमा रमा गौरी ब्रह्माणी,
जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां ।।

हे महालक्ष्मी हे महामाया,
तुम में सारा जगत समाया ।
तीन रूप तीनों गुण धारिणी,
तीन काल त्रैलोक बिहारिणी ।।

हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के,
सारे काज संवारिणी मां ।
जय जग जननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां

शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी,
चंद्रघंटा कूष्मांडा मां ।
स्कंदमाता कात्यायनी माता,
शरण तुम्हारी सारा जहां।।

कालरात्रि महागौरी तुम हो
सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
जय जग जननी आदि भवानी
जय महिषासुर मारिणी मां

अजा अनादि अनेका एका,
आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या।
नाम रूप गुण कीर्ति अनंता,
गावहिं सदा देव मुनि संता।।

अपने साधक सेवक जन पर,
सुख यश वैभव वारिणी मां ।।
जय जगजननी आदि भवानी,
जय महिषासुर मारिणी मां।।

दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां,
भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां ।
पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी मां,
जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी मां।।

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