दिग्विजय सिंह पर भाई लक्ष्मण ने ही साधा निशाना, बोले- अपनी गलतियों से हारे, अब उठा रहे ईवीएम पर सवाल

गुना प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश

गुना। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी को निशाने पर लिया है। सिंह ने कहा कि भाजपा ने 20 साल पहले उनका (दिग्विजय सिंह) नाम बंटाधार रखा था, जो आज भी चल रहा है। उन्होंने जनता की सेवा की, विकास किया, फिर यह नाम क्यों पड़ा? हालत यह है कि बंटाधार नाम लेने से आज भी बीजेपी को वोट मिल जाते हैं। ऐसा इसलिए कि दलाल उन्हें घेरे हुए हैं। अभी राहुल गांधी की पदयात्रा निकलेगी, जिसमें हम सभी जाएंगे। अब पार्टी को तय करना है कि दलालों की सुननी है या कार्यकर्ताओं की। चांचौड़ा के कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के छोटे भाई पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह ने गणतंत्र दिवस पर शुक्रवार को कांग्रेस के ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद अपनी और कांग्रेस पार्टी की हार को लेकर बड़े भाई दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना ईवीएम पर सवाल उठाने को लेकर उन्हें घेरा और कहा कि हार के लिए मशीन नहीं, गलत निर्णय जिम्मेदार है। यह भितरघातियों व दलालों की हरकत है, जिसके इशारों पर वे ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं।

ईवीएम को दोष देते हैं
जो हमारा सर्वमान्य नेता रहा है, उसका राजनीति ने क्या स्तर बना दिया है। हम ईवीएम को दोष देते हैं, क्या ईवीएम ने कहा था कि सांसद निधि वहां देनी है, जहां कांग्रेस हार जाए। ईवीएम ने कहा था कि इसको सांसद प्रतिनिधि बनाओ, क्योंकि इसने कांग्रेस को हरवाया था। कुछ मशीनें खराब हो सकती हैं, लेकिन सारी मशीन खराब नहीं है। सिंह ने कहा कि राजनीतिक पार्टी और नेताओं को भी स्वयं का आकलन करना आवश्यक है, फिर चाहे वे कितने ही बड़े नेता हों। आज जो कांग्रेस को हरवाता है, उसका सम्मान किया जाता है। वह बड़ा आदमी है और चतुर माना जाता है, क्योंकि दूसरे पक्ष से मिलकर आपको हरवा रहा है, जबकि जो भितरघात करता है, वह सबसे बड़ा गद्दार है। जब हम चांचौड़ा में 35 हजार वोट से हारे थे, उसके बाद कितने संघर्ष के बाद कार्यकर्ताओं ने पार्टी खड़ी की थी।


मध्य प्रदेश में अलग कांग्रेस
: उन्होंने यह भी कहा कि 1885 में 72 लोगों ने मिलकर कांग्रेस पार्टी खड़ी की थी, जिसने देश को आजादी दिलाई। जो भी कांग्रेस पार्टी से हटकर गए हैं, उन्होंने बंगाल, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में सरकार बनाई है। कहीं ऐसी नौबत न आए कि 72 लोग यहां भी इकट्ठे हों और अगली सरकार इस कांग्रेस की बने। यह साहस कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में है। मैं अकेला नहीं हूं, मेरे साथ 900 लोग हैं।

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