एजेंसी, वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को उन यूरोपीय देशों पर तीखा प्रहार किया है जो वर्तमान में विमान ईंधन की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन राष्ट्रों को ईंधन की आवश्यकता है, उन्हें अब स्वयं साहस जुटाकर होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जाना चाहिए और अपनी जरूरतें पूरी करनी चाहिए। अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा किए गए एक कड़े संदेश में ट्रंप ने सुझाव दिया कि इन देशों को प्राथमिकता के आधार पर अमेरिका से ही कच्चा तेल खरीदना चाहिए क्योंकि वहां इसका पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसके साथ ही उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि अमेरिका अब इन देशों की सहायता के लिए आगे नहीं आएगा।
US President Donald Trump posts on Truth Social, “All of those countries that can’t get jet fuel because of the Strait of Hormuz… I have a suggestion for you: Number 1, buy from the US, we have plenty, and Number 2, build up some delayed courage, go to the Strait, and just take… pic.twitter.com/uwzoNFhs8H
— ANI (@ANI) March 31, 2026
ट्रंप ने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से ब्रिटेन जैसे देशों का उल्लेख किया जिन्होंने ईरान के विरुद्ध संघर्ष में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण विमान ईंधन प्राप्त करने में असमर्थ हैं, उनके पास अब सीमित विकल्प हैं। ट्रंप के अनुसार पहला विकल्प यही है कि वे अमेरिका से तेल की खरीदारी करें क्योंकि वहां कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। दूसरा विकल्प यह है कि वे अब थोड़ी हिम्मत का परिचय दें और स्वयं उस कठिन समुद्री मार्ग पर जाकर अपना तेल हासिल करने का प्रयास करें।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ने कड़े लहजे में कहा कि अन्य देशों को अब अपने हितों की रक्षा के लिए स्वयं लड़ना सीखना होगा। उन्होंने नाराजगी जताते हुए साफ कर दिया कि जिस प्रकार उन देशों ने पूर्व में अमेरिका की मदद नहीं की थी, ठीक वैसे ही अब अमेरिका भी उनकी सहायता करने की जिम्मेदारी नहीं उठाएगा। उनके अनुसार, ईरान को नियंत्रित करने का सबसे कठिन कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, इसलिए अब इन देशों को स्वयं आगे बढ़कर अपना तेल प्राप्त कर लेना चाहिए।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के पश्चात ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के सामरिक मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। इस वैश्विक हलचल के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 112 से 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे दुनिया के कई देशों में विमानों में प्रयुक्त होने वाले ईंधन का गहरा संकट पैदा हो गया है और यूरोपीय राष्ट्र इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।


