एजेंसी, ओस्लो। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लाख प्रयास करने के बावजूद उन्हें इस बार यह सम्मान नहीं मिला है। मारिया कोरिना मचाडो नोबेल समिति की पहली पसंद बनी हैं। मारिया कोरिना मचाडो को नोबेल पुरस्कार अपने देश के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए उनके अथक कार्य और तानाशाही से लोकतंत्र में न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण संक्रमण प्राप्त करने के उनके संघर्ष के लिए दिया गया है। नॉर्वे की नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्गन वात्ने फ्रिडनेस ने कहा कि वेनेजुएला में राष्ट्रपति पद की विपक्ष की उम्मीदवार रहीं मारिया कोरिना मचाडो ‘‘कभी गहन तौर पर विभाजित रहे विपक्ष को एकजुट करने वाली प्रमुख शख्सियत हैं। एक ऐसा विपक्ष जिसने स्वतंत्र चुनाव और प्रतिनिधि सरकार की मांग को समान रूप से उठाया।’’ विशेषज्ञों का कहना है कि समिति आमतौर पर दीर्घकालिक शांति, अंतरराष्ट्रीय बंधुत्व को बढ़ावा देने और उन संस्थानों के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करती है जो इन लक्ष्यों को मजबूत करते हैं। नोबेल शांति पुरस्कार एकमात्र पुरस्कार है जो ओस्लो, नॉर्वे में प्रदान किया जाता है। इससे पहले चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में 2025 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा पिछले दिनों स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में की जा चुकी है। अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता का नाम सोमवार को घोषित किया जाएगा। बता दें पिछले साल जापान के ‘निहोन हिडांक्यो’ को दिया गया था। जापान परमाणु और हाइड्रोजन बम पीड़ित संगठनों का परिसंघ को, यह वही संगठन है जो दशकों से दुनिया को यह याद दिलाने में जुटा है कि 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर गिरे बमों की आवाज आज भी गूंजती है।


