टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का बड़ा फैसला, छंटनी के बाद भी कंपनी देगी 6 महीने से 2 साल तक मुफ्त पैसे

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एजेंसी, नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो कर्मचारी कल्याण की मिसाल पेश कर रहा है। कंपनी ने हाल ही में घोषणा की है कि वह अपने लगभग 12,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी, लेकिन इन कर्मचारियों को खाली हाथ नहीं छोड़ेगी। इसके बजाय, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज उन सभी प्रभावित कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सैलरी का आकर्षक सेवरेंस पैकेज देगी।

छंटनी का कारण
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में चल रही यह छंटनी मुख्य रूप से उन कर्मचारियों पर केंद्रित है, जिनकी स्किल्स अब कंपनी की बदलती जरूरतों से मेल नहीं खा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मिड-लेवल और सीनियर स्तर के कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। खासकर वे लोग जो 10-15 साल से कंपनी में हैं, लेकिन AI, क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों में अपडेट नहीं हो पाए।

किन्हें कितना मिलेगा पैसे?
बिना प्रोजेक्ट के 8 महीने से बेंच पर बैठे कर्मचारी: इन्हें नोटिस पीरियड के रूप में केवल 3 महीने का वेतन दिया जाएगा।
10 से 15 साल की सेवा वाले कर्मचारी: इन्हें लगभग 1.5 वर्ष के वेतन के बराबर पैकेज मिलेगा।
15 साल से अधिक सेवा वाले सीनियर कर्मचारी: इन्हें विच्छेद पैकेज के रूप में 1.5 से 2 वर्ष तक का वेतन मिल सकता है।

कर्मचारियों के लिए एक्स्ट्रा सपोर्ट
कंपनी आउटप्लेसमेंट सर्विसेज के तहत कर्मचारियों को तीन महीने तक नई नौकरी खोजने में सहायता के लिए एजेंसी की फीस स्वयं वहन कर रही है। इसके अलावा, टीसीएस केयर्स प्रोग्राम के माध्यम से कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए थेरेपिस्ट और काउंसलिंग सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। रिटायरमेंट की आयु के नजदीक पहुंच चुके कर्मचारियों के लिए अर्ली रिटायरमेंट विकल्प उपलब्ध है, जिसमें सभी लाभों के साथ अतिरिक्त 6 महीने से 2 वर्ष तक का वेतन भी शामिल है।

कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला
यह फैसला टाटा ग्रुप के संस्थापक रतन टाटा की विरासत को याद दिलाता है, जहां कर्मचारियों की भलाई हमेशा प्राथमिकता रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम छंटनी को मजबूरी मानते हैं, लेकिन कर्मचारियों को नई शुरुआत के लिए मजबूत आधार देना हमारा फर्ज है।”

आईटी सेक्टर में नया ट्रेंड?
भारतीय आईटी इंडस्ट्री पहले ही ग्लोबल इकोनॉमिक चैलेंजेस से जूझ रही है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के इस कदम से अन्य कंपनियां जैसे इन्फोसिस, विप्रो भी प्रेरित हो सकती हैं। हालांकि, कर्मचारी यूनियन्स का कहना है कि स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स पर अधिक फोकस जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी छंटनियां कम हों।

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