बटुक भैरव जयंती

ज्येष्ठ दशमी पर बटुक भैरव जयंती का पावन संयोग, सुख-समृद्धि के लिए जानें पूरा पंचांग

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ज्येष्ठ दशमी पर बटुक भैरव जयंती का पावन संयोग, सुख-समृद्धि के लिए जानें पूरा पंचांग

एजेंसी, नई दिल्ली। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इस बार बेहद खास संयोग बन रहा है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव के सात्विक अवतार माने जाने वाले श्री बटुक भैरव की जयंती मनाई जाएगी। चौबीस जून को पड़ने वाले इस विशेष बुधवार के दिन कई प्रकार के शुभ और अशुभ मुहूर्त बन रहे हैं जिनका मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार दशमी तिथि इस दिन शाम को छह बजकर तेरह मिनट तक रहने वाली है जिसके पश्चात अगली तिथि का आगमन होगा। सुबह के समय दस बजकर तेईस मिनट तक परिघ नामक योग रहेगा जो धार्मिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। नक्षत्रों की स्थिति को देखें तो दोपहर में एक बजकर उनसठ मिनट तक चित्रा नक्षत्र का प्रभाव बना रहेगा और इसके समाप्त होते ही स्वाती नक्षत्र की शुरुआत हो जाएगी जो अगले दिन तक चलेगी। इस पावन अवसर पर पंचांग के नियमों का पालन करना अत्यंत फलदायी रहेगा।

बटुक भैरव जयंती की महिमा और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों और पुरानी मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव के मुख्य रूप से दो रूप पूजनीय हैं जिनमें पहला बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव है। जहां एक ओर काल भैरव को अत्यंत उग्र, डरावना और तामसी प्रवृत्ति का माना जाता है वहीं इसके विपरीत बटुक भैरव जी पूर्णतः सतोगुणी, सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप वाले हैं। उनकी पूजा और साधना करने से भक्तों को जीवन में किसी भी प्रकार का अनजाना डर नहीं सताता है। ऐसी मान्यता है कि बटुक भैरव जी की सच्ची आराधना करने से मनुष्य के जीवन में चल रही सभी परेशानियां स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं और उसे हर प्रकार के सुख-साधन, धन-दौलत तथा भौतिक ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। अज्ञात भय, शत्रुओं का डर और मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए इनकी साधना को अचूक माना गया है। इस पावन जयंती के अवसर पर श्रद्धालु उन्हें प्रसन्न करने के लिए मुख्य रूप से बेसन के लड्डुओं का भोग लगाते हैं क्योंकि उन्हें बेसन से बनी मिठाइयां अत्यंत प्रिय हैं। इनकी कृपा से व्यक्ति के घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

बुधवार चौबीस जून का संपूर्ण पंचांग विवरण

इस विशेष दिन की ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को गहराई से समझने के लिए पंचांग का विस्तार से अध्ययन करना आवश्यक है। वर्ष 2026 के जून महीने की 24 तारीख को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि शाम छह बजकर तेरह मिनट तक ही सीमित रहेगी जिसके बाद तिथि में बदलाव आ जाएगा। दिन की शुरुआत में जो परिघ योग बन रहा है वह सुबह दस बजकर तेईस मिनट तक भक्तों के कार्यों और प्रकृति पर अपना प्रभाव डालेगा। नक्षत्रों के क्रम की बात करें तो चित्रा नक्षत्र दोपहर एक बजकर उनसठ मिनट तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा और उसके तुरंत बाद आकाश मंडल में स्वाती नक्षत्र का आगमन हो जाएगा। इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता श्री बटुक भैरव जयंती का होना है जिससे इस बुधवार का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल बहुत जल्दी मिलता है।

दिन के शुभ और मंगलकारी मुहूर्त

किसी भी नए कार्य, व्यापार या मांगलिक प्रसंग को शुरू करने के लिए शुभ समय और सही घड़ियों का ज्ञान होना बेहद जरूरी माना गया है। इस दिन का सबसे पहला और पवित्र मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त है जो सुबह चार बजकर सैंतीस मिनट से शुरू होकर सुबह पांच बजकर बीस मिनट तक रहेगा। इस शांत समय में की गई ईश्वर की आराधना सर्वोत्तम फल देती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस दिन कोई भी अभिजित मुहूर्त उपलब्ध नहीं है इसलिए इस समय में किसी कार्य की योजना न बनाएं। इसके बाद दोपहर के समय विजय मुहूर्त का सुंदर संयोग बनेगा जो दोपहर दो बजकर चौवन मिनट से शुरू होकर दोपहर तीन बजकर सैंतालीस मिनट तक रहेगा जिसमें शत्रुओं पर विजय या महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त का समय शाम सात बजकर अठारह मिनट से लेकर शाम सात बजकर चालीस मिनट तक रहेगा जब ईश्वर की आरती करना शुभ होता है। वहीं अमृत काल का पावन समय सुबह सात बजकर एक मिनट से सुबह आठ बजकर छपीस मिनट तक रहेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि इस दिन पूरे दिन रवि योग का निर्माण हो रहा है जो सभी प्रकार के दोषों को स्वतः ही नष्ट करने की अद्भुत क्षमता रखता है।

अशुभ समय और टालने योग्य घड़ियां

जिस प्रकार शुभ समय में कार्य करना फलदायी होता है ठीक उसी प्रकार अशुभ समय में किसी भी नए काम की शुरुआत से बचना चाहिए ताकि काम में कोई विघ्न-बाधा न आए। इस दिन राहुकाल का मुख्य समय दोपहर बारह बजकर इकतालिस मिनट से शुरू होकर दोपहर दो बजकर इक्कीस मिनट तक रहेगा और इस समय में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इसके अलावा यमगण्ड काल सुबह सात बजकर बयालीस मिनट से सुबह नौ बजकर बाइस मिनट तक रहेगा। आडल योग की अवधि सुबह छह बजकर तीन मिनट से दोपहर एक बजकर उनसठ मिनट तक रहेगी जबकि विडाल योग दोपहर एक बजकर उनसठ मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 25 जून की सुबह छह बजकर तीन मिनट तक प्रभावी रहेगा। गुलिक काल का समय सुबह ग्यारह बजकर एक मिनट से दोपहर बारह बजकर इकतालिस मिनट तक निर्धारित है। दुर्मुहूर्त का समय दोपहर बारह बजकर चौदह मिनट से दोपहर एक बजकर सात मिनट तक रहेगा। वर्ज्य काल रात आठ बजकर दस मिनट से रात नौ बजकर छप्पन मिनट तक रहेगा और बाण रोग की स्थिति रात ग्यारह बजकर चौदह मिनट तक बनी रहेगी जिसमें यात्रा आदि करने से बचना चाहिए।

देश के प्रमुख शहरों में राहुकाल का सटीक समय

भारत के अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण राहुकाल के समय में भी थोड़ा बदलाव देखने को मिलता है जिसे ध्यान में रखना जरूरी है। देश की राजधानी दिल्ली में राहुकाल दोपहर बारह बजकर तेईस मिनट से दोपहर दो बजकर आठ मिनट तक रहेगा। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में यह समय दोपहर बारह बजकर इकतालिस मिनट से दोपहर दो बजकर इक्कीस मिनट तक रहेगा। चंडीगढ़ में राहुकाल का समय दोपहर बारह बजकर पच्चीस मिनट से दोपहर दो बजकर ग्यारह मिनट तक रहने वाला है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दोपहर बारह बजकर नौ मिनट से दोपहर एक बजकर बावन मिनट तक राहुकाल रहेगा। मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में दोपहर बारह बजकर बाइस मिनट से दोपहर दो बजकर चार मिनट तक का समय अशुभ रहेगा। कोलकाता में यह समय दोपहर से पहले सुबह ग्यारह बजकर उनतालीस मिनट से दोपहर एक बजकर बीस मिनट तक रहेगा। गुजरात के अहमदाबाद में दोपहर बारह बजकर बयालीस मिनट से दोपहर दो बजकर तेईस मिनट तक राहुकाल रहेगा। वहीं दक्षिण भारत के चेन्नई शहर में दोपहर बारह बजकर ग्यारह मिनट से दोपहर एक बजकर अड़तालीस मिनट तक शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय एवं ज्योतिषाचार्य का परामर्श

इस दिन प्रकृति के नियम के अनुसार सूर्योदय का समय सुबह पांच बजकर तेईस मिनट पर होगा जिससे दिन का आरंभ होगा और चारों ओर प्रकाश फैलेगा। वहीं दिन भर की आध्यात्मिक और सांसारिक गतिविधियों के बाद संध्या काल में सूर्यास्त का समय शाम सात बजकर बाइस मिनट पर निर्धारित है जिसके बाद रात्रि का आगमन होगा। यह संपूर्ण ज्योतिषीय विवरण, ग्रहों की स्थिति और समय की सटीक गणनाएं देश के सुप्रसिद्ध और प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य इंदु प्रकाश के द्वारा प्रदान की गई हैं। आचार्य इंदु प्रकाश को भारतीय ज्योतिष शास्त्र, प्राचीन वास्तु शास्त्र और सामुद्रिक शास्त्र का बरसों का गहरा और व्यावहारिक अनुभव है। उनके गहन ज्ञान, सरल स्वभाव और सटीक भविष्यवाणियों के कारण देश भर के लोग उन्हें भली-भांति जानते हैं और उनका सम्मान करते हैं। लोग नियमित रूप से हर सुबह साढ़े सात बजे उन्हें इंडिया टीवी टेलीविजन चैनल के माध्यम से अपने दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान, राशिफल और भविष्य की महत्वपूर्ण जानकारी के लिए सुनते हैं। उनके अनुसार इस दिन नियमों का निष्ठा से पालन करने से जीवन में खुशहाली आती है।

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