जय भगवद् गीते हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते, गीता जयंती पर जरूर पढ़ें यह आरती

धर्म-आस्था

एजेंसी, नई दिल्ली। हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती मनाई जाती है। इस दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत भी रखा जाता है। ऐसे में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को बेहद शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन विष्णु भगवान की पूजा के साथ ही गीता की पूजा भी करनी चाहिए। साथ ही गीता के किसी न किसी अध्याय का पाठ आपको इस दिन अवश्य करना चाहिए और अंत में गीता जी की आरती भी करनी चाहिए। आपको बता दें कि गीता जयंती इस साल 1 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी।

श्री भगवद्‍ गीता आरती

जय भगवद् गीते, जय भगवद् गीते । हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते ॥
कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि, कामासक्तिहरा । तत्त्वज्ञान-विकाशिनि, विद्या ब्रह्म परा ॥ जय भगवद् गीते॥
निश्चल-भक्ति-विधायिनि, निर्मल मलहारी । शरण-सहस्य-प्रदायिनि, सब विधि सुखकारी ॥ जय भगवद् गीते॥
राग-द्वेष-विदारिणि, कारिणि मोद सदा । भव-भय-हारिणि, तारिणि परमानन्दप्रदा ॥ जय भगवद् गीते॥
आसुर-भाव-विनाशिनि, नाशिनि तम रजनी । दैवी सद् गुणदायिनि, हरि-रसिका सजनी ॥ जय भगवद् गीते॥
समता, त्याग सिखावनि, हरि-मुख की बानी । सकल शास्त्र की स्वामिनी, श्रुतियों की रानी ॥ जय भगवद् गीते॥
दया-सुधा बरसावनि, मातु! कृपा कीजै । हरिपद-प्रेम दान कर, अपनो कर लीजै ॥ जय भगवद् गीते॥
जय भगवद् गीते, जय भगवद् गीते । हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते॥

भगवद् गीता आरती के लाभ
भगवद् गीता की आरती करने से आपको मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। आपके दुखों का नाश होता है और पारिवारिक जीवन में आप सुख-समृद्धि पाते हैं। इसके साथ ही गीता जी की आरती आपको आध्यात्मिक क्षेत्र में भी प्रगति प्रदान करती है। सपरिवार गीता जी की आरती करने से घर का माहौल सकारात्मक हो जाता है। यूं तो प्रतिदिन आप गीता जी की आरती का पाठ कर सकते हैं लेकिन गीता जयंती के दिन इसका पाठ करना बेहद शुभ फलदायक माना गया है।

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